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व्यक्ति के मन में अगर ईर्ष्या का भाव है तो कितना भी पुण्य कर ले फल नहीं मिलेगा : प्रपन्नाचार्य महाराज

Dholpur News - धौलपुर.कथा के दौरान महिलाओं के साथ झूमती विदेशी सैलानी। धौलपुर| मन में अगर किसी के प्रति ईर्ष्या है तो कितना भी...

Feb 22, 2020, 08:10 AM IST
Dholpur News - rajasthan news if there is a feeling of jealousy in the mind of the person no matter how much you do virtue you will not get the results prapanacharya maharaj

धौलपुर.कथा के दौरान महिलाओं के साथ झूमती विदेशी सैलानी।

धौलपुर| मन में अगर किसी के प्रति ईर्ष्या है तो कितना भी पुण्य का काम कर लो, पुण्य करने का फल नहीं मिलता है। तीर्थराज मचकुंड में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान वृंदावन से आए कथावाचक प्रपन्नाचार्य महाराज ने प्रेम का संदेश देते हुए कहा कि लोगों को मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम की भावना रखनी चाहिए। और किसी के प्रति भी मन में भी ईर्ष्या नहीं रखनी चाहिए। क्योंकि मन में अगर नकारात्मक भाव आते हैं तो सोच भी नकारात्मक होने लगती है। कथावाचक ने कहा कि किसी को भी दिए गए वचन से पलटना नहीं चाहिए जिसका एक अच्छा उदाहरण राजा बलि हैं। राजा बलि की कहानी सुनाते हुए कथावाचक बोले कि राजा बलि ने 100 यज्ञ कराने का अनुष्ठान किया। उनका यज्ञ अगर समय पर पूर्ण हो जाता तो राजा बलि अनंत काल के लिए इंद्र पद पर आसीन हो जाते। राजा बलि के 99 यज्ञ पूरे हो गए थे। सृष्टि को इस परिस्थिति से बचाने के लिए देवताओं ने भगवान से प्रार्थना की उनकी पुकार सुनकर तब श्रीहरि ने वामन का रूप धरकर धरती पर अवतार लिया जिस समय राजा बलि 100वे यज्ञ का संकल्प करने जा रहे थे। उसी समय वामन के रूप में भगवान दान मांगने के लिए पहुंचे। भगवान ने राजा बलि से यज्ञ करने के लिए पैरों के 3 पग न की भूमि मांगी। इसके बाद भगवान ने राजा बलि से वचन का संकल्प लिया। इस दौरान जगह कराने वाले साधुओं ने वामन को पहचान कर राजा को बताया भी यह विष्णु अवतार हैं और उन्हें वचन ना दें। फिर भी राजा बलि साधुओं की बात को नहीं माने। जिसके बाद साधुओं ने उन्हें श्राप भी दे दिया। साधुओं का श्राप मिलने के बाद भी राजा बलि अपने वचन से नहीं पलटे और वामन रूप में पहुंचे भगवान को वचन का संकल्प दे दिया। कथा से यह संदेश जाता है कि सच बोलो और अपनी बात से कभी भी मत मुकरो। तीर्थराज मचकुंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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