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जंगल में नहीं कोई प्रतिद्वंदी तो बारहसिंगा का कुनबा बढ़कर अब 14 से 35 हुआ

Dholpur News - भारत में जंगली पशुओं की बहुत अधिक विविधता पाई जाती है और यही कारण है कि यहां ऐसे जीव भी दिखने को मिलते हैं जो सभी को...

Jan 25, 2020, 08:11 AM IST
Dholpur News - rajasthan news if there is no rival in the forest then the clone of reindeer has increased from 14 to 35
भारत में जंगली पशुओं की बहुत अधिक विविधता पाई जाती है और यही कारण है कि यहां ऐसे जीव भी दिखने को मिलते हैं जो सभी को आश्चर्यचकित कर देते हैं। उत्तरी और मध्य भारत में पाया जाने वाला बारहसिंगा है। इस जीव को दक्षिणी-पश्चिम नेपाल और अन्य स्थानों पर भी देखा जा सकता है। हालांकि पाकिस्तान तथा बांग्लादेश जैसे कुछ क्षेत्रों में अब यह प्रायः विलुप्त हो गया है। अमूमन ये घने जंगलों में ही रहते हैं, लेकिन तेज सर्दी के बाद अब दो दिन से निकल रही तेज धूप से ये बारहसिंगा का झुंड वन विहार सेंचुरी से निकलकर केसर बाग सेंचुरी में धूप सेंकने निकल आया, जो झुंड में धूप सेंकने व चरते रहे। इस दौरान हमारे पाठक देवेंद्र सिंह ने इस बारहसिंगा के फोटो दोपहर करीब 2 बजे भास्कर के लिए खींचकर उपलब्ध कराया। हालांकि झुंड आहट के साथ बिखर गया, लेकिन एक नर बारहसिंगा का फोटो बंदरों के साथ धूप सेंकते क्लिक हुआ। बता दें कि बारहसिंगा का सबसे विलक्षण अंग इसके सिर पर लगे सींग हैं। वयस्क नर में इन सींगों की शाखाओं की संख्या 10-14 के बीच होती है और यही कारण हैं कि इन्हें बारहसिंगा के नाम से जाना जाता है। यह हिरण की एक प्रजाति है जिसकी ऊंचाई 44 से 46 इंच तक हो सकती है। शरीर पर प्रायः पीले या भूरे रंग के बाल पाए जाते हैं। भारत में बारहसिंगा की मुख्य रूप से तीन उप-प्रजातियां पायी जाती हैं जिन्हें संकटग्रस्त जीव की श्रेणी में रखा गया है। इन प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची ए के तहत शामिल किया गया है।

केसरबाग में बंदरों के साथ अठखेलियां करते बारहसिंगा।

जंगलों में टाइगर और लैपर्ड नहीं होने से यहां सुरक्षित आवास

मानद वन्यजीव प्रतिपालक राजीव तोमर ने बताया कि स्पॉटेड डियर यानि बारहसिंगा अमूमन धौलपुर में वन विहार सेंचुरी में विचरण करता है। केसरबाग में चरते या धूप सेंकने आ गया होगा। इनका कोई प्रतिद्वंदी नहीं होने से वर्ष 2015 में 13 से 14 की संख्या में दिखने वाले बारहसिंगा काे अब 35 से 40 की संख्या में देखा जा रहा है। क्योंकि यहां टाइगर का मूवमेंट नहीं है और न ही लैपर्ड हैं, इसलिए धौलपुर में इनके लिए यहां सुरक्षित जगह होने से साल दर साल इनका कुनबा बढ़ रहा है।

शाकाहारी होता है बारहसिंगा, धौलपुर में उपस्थिति से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी... पूर्व में बारहसिंगा गंगा के मैदान में बहुतायत में पाया जाता था। वह मध्य भारत में भी गोदावरी नदी तक पाया जाता था। गुजरात में इसके 1000 वर्ष पूर्व के अवशेष मिले हैं। आज यह अपने आवासीय क्षेत्र के पश्चिमी परिधि से विलुप्त हो गया है। सन् 2008 में इसकी जंगली आबादी 3500 से 5100 आंकी गई, जिनमें से बहुत प्राणी सुरक्षित क्षेत्रों के बाहर असुरक्षित अवस्था में रहते हैं। तराई इलाके में यह दलदलीय क्षेत्र में रहता है इसकी धौलपुर में उपस्थिति वन्यजीव प्रेमियों के लिए हर्ष का विषय है।

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