मनुष्य के हृदय में भरे हुए विष को प्रेम से ही निकाला जा सकता है : आचार्य अरविंद

Dholpur News - कस्बे की अग्रवाल पंचायती धर्मशाला में विगत 5 दिनों से चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक अरविंद महाराज द्वारा...

Dec 07, 2019, 07:56 AM IST
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कस्बे की अग्रवाल पंचायती धर्मशाला में विगत 5 दिनों से चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक अरविंद महाराज द्वारा पूतना वध, माखन चोरी एवं नंदोत्सव सहित प्रमुख लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। साथ ही यह लीलाएं भगवान द्वारा किस उद्देश्य से की गई, इसके बारे में भी बताया। कथावाचक आचार्य ने बताया के पूतना किसे कहते हैं, इसके विषय में एक बहुत बड़ा ही रहस्य छुपा हुआ है। भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं के दौरान बताया कि हृदय में विष रखने वाले की पहचान निर्मल हृदय के बच्चे को ही होती है। इसके साथ उसके हृदय से दुग्ध पान के जरिए भगवान ने जो जहर निकाला उसी से भगवान ने कलयुग के लिए संकेत भी दिया कि हम किसी के भी हृदय में भरे हुए विश को प्रेम के द्वारा बाहर निकाल सकते हैं| वहीं इस कथा का एक और प्रसंग अरविंद महाराज ने बताया कि वामन अवतार में जब राजा बलि के प्राण हरने के लिए भगवान वामन के रूप में उनके यहां पहुंचे तो राजा बलि की बहन उनके रूप पर मुग्ध हो गई और उन्हें अपने बच्चे की तरह मानकर अपना स्तनपान कराने का भाव उनके हृदय में आया, लेकिन जैसे ही बामन ने अपना असली विशाल स्वरूप सामने लाया और राजा बलि के प्राण हरे तो वही ममत्व का भाव बली की बहन के हृदय विष के रूप में परिवर्तित हो गया जिसे भी भगवान ने स्वीकार कर अगले जन्म में पूर्ण करने का वरदान दिया। यही कारण था कि पिछले जन्म की राजा बली की बहन इस जन्म में पूतना बनी और उसने अपना स्तनपान भी कराया जिससे भगवान द्वारा दिए गए दोनों वरदान एक तो मां के भाव को पूर्ण करना तो वही दूसरा एक राक्षसी के प्राण हर उसे अपने चरणों में स्थान देना पूरा किया। इसी के साथ कलयुग के आधार पर भी अरविंद जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जिसके हृदय में जहर भरा हुआ है वह पूतना के समान ही है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि उस व्यक्ति से घृणा की जाए। अगर हम अपने व्यवहार से, अपने प्रेम से अपने आचार विचार से उस जहर को बाहर निकाल सकें तो वही एक देवी स्वरूप या देवता के समान महिला अथवा पुरुष बन सकती है। भगवान ने इसी के साथ नंदोत्सव का भी अपना एक अलग लीला दिखाकर जन्म पर किस तरह की लीलाएं की जाती हैं और क्यों आवश्यक है इसका भी संकेत किया |

आचार्य अरविंद महाराज ने मानव शरीर से मोह रखने वालों को सचेत करते हुए कहा कि इस शरीर को हम जितना भी सुंदर बनाएं, सुख दे, लेकिन यह सत्य है यह शरीर नश्वर है। जिसका एक दिन नाश होना निश्चित है। ऐसे में अगर हम इस शरीर की महिमा में अत्यधिक जाते हैं| तो हमारी जीवात्मा के प्रति जो भावना रहनी चाहिए उससे पूर्ण दूर हो जाते हैं और जीवात्मा से दूर होना ही हमें परमात्मा से दूर कर देता है। अतः हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि जीवात्मा ही सच्चा संपर्क है जो परमात्मा से हमें जोड़ता है। बाकी शरीर तो मात्र एक पुतला है जिसका एक दिन क्षय होना निश्चित है|

बाड़ी. कथा का वाचन करते आचार्य अरविंद्र महाराज।

कथावाचक आचार्य अरविंद महाराज ने गौशाला का भ्रमण कर गायों को खिलाया चारा

भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य अरविंद जी महाराज ने स्थानीय गौशाला का भी भ्रमण किया और गौ सेवा की साथ ही अपनी कथा के दौरान गोवर्धन अर्थात गो का वह धन जिससे विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति तो मिलती है तो वहीं पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पंचामृत एवं गाय के अंदर बसे समस्त देवी देवताओं के पास पर भी विस्तृत वर्णन किया। साथी गोवर्धन पर्वत के बारे में वर्णन करते हुए बताया कि चाहे कोई कितना भी बड़ा हो अगर उसके अंदर अहम है तो वह भगवान द्वारा एक ना एक दिन जरूर तोड़ दिया जाता है गोवर्धन के द्वारा भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के घमंड को तोड़कर यह सिद्ध कर दिया कि अहम हमेशा नाश का ही घोतक होता है |

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