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आरएसी के क्वार्टर गार्ड बनेंगे पर्यटन स्थल, यहां हुआ था आखिरी सैनिक विद्रोह

Dholpur News - इतिहास के पन्नों में अब तक लोगों की नजरों से छिपी दो तारीखाें से अब पर्यटक रूबरू हो सकेंगे। भास्कर सबसे पहले इन...

Feb 22, 2020, 08:10 AM IST
Dholpur News - rajasthan news rac39s quarter guard will become tourist destination last military revolt took place here

इतिहास के पन्नों में अब तक लोगों की नजरों से छिपी दो तारीखाें से अब पर्यटक रूबरू हो सकेंगे। भास्कर सबसे पहले इन दोनों तारीखों में छिपे इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को सामने ला रहा है। यहां हम बता रहे हैं पहला महत्वपूर्ण घटनाक्रम जो भारत के अंतिम सैनिक विद्रोह का है। इसमें नृसिंह इन्फैंट्री (वर्तमान में आरएसी परिसर में क्वार्टर गार्डस) में हुआ था। जब महाराजा उदयभान सिंह के खिलाफ सैनिकों ने बगावत कर नृसिंह इन्फैंट्री पर कब्जा जमा लिया था। भारत में तीन प्रमुख सैनिक विद्रोह हुए। इनमें पहला सन‌् 1857 की क्रांति है, जिसे सिपाही विद्रोह कहा जाता है। दूसरा 1946 में मुंबई में नाविक विद्रोह के रूप में जाना जाता है। इसके बाद अंतिम सैनिक विद्रोह इतिहास में धौलपुर के नाम है। उसके बाद कभी सैनिकों ने दुबारा हथियार नहीं उठाए।

इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि धौलपुर में अंतिम सैनिक विद्रोह इसलिए हुआ था कि देश तो आजाद हो गया था, लेकिन महाराज उदयभान सिंह राज्य पर अपना शासन स्थापित किए हुए थे। तब लोगों में राष्ट्रवाद चरम पर पहंुंच गया था। देश के अंतिम सैनिक विद्रोह के नाम से पहचाने जाने वाला यह विद्रोह धौलपुर में 22 फरवरी 1948 को हुआ था। यह विद्रोह लगातार तीन दिन तक चला।

पटेल के हस्तक्षेप पर सैनिकों ने किया था आत्मसमर्पण

जहां आरएसी बटालियन है, उस वक्त वहां क्वार्टर गार्डस में राज्य के हथियार रखे थे। उन पर सैनिकों ने कब्जा कर क्वार्टर गार्ड पर तिरंगा लहरा दिया था। सरदार पटेल के आश्वसन पर सैनिकों ने आत्मसपर्मण किया। आत्मसमर्पण के बाद उन पर कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू हुई।

आरएसी के क्वार्टर गार्डस


केके अग्रवाल, सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग


वेद मुनि, आर्य समाज के प्रतिनिधि



इधर, दीक्षा के बाद दयानंद सरस्वती ने 21 फरवरी को धौलपुर में दिया था पहला उद्बोधन

मथुरा में स्वामी विरजानंद के आश्रम में दीक्षा लेकर मुंबई जाते वक्त स्वामी दयानंद सरस्वती धौलपुर में रुके थे। यहां स्थित चौपड़ा महादेव मंदिर पर 21 फरवरी 1864 में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने धर्म चक्र प्रवर्तन के तहत पहला उद‌्बोधन दिया था। आज लोग इस बात से पूरी तरह से अनजान हैं कि जहां वे महादेव के दर्शन को आते हैं, उस स्थान पर कभी दयानंद सरस्वती ने प्रवचन किए थे। स्वामी दयानंद सरस्वती को आर्य समाज भारत का राष्ट्रीय आंदोलन का अग्रदूत भी कहा जाता है।

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