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धौलपुर पहुंचा रणथंभोर का टाइगर गौशाला के जंगल में मिले पदचिन्ह

2 वर्ष पहले
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दमोह व गिरोनिया के जंगलों की तो रणथंभोर के टाइगर कई बार सैर कर गए, लेकिन धौलपुर की सीमा पर स्थित गोशाला के जंगल में वहां के टाइगर ने पहली बार दस्तक दी है। जंगल में पगमार्क मिलने के बाद टाइगर के मौजूद होने का पुख्ता होने का सबूत भी मिल गया। अब वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारी जंगल में टाइगर को ट्रैक करने का प्रयास कर रहे हैं।

बुधवार को करौली के वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारी टाइगर का पीछा करते हुए गोशाला के जंगल पहुंचे। जंगल में टाइगर के ताजा पगमार्क मिलने पर उसके जंगल में ही होने के चलते सुरक्षा की दृष्टि से जंगल से सटे गांवों में वनविभाग के अधिकारी ग्रामीणों को सजग करने में लग गए हैं। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को रात में अकेला नहीं निकलने, जंगल में चरवाहों को जाने पर रोक लगा दी है। टाइगर के आने की सूचना मिलने के बाद आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं वन विभाग के अधिकारी भी टाइगर को पकड़ने के लिए जंगल में तलाशी अभियान चलाए हुए हैं। टाइगर को पकड़ने के लिए अलवर और रणथंभोर की रेस्क्यू टीम भी लगी हुई है।

पहले भी यहा मोहन और सुल्तान टाइगर आ चुके है

सरमथुरा.गौशाला के जंगल में मिले टाइगर के पगमार्क।

दमोह-गिरोनिया के जंगल टाइगर के लिए मुफीद

धौलपुर जिले में दमोह और गिरोनिया के जंगल रणथंभोर के टाइगरों के लिए मुफीद हैं। इससे पहले कई दिनो तक यहां पर सैर करने के बाद मोहन व सुल्तान नामक टाइगर वापस लौट गए थे। इन दोनो जंगलों की खासियत यह है कि घने होने के साथ ही ये कैलादेवी अभयारण्य से जुड़े हुए हैं। जिसके कारण टाइगर इन दोनों जंगलो में अपने आपको बिल्कुल सुरक्षित समझते हैं। इधर उक्त टाइगर के ट्रैस नहीं होने के कारण वनकर्मी अभी उसका कोड और नाम बताने में असमर्थता जता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भरतपुर जिले में भी पेंथर के पगमार्क दिखाई दिए थे, जिसके बाद सतर्कता बढ़ा दी गई थी।

सात दिन पूर्व करौली में चरवाहे को उठा ले गया था यही बाघ

रणथंभोर से 8-10 दिन पूर्व यही बाघ करौली जिले के दुर्गसी घटा नाहरदह के जंगल में पहुंच गया था। जहां 31 जुलाई को जंगल में पशु चराने गए एक चारवाहे को उठा ले गया। इसके बाद जंगल में चरवाहे के शव के पास टाइगर के पगमार्क मिले थे। जिससे पता चला कि चरवाहे की मौत टाइगर द्वारा उसका शिकार करने के बाद खाने से हुई थी। घटना के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने उसे ट्रैक करना शुरू कर दिया। इस बीच बुधवार को उसके पगमार्क गोशाला के जंगल में मिले। बताया गया है कि बाघ को ढूंढने के लिए वन विभाग के 60 अधिकारी, कर्मचारी लगे हुए हैं।

लापता टाइगर को तलाश रहीं वन विभाग की टीमें : मीणा

रणथंभोर से लापता टाइगर को ढूंढने के लिए रणथंभोर सहित अलवर और करौली वन विभागी की रेस्क्यू टीम द्वारा लगातार सर्चिंग की जा रही है। टाइगर के मूवमेंट को देखते हुए सरमथुरा वन विभाग के अधिकारियों द्वारा सघन गश्त की जा रही है। ग्रामीणों को जंगल में घूमने के लिए मना किया गया है।

-विक्रमसिंह मीणा, रेंजर सरमथुरा

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