सूचना का अधिकार बना हथियार : कृष्ण भारद्वाज

Dholpur News - धौलपुर| देश के आम नागरिक को जवाबदेही एवं पारदर्शिता के उद्देश्य से 12 अक्टूबर 2005 को सूचना का अधिकार दिया गया। जिसे...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 08:31 AM IST
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धौलपुर| देश के आम नागरिक को जवाबदेही एवं पारदर्शिता के उद्देश्य से 12 अक्टूबर 2005 को सूचना का अधिकार दिया गया। जिसे शनिवार को 14 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे। आरटीआई एक्टिविस्ट मृदुल कृष्ण भारद्वाज ने सूचना के अधिकार को 14 वर्ष पूर्ण होने की पूर्व संध्या पर बताया कि राजस्थान में इन 13 वर्षों में सिर्फ 8 विभाग ही आॅनलाइन आवेदन ले पाते हैं। बाकी तो अभी भी वहीं पैंतरे अपना रहे हैं। मुदुल ने बताया कि वैसे तो संसद द्वारा कानून बनाकर अनेक अधिकार जनता के समक्ष रखे गए। फिर ये अलग कैसे! आरटीआई से कोई भी आम नागरिक सरकार, प्रशासन एवं सरकारी स्वामित्व प्राप्त करने वाली संस्थाओं से सवाल पूछ सकता है। अब बात आती है आखिर सरकार से सवाल कैसे पूछा जाएं। आपको जिस विभाग से संबंधित सूचना लेनी है उस विभाग के लोक सूचना अधिकारी को आवेदन करना है। अगर आप उस विभाग के नाम से परिचित नहीं हैं तो एक्ट की धाराके तहत आपका आवेदन स्वत: ही 5 दिन में उस विभाग में स्थानांतरित हो जाएगा और आवेदक को भी सूचित करने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में मौजूदा सरकार संसद के मानसून सत्र में आरटीआई संशोधन बिल लेकर आई जिसमें बताया गया कि सूचना आयोगों के आयुक्त के वेतन व भत्ते सरकार तय करेगी। मतलब साफ था सरकार के दवाब में काम करना होगा अन्यथा पद से हटा दिए जाएंगे। जबकि आयोगों के आयुक्त के वेतन व भत्ते न्यायालय के जज के समान रखें गए हैं, जो कि स्वतंत्र संस्था के रूप में काम कर रहे हैं। देशभर में आरटीआई एक्टिविस्टों के विरोध के बावजूद सरकार बैकफुट पर आ गई और बिल को वापस लेना पड़ा। अब तो कई आरटीआई एक्टिविस्टों को आरटीआई संसोधन बिल वापस न लेने से अपनी जान गंवानी पड़ गई है।

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