मचकुंड पर हर व्यक्ति के हाथों में डाब और पितरों के प्रति दिखा श्रद्धा का भाव

Dholpur News - शहर में श्राद्ध पक्ष शुक्रवार से शुरू हो गए। पितरों को तर्पण के लिए तीर्थराज मचकुंड सरोवर में जल्दी सुबह पूर्वजों...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:15 AM IST
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शहर में श्राद्ध पक्ष शुक्रवार से शुरू हो गए। पितरों को तर्पण के लिए तीर्थराज मचकुंड सरोवर में जल्दी सुबह पूर्वजों को अर्पण तर्पण करने के लिए जुटना शुरू हुआ। मचकुंड सरोवर के अधिकांश घाट वेद मंत्र से गूंज रहे थे। इस अवसर पर सरोवर के घाटों पर जनेऊ धारण कर हाथों में डाब को पानी में डुबोने से हो रही छप छप की आवाज यहां भी नीरवता को तोड़ रही थी। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा, जिले भर के लाेग पूर्वजों को तर्पण करने आए।

तर्पण करने वाले हर व्यक्ति के हाथों में डाब थी तथा अपने पितरों के प्रति श्रद्धा का भाव नजर आया। श्राद्ध पक्ष में मचकुंड सरोवर में पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व है। इसलिए मचकुंड सरोवर में बढ़ी तादाद में लोग जुटते हैं। लोगों ने सरोवर में स्नान, ध्यान तथा तर्पण करने के बाद मंदिरों में पूजा अर्चना की। इस दौरान मचकुंड चौराहे सहित मचकुंड रोड पर जगह जगह डाब बेचने वालों भी लोगों को रोक रोककर डाब बेचते रहे। बता दें कि पूर्वजों की याद में जल तर्पण करने की परंपरा है। मचकुंड सरोवर में डाब की सोलह शिखा से जल तर्पण करते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार डाब से तर्पण करना पवित्र माना जाता है। इसलिए डाब से तर्पण करने की परंपरा है। पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर को खत्म होगा।

श्राद्ध की तिथियां

13 सितंबर पूर्णिमा श्राद्ध, 14 सितंबर प्रतिपदा, 15 सितंबर द्वितीया, 16 सितंबर तृतीया, 17 सितंबर चतुर्थी, 18 सितंबर पंचमी, 19 सितंबर षष्ठी, 20 सितंबर सप्तमी, 21 सितंबर अष्टमी, 22 सितंबर नवमी, 23 सितंबर दशमी, 24 सितंबर एकादशी, 25 सितंबर द्वादशी, 26 सितंबर त्रयोदशी, 27 सितंबर चतुर्दशी, 28 सितंबर सर्वपित्र अमावस्या

लोगों ने स्नान कर पूर्वजों को किया पिंडदान और तर्पण, पंडितों को खिलाया भोजन

मनियां. नदी किनारे स्नान कर तर्पण व पिंडदान करते लोग

मनियां| शुक्रवार 13 सितम्बर से पितृपक्ष शुरू हो गए। लोगों ने नदी, तालाब आदि जगहों पर स्नान कर अपने पूर्वजों को तर्पण करते हुए सुख शांति की कामना की। ऐसी मान्यता है कि इन 16 दिन हमारे पितृ पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं। इन दिनों में पितृों को पिण्ड दान तथा तिलांजलि कर उन्हें संतुष्ट करना चाहिए। श्राद्ध के सोलह दिनों अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते हैं। पंडित गुड्डू शर्मा ने बताया कि वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है, लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है।

सैपऊ| पित्र पक्ष के प्रारंभ होने पर कस्बा स्थित जीवनदायिनी पार्वती नदी के तट पर शुक्रवार सुबह से ही सैकड़ों की तादाद में लोगों ने पहुंचकर पितरों को तर्पण किया। पितृपक्ष के पहले दिन सुबह 6:00 बजे से से करीब 11:00 बजे तक पार्वती नदी पर आसपास के लोगों की भीड़ देखी गई। आचार्य योगेश शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन से पितरों को जल तर्पण किया जाता है। पितरों को तर्पण करने से पित्र दोष से छुटकारा मिलता है। पंडित वृन्दावन शर्मा,पंडित हरिकांत शर्मा व पंडित श्यामसुंदर ने नदी किनारे पहुंचे लोगों को विधि विधान के साथ जनेऊ धारण करा कर पितरों को जल का तर्पण कराया।

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