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बेटा सरकारी शिक्षक बना तो लज्जाराम ने कलेक्टर से कहा- मेरा नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटवा दें

एक वर्ष पहले
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कहते हैं कि नैतिकता किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा धन होती है। ऐसा ही शनिवार को खेरली में सामने आया। जहां खेरली निवासी बुजुर्ग लज्जाराम ने अनूठी मिसाल पेश करते हुए कलेक्टर से आग्रह किया कि उसका नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटा दिया जाए। उसकी बात सुनकर कलेक्टर राकेश कुमार जायसवाल ने प्रसन्नता जताते हुए उसका सम्मान किया।

शनिवार को खेरली के अटल सेवा केन्द्र में कलेक्टर जायसवाल स्वच्छ भारत मिशन की बैठक लेते हुए ग्रामीणों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बता रहे थे। इसी दौरान गांव के ही निवासी लज्जाराम कलेक्टर के सामने पहुंचे और उनसे अनुरोध किया कि उनका नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटा दिया जाए, ताकि किसी और पात्र व्यक्ति को इस योजना का लाभ मिल सके। इस पर कलेक्टर ने जब लज्जाराम से नाम हटवाने का कारण जानना चाहा तो उन्होंने सहज भाव में बताया कि अब उनका पुत्र सरकारी शिक्षक बन गया है। इसलिए अब उसे खाद्य सुरक्षा की जरूरत नहीं है। लज्जाराम की बात सुनकर कलेक्टर जायसवाल प्रभावित हुए बिना नहीं रहे। उनके अाग्रह को सुनकर कलेक्टर ने लज्जाराम का सम्मान करते हुए लोगों को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इसके बाद कलेक्टर ने वहां मौजूद ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण से शेष रहे 51 परिवार भी 15 मार्च तक शौचालय का निर्माण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि खुले में शौच करने वाले व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा। इसके लिए निगरानी समिति का गठन किया गया है।

घूंघट प्रथा समाप्त करने की दिलाई शपथ

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर राकेश कुमार जायसवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की घोषणा के तहत सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए घूंघट प्रथा को समाप्त करने की शपथ दिलाते हुए कहा कि मुंह पर घूंघट डालना, साड़ी का पल्लू माथे से नीचे लटका लेना कोई बड़ी बात नहीं है। पर उसके साथ जो प्रतिबंध एवं नियम जुड़े होते हैं और परदे के संबंध में जो मान्यता महिलाओं पर थोपी जाती है वह नारी के मन में हीन भावना पैदा करती है। इसलिए पर्दा प्रथा को नारी जाति एवं समाज के माथे पर लगा एक बड़ा कलंक है। इसलिए ऐसी प्रथा को समाप्त करने के लिए ही मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई है।
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