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विश्नोई समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से ग्रहण किया पाहळ

भास्कर संवाददाता| धोरीमन्ना निकटवर्ती गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी पर विश्व वन्यजीव दिवस के उपलक्ष्य में महंत...

Danik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:45 AM IST
भास्कर संवाददाता| धोरीमन्ना

निकटवर्ती गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी पर विश्व वन्यजीव दिवस के उपलक्ष्य में महंत स्वामी हरिदास महाराज के सानिध्य में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी में अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भारमलराम खिलेरी ने कहा कि इस प्रकृति में वन्य जीव एवं वनस्पतियों एवं पर्यावरण का जब तक संतुलन बना रहेगा, तब तक इस पृथ्वी पर अपना जीवन संभव है। जब प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा, तब इस पर जीवन जीना बहुत कठिन बात हो जाएगा। श्री गुरु जंभेश्वर सेवक दल के उपाध्यक्ष हीराराम मांजू ने कहा कि भगवान जांभोजी ने कहा जीव दया पालणी रुंख लीलो नहीं घावे का संदेश आज से 550 वर्ष पहले ही दे दिया था। भगवान जांभोजी ने कहा था कि वन्य जीवों और पेड़-पौधों को बचाना मानव मात्र का कर्तव्य है। जब तक प्रकृति का संरक्षण अपन करेंगे, तब तक प्रकृति अपना भरण पोषण करेगी। जब प्रकृति का हम लोग विनाश करेंगे तो प्रकृति अपना विनाश करेगी। इसलिए प्रकृति का और अपना मेल जोल होना अति आवश्यक है। जंभेश्वर सेवक दल के अध्यक्ष मोहनलाल खिलेरी ने कहा कि वन्यजीवों एवं पेड़-पौधों के लिए आज से 350 वर्ष पहले अमृतादेवी विश्नोई ने एक खेजड़ी पेड़ के लिए अपना बलिदान दिया। अमृता से प्रेरित होकर बिश्नोई समाज के 363 नर और नारियों ने पेड़ों के लिए अपने शीश कटा दिए और संदेश दिया। सोनड़ी के सरपंच प्रतिनिधि गंगाराम ने कहा कि 24 दिसम्बर 2013 को संयुक्त राष्ट्रीय महासभा ने विलुप्त होती वन्य जीवों की प्रजातियों को देखते हुए हर वर्ष 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम में गुरु जंभेश्वर उच्च माध्यमिक विद्यालय के जगदीश मांजू, जम्भेश्वर सेवक दल के कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश बोला, अशोक कुमार बोला, गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी के अध्यक्ष हरीराम खिलेरी, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष हरीराम मांजू, किसनाराम गोदारा, आरपी मोहनलाल खिलेरी, पूनमचन्द खिलेरी, जयकिशन गोदारा, रामजीवन गोदारा, गोविन्द खीचड़, अशोक खिलेरी, ओमप्रकाश खीचड़, आशीष जाणी, मोहनलाल खीचड़, कृष्णकुमार धतरवाल सहित ग्रामीण उपस्थित थे।

जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी में विश्व वन्यजीव दिवस के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी में पर्यावरण व वन्य जीव संरक्षण को लेकर विश्नाेई समाज ने की चर्चा

भास्कर संवाददाता| धोरीमन्ना

निकटवर्ती गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी पर विश्व वन्यजीव दिवस के उपलक्ष्य में महंत स्वामी हरिदास महाराज के सानिध्य में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी में अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भारमलराम खिलेरी ने कहा कि इस प्रकृति में वन्य जीव एवं वनस्पतियों एवं पर्यावरण का जब तक संतुलन बना रहेगा, तब तक इस पृथ्वी पर अपना जीवन संभव है। जब प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा, तब इस पर जीवन जीना बहुत कठिन बात हो जाएगा। श्री गुरु जंभेश्वर सेवक दल के उपाध्यक्ष हीराराम मांजू ने कहा कि भगवान जांभोजी ने कहा जीव दया पालणी रुंख लीलो नहीं घावे का संदेश आज से 550 वर्ष पहले ही दे दिया था। भगवान जांभोजी ने कहा था कि वन्य जीवों और पेड़-पौधों को बचाना मानव मात्र का कर्तव्य है। जब तक प्रकृति का संरक्षण अपन करेंगे, तब तक प्रकृति अपना भरण पोषण करेगी। जब प्रकृति का हम लोग विनाश करेंगे तो प्रकृति अपना विनाश करेगी। इसलिए प्रकृति का और अपना मेल जोल होना अति आवश्यक है। जंभेश्वर सेवक दल के अध्यक्ष मोहनलाल खिलेरी ने कहा कि वन्यजीवों एवं पेड़-पौधों के लिए आज से 350 वर्ष पहले अमृतादेवी विश्नोई ने एक खेजड़ी पेड़ के लिए अपना बलिदान दिया। अमृता से प्रेरित होकर बिश्नोई समाज के 363 नर और नारियों ने पेड़ों के लिए अपने शीश कटा दिए और संदेश दिया। सोनड़ी के सरपंच प्रतिनिधि गंगाराम ने कहा कि 24 दिसम्बर 2013 को संयुक्त राष्ट्रीय महासभा ने विलुप्त होती वन्य जीवों की प्रजातियों को देखते हुए हर वर्ष 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम में गुरु जंभेश्वर उच्च माध्यमिक विद्यालय के जगदीश मांजू, जम्भेश्वर सेवक दल के कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश बोला, अशोक कुमार बोला, गुरु जंभेश्वर मंदिर सोनड़ी के अध्यक्ष हरीराम खिलेरी, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष हरीराम मांजू, किसनाराम गोदारा, आरपी मोहनलाल खिलेरी, पूनमचन्द खिलेरी, जयकिशन गोदारा, रामजीवन गोदारा, गोविन्द खीचड़, अशोक खिलेरी, ओमप्रकाश खीचड़, आशीष जाणी, मोहनलाल खीचड़, कृष्णकुमार धतरवाल सहित ग्रामीण उपस्थित थे।

सांवलासर के हनुमान चौहटे पर सामूहिक पाहळ ग्रहण

होली पर्व के दूसरे दिन विश्नोई समाज की ओर से गुरु जम्भेश्वर मंदिर छोटू व सांवलासर गांव के हनुमान चौहटे पर सामूहिक रूप से एकत्रित होकर 120 शब्दों का वैदिक मंत्रोच्चार से सिद्ध किया पाहल ग्रहण किया। पाहल ग्रहण के बाद ही समाज के लोग अन्न जल ग्रहण किया। इसके बाद क्षेत्र घर परिवार में शांति के लिए पाहल का छिड़काव गया। होली स्नेह मिलन के अवसर पर हनुमान चौहटे सांवलासर के विकास व जीर्णोद्धार को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान समाज के लोगों की मौजदूगी में करीब 7 लाख की सहयोग राशि देने की घोषणा हुई। इस दौरान कमेटी का भी गठन किया गया।

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