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साधना भवन की संस्कार पाठशाला में 150 बच्चे ले रहे हैं जैन तत्व व क्रियाओं की शिक्षा

अचलगच्छ जैन श्री संघ की साध्वी भव्यगुणा का वर्ष 2018 का चातुर्मास धोरीमन्ना में होगा। जिसकी जय बोलने को लेकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 02:50 AM IST

साधना भवन की संस्कार पाठशाला में 150 बच्चे ले रहे हैं जैन तत्व व क्रियाओं की शिक्षा
अचलगच्छ जैन श्री संघ की साध्वी भव्यगुणा का वर्ष 2018 का चातुर्मास धोरीमन्ना में होगा। जिसकी जय बोलने को लेकर धोरीमन्ना जैनश्री संघ के नागरिक सोमवार को साधना भवन बाड़मेर पहुंचे। जहां धोरीमन्ना जैन समाज के साध्वी भव्यगुणा से चातुर्मास के लिए विनती की।

इस कड़ी में साधना भवन में साध्वी भव्यगुणा व तीर्थगुणा की निश्रा एवं अखिल राजस्थान अचलगच्छ जैनश्री संघ के अध्यक्ष बाबूलाल वडेरा के सानिध्य में एक विधिवत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पवन बोहरा ने बताया कि कार्यक्रम में अखिल राजस्थान अचलगच्छ जैनश्री संघ के अध्यक्ष बाबूलाल वडेरा एवं बाड़मेर अचलगच्छ जैनश्री संघ के अध्यक्ष हनुमानदास बोहरा ने अपने विचार रखे और धोरीमन्ना संघ को सहयोग का विश्वास दिलाया। साध्वी भव्यगुणा का धोरीमन्ना नगरी में मंगल प्रवेश आगामी 18 जुलाई को होगा। इसी कड़ी में धोरीमन्ना जैनश्री संघ के लोगों का अचलगच्छ जैनश्री संघ, बाड़मेर की ओर से साधना भवन, बाड़मेर आगमन पर तिलक, माला व दुपट्टा पहनाकर स्वागत-सम्मान किया गया।

साध्वी भव्यगुणा एवं तीर्थगुणा के सान्निध्य में चल रही हैं संस्कार पाठशाला

बाड़मेर. अचलगच्छ जैन श्रीसंघ बाड़मेर एवं अचलगच्छ जैन युवक परिषद बाड़मेर के संयुक्त तत्वावधान एवं साध्वी भव्यगुणा एवं साध्वी तीर्थ गुणा की निश्रा में साधना भवन, बाड़मेर में प्रारंभ जैन संस्कार पाठशाला में सोमवार को बच्चों को जैन तत्वों एवं क्रियाओं का ज्ञान करवाया गया। श्री अचलगच्छ जैन युवक परिषद के अध्यक्ष मुकेश बोहरा अमन ने बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश को देखते हुए जैन समाज के महिला-पुरुषों एवं बच्चों में संस्कारों एवं व्यवहारिक जीवन को लेकर सोमवार को जैन संस्कार पाठशाला में साध्वीवृंदों की पावन निश्रा में दिन की शुरूआत प्रभु वंदना से हुई। तत्पश्चात् बच्चों ने अपने-अपने वर्ग अनुसार जैन धार्मिक तत्व ज्ञान का व्यावहारिक ज्ञानार्जन किया। विशेष प्रवचन एवं जैन संस्कार पाठशाला के प्रथम दिन रविवार को साध्वी भव्यगुणा ने कहा कि मनुष्य का जीवन बेहद ही अनमोल होता है और जिसकी हमें महत्ता समझने की जरूरत है। मगर हम समय की आंधी एवं भौतिकवादिता के दौर में जीवन की महत्ता को भूलते जा रहे है। इस संस्कार पाठशाला में श्रावक-श्राविकाएं तथा 150 से अधिक बच्चे उपस्थित रहे।

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