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सफलता प्राप्त करने व किस्मत का दरवाजा खोलने के लिए आत्मविश्वास के साथ पुरुषार्थ जरुरी : मुनि मनितप्रभ सागर

दुनिया में किस्मत का ताला खोलने के लिए दो चाबियां है, एक आत्मविश्वास व दूसरी पुरुषार्थ। यह सत्य है कि किस्मत कोई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 01, 2018, 04:10 AM IST

  • सफलता प्राप्त करने व किस्मत का दरवाजा खोलने के लिए आत्मविश्वास के साथ पुरुषार्थ जरुरी : मुनि मनितप्रभ सागर
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    दुनिया में किस्मत का ताला खोलने के लिए दो चाबियां है, एक आत्मविश्वास व दूसरी पुरुषार्थ। यह सत्य है कि किस्मत कोई बदल नहीं सकता। लेकिन आत्मविश्वास व पुरुषार्थ के बिना किस्मत की माला फेरना व्यर्थ है। बिना अात्मविश्वास व पुरुषार्थ किए किस्मत के भरोसे कोई सफल नहीं हो सकता है। यह बात मुनि मनितप्रभ सागर महाराज ने कुशल कांति मणि प्रवचन वाटिका, सुखसागर नगर कोटड़िया-नाहटा मैदान में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं से कही। जीवन में सफलता, समृद्धि, बुलंदियां प्राप्त करने के लिए जीव से शिव, वासना से उपासना, साधना से सिद्धि की ओर अग्रसर होने के लिए आत्मविश्वास जरुरी है। आत्मविश्वास और पुरुषार्थ दोनों एक-दूसरे के पूरक तत्व है। यदि आत्मविश्वास है, लेकिन पुरुषार्थ नहीं किया तो कोई काम नहीं होगा। मुनि ने कहा कि इस दुनिया में कोई चीज प्राप्त करना मुश्किल नहीं है, बस सारा खेल मन में मानने का है। जिसे हम कठिन मानते है, वह कठिन है और सरल मानते है, वह सरल है।

    मुनि ने अल्बर्ट आइंस्टीन का उदाहरण देते हुए बताया कि आइंस्टीन की स्कूल से नोटिस आया कि बच्चा पढ़ नहीं सकता, इसलिए इसे अपनी स्कूल में नहीं पढ़ा सकेंगे। जब यह नोटिस उनकी मां ने देखा तो वह बहुत निराश हुई। लेकिन उसने आइंस्टीन से कहा कि बेटा यह स्कूल तुम्हारे काम की नहीं हैं, तुम्हारी योग्यता इससे कई गुना अधिक है। इसलिए मैं तुम्हे पढ़ाऊंगी, आगे चलकर वही आइंस्टीन दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक बने। ऐसे ही अनेकों महापुरुषों में भगवान महावीर, जिनदत्तसूरि, कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य, कुमारपाल महाराजा, अब्राहम लिंकन, रविन्द्र जैन, थॉमस आदि का जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा हैै। जिन्होंने अपने जीवन में समय का सदुपयोग करते हुए आत्म विश्वास और पुरुषार्थ के माध्यम से सफलता को प्राप्त किया। खरतरगच्छ चातुर्मास समिति के सहसंयोजक अशोक धारीवाल व सदस्य पवन छाजेड़ ने बताया की बुधवार को तप में तपकर बनना है कुंदन, विषय पर मुनि मनित प्रभसागर का विशेष प्रवचन होगा व स्वर्णिम चातुर्मास-2018 चातुर्मास प्रवचन माला फोल्डर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया जाएगा।

    धर्म-समाज-संस्था

    बाड़मेर. कोटड़िया-नाहटा मैदान में चातुर्मािसक प्रवचन देते मुनि मनितप्रभ सागर व उपस्थित श्रद्धालु।

    जीवन को चरित्रवान बनाना ही सबसे बड़ी सफलता, सत्संग में ही जीवन जीने की कला : साध्वी सुरंजना

    बाड़मेर | सत्संग में जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। जिसे जीवन जीने की कला आ गई, उसका जीवन सार्थक हो गया। यह बात जैन न्याति नोहरे में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान साध्वी सुरंजना ने श्रद्धालुओं से कही। साध्वी ने कहा कि मानव जीवन भी एक गाड़ी के समान है, जिस प्रकार बिना ब्रेक की गाड़ी कोई काम की नहीं, उसी तरह मानव जीवन की गाड़ी भी बिना संयम, व्रत-नियम रूपी ब्रेक के कोई काम की नहीं है। हम बिना संयम रूपी ब्रेक की गाड़ी चलाकर स्वयं का निरंतर सजा के भागी बना रहे है। जीवन को चरित्रवान बनाना ही जीवन की सफलता है। मनुष्य जीवन की प्राप्ति के बाद व्रत, नियम जरुरी है, व्रत नियम के बिना यह जीवन बिना लगाम का घोड़ा है। मनुष्य जन्म चिंतामणि र| के समान प्राप्त हुआ है, इस अनमोल र| रूपी मनुष्य जीवन को भोग-सुखों में गंवा दिया तो क्या पता यह मनुष्य जन्म वापस कब प्राप्त होगा।

    साध्वी ने सागर दत्त चरित्र बताते हुए कहा कि सागर दत्त के जीवन का मात्र एक ही ध्येय था, धन-दौलत रहे या नहीं रहे, लेकिन मेरा धर्म नहीं जाना चाहिए। वह धन व वैभव का दास नहीं बनकर धर्म का दास था। इस वजह से उसकी प्रशंसा देवलोक में देवता भी करते थे। चातुर्मास समिति के मीडिया प्रभारी चन्द्रप्रकाश बी. छाजेड़ व स्वरूपचंद संखलेचा ने बताया कि साध्वी के प्रवचन सुनने के लिए रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु भाग ले रहे है। दो अगस्त से सिद्धि तप की तपस्या शुरू हो रही है, जिसमें जुड़ने के लिए साध्वी ने सभी को प्रेरणा दी। प्रवचन के पश्चात चातुर्मास समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें चातुर्मास के दरम्यान होने वाली तपस्या एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुव्यवस्थित रूप से व्यवस्था के लिए समितियां बनाकर जिम्मेदारियां सौंपी गई। संघ पूजन का लाभ सरदारमल सेठिया परिवार धोरीमन्ना वालों ने लिया।

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