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संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने 2 अप्रैल को बंद में व्यापारिक संगठनों से मांगा समर्थन

अनुसूचित जाति जन जाति संघर्ष समिति के 2 अप्रैल को भारत बंद के आह्वान को लेकर समिति पदाधिकारियों ने शहर के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 31, 2018, 04:20 AM IST

संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने 2 अप्रैल को बंद में व्यापारिक संगठनों से मांगा समर्थन
अनुसूचित जाति जन जाति संघर्ष समिति के 2 अप्रैल को भारत बंद के आह्वान को लेकर समिति पदाधिकारियों ने शहर के व्यापारिक संगठनों से मिलकर बंद को सफल बनाने का आह्वान करते हुए समिति पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी। समिति अध्यक्ष प्रेमाराम मेघवाल व महासचिव पुखराज ने बताया कि शुक्रवार को संगठन के लोगों ने व्यापार मंडल के पदाधिकारी शंकरलाल परसावत, रामनिवास रूवटिया व विमल लाहोटी से मिलकर बंद में सहयोग करने की अपील की है। जिसमें सभी पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि निश्चित रूप से सहयोग किया जाएगा। इस दौरान निर्णय लिया कि 2 अप्रैल को सुबह 9 बजे समिति पदाधिकारी अंबेडकर सर्किल से सुबह 9 बजे रवाना होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए एसडीएम कोर्ट पहुंचेंगे। जहां राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एडीएम को दिया जाएगा।

इस दौरान भंवरलाल बालिया, राजूराम चांदबासनी, कमलेश मीणा, शिवकरण अंबापा, चैनाराम, बिरमाराम, मदन, रामनिवास, मुकेश, सूरजकरण सहित अनेक लोग उपस्थित थे।भास्कर संवाददाता। लाडनूं| अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिषद के प्रदेश सचिव कालूराम गैनाण ने यहां राष्ट्रपति के नाम का एक ज्ञापन एसडीएम को सौंप कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों को शिथिल करने के उच्चतम न्यायालय के 20 मार्च को जारी दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार किए जाने के लिए अपील की है। ज्ञापन में बताया है कि उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णयों में स्पष्ट कहा है कि दुरुपयोग का बहाना लेकर संसद द्वारा पारित किसी कानून को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार अजा-जजा पर अत्याचारों में वृद्धि हुई है। संवैधानिक संस्थाओं को सुनवाई का मौका दिए बिना कानून का शिथिल या निरस्त करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनर्विचार की मांग की है तथा एक्ट को पूर्ववत लागू रखे जाने की मांग भी की है।

लाडनूं में राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन

लाडनूं .कार्यकर्ता लाडनूं बंद को लेकर बैठक में भाग लेते हुए।

भास्कर संवाददाता| डीडवाना

अनुसूचित जाति जन जाति संघर्ष समिति के 2 अप्रैल को भारत बंद के आह्वान को लेकर समिति पदाधिकारियों ने शहर के व्यापारिक संगठनों से मिलकर बंद को सफल बनाने का आह्वान करते हुए समिति पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी। समिति अध्यक्ष प्रेमाराम मेघवाल व महासचिव पुखराज ने बताया कि शुक्रवार को संगठन के लोगों ने व्यापार मंडल के पदाधिकारी शंकरलाल परसावत, रामनिवास रूवटिया व विमल लाहोटी से मिलकर बंद में सहयोग करने की अपील की है। जिसमें सभी पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि निश्चित रूप से सहयोग किया जाएगा। इस दौरान निर्णय लिया कि 2 अप्रैल को सुबह 9 बजे समिति पदाधिकारी अंबेडकर सर्किल से सुबह 9 बजे रवाना होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए एसडीएम कोर्ट पहुंचेंगे। जहां राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एडीएम को दिया जाएगा।

इस दौरान भंवरलाल बालिया, राजूराम चांदबासनी, कमलेश मीणा, शिवकरण अंबापा, चैनाराम, बिरमाराम, मदन, रामनिवास, मुकेश, सूरजकरण सहित अनेक लोग उपस्थित थे।भास्कर संवाददाता। लाडनूं| अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिषद के प्रदेश सचिव कालूराम गैनाण ने यहां राष्ट्रपति के नाम का एक ज्ञापन एसडीएम को सौंप कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों को शिथिल करने के उच्चतम न्यायालय के 20 मार्च को जारी दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार किए जाने के लिए अपील की है। ज्ञापन में बताया है कि उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णयों में स्पष्ट कहा है कि दुरुपयोग का बहाना लेकर संसद द्वारा पारित किसी कानून को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार अजा-जजा पर अत्याचारों में वृद्धि हुई है। संवैधानिक संस्थाओं को सुनवाई का मौका दिए बिना कानून का शिथिल या निरस्त करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनर्विचार की मांग की है तथा एक्ट को पूर्ववत लागू रखे जाने की मांग भी की है।

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