डीडवाना

  • Home
  • Rajasthan News
  • Didwana News
  • बड़े आयोजनों में अग्निशमन के नियमों की लंबी लिस्ट, हकीकत:अधिकांश की जानकारी ही नहीं
--Advertisement--

बड़े आयोजनों में अग्निशमन के नियमों की लंबी लिस्ट, हकीकत:अधिकांश की जानकारी ही नहीं

उपखंड क्षेत्र में किसी भी बड़े सामाजिक, धार्मिक कार्यक्रम एवं मेले के रूप में लगने वाली प्रदर्शनियों में...

Danik Bhaskar

Feb 21, 2018, 04:50 AM IST
उपखंड क्षेत्र में किसी भी बड़े सामाजिक, धार्मिक कार्यक्रम एवं मेले के रूप में लगने वाली प्रदर्शनियों में अग्निशमन के नियमों की पालन नहीं हो रही है। हाल ही में ब्यावर में एक वैवाहिक समारोह में हुई आगजनी की घटना दिल दहलाने वाली थी। अगर अग्निशमन यंत्र का उपयोग उस स्थल पर होता तो शायद इतनी बड़ी मानवीय क्षति को रोका जा सकता था। इन नियमों का न तो स्थानीय पालिका प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जाता है और न ही पुलिस व प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जा रहा है। जबकि सरकार के वर्ष 2006 में बनाए गए नियमों में तीनों विभागों को इसकी सख्ती से पालना कराने के निर्देश दिए गए है। मगर यहां इसकी अनदेखी अनेक ऐसे आयोजनों में देखने को मिलती है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संभागीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर व एसपी को निर्देश दे रखे है। जिसमें आपदा प्रबंधन एवं सहायता निदेशिका के अनुच्छेद 11 में अग्नि दुर्घटना से क्षति होने पर राहत व्यवस्था संबंधी अनेक निर्देश दे रखे हैं।

सुरक्षा

सरकार की ओर से निर्देश दिए गए थे कि सभी जिलों में जहां कहीं मेला प्रदर्शनी सार्वजनिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्कूलों में आयोजन व अन्य किसी प्रकार के सामूहिक आयोजनों में अग्नि दुर्घटनाओं की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना को रोकने की व्यवस्था की जाए। जिसमें इस प्रकार के आयोजनों में जहां रोशनी एवं खाने आदि के रेस्टोरेंट जिनमें गैस सिलेंडर का प्रयोग हो तथा कई पांडालों में एयर कुलिंग की व्यवस्था की जाती हो। उस स्थिति में नगर पालिका की ओर से अग्नि शमन अधिकारी से एनओसी लिए जाने के बाद ही स्वीकृति दी जावे। अग्नि शमन अधिकारी, सहायक बिजली निरीक्षक, संबंधित पुलिस अधिकारी के साथ सिटी मजिस्ट्रेट स्तर का अधिकारी मौका निरीक्षण करे। वहीं किसी प्रकार के आयोजनों का एक दरवाजा न होकर प्रवेश एवं बाहर जाने के अलग-अलग रास्ते हो व कम से कम आपातकालीन दरवाजे विपरीत दिशाओं में रखे जाए। जहां पर किसी प्रकार का पांडाल नहीं लगाया जाकर स्थान खाली रखा जाए। आपातकालीन निकास का साइन बोर्ड लगाया जाए व वहां पर हमेशा एक सुरक्षा गार्ड उपस्थित रहना चाहिए।

हां, नियमों की पालना करवा रहे है


हकीकत ये है कि कई बार तो ये भी देखने में आता है कि जिन आयोजनों में खुद अधिकारी भाग ले रहे होते हैं वहां पर भी नियमों की पालना नहीं की जा रही होती। यदि जिम्मेदार कार्रवाई करें तो ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है

सरकार ने 14 अप्रैल 2006 को जारी किया था आदेश


बिजली के लिए भी नियम, नहीं देता कोई जानकारी

किसी भी पांडाल में बिजली के खुले तार नहीं हो। जहां बिजली का मुख्य कनेक्शन उस आयोजन के लिए लिया जा रहा है, वहां पर उचित व्यवस्था हो जो बिजली प्रभाव को नियंत्रित कर सके तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत बिजली कनेक्शन काटा जा सके। यदि संभव हो तो पांडाल का अलग-अलग बिजली सर्किट की व्यवस्था की जाए। जिसे एक पांडाल के सर्किट में कोई तकनीकी खराबी हो तो दूसरे पांडाल पर उसका प्रभाव न पड़े। स्थल पर समुचित अर्थिंग करवाई जाए। ताकि किसी के करंट के आने की संभावना नहीं रहे। बिजली के तारों को जहां से भी जोड़े वहां टेप लगाकर सुनिश्चित करे कि कोई तार खुला कटा तो नहीं है। जो भी बिजली उपकरण आयोजन स्थल पर काम में लिए जा रहे है, उनकी क्षमता आयोजन स्थल पर बिजली सप्लाई की क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी इस व्यवस्था का पालन कभी नहीं होता और न ही शायद किसी को इस प्रकार के नियमों की जानकारी दी जाती है।

Click to listen..