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40 साल से बदहाल नेहरू पार्क, कोर्ट के आदेश पर अब पालिका खर्च करेगी 1.45 करोड़, टेंडर हुए जारी

करीब पांच दशक पुराने नेहरू पार्क की बदहाली के मुद्दे पर जोधपुर हाइकोर्ट ने कोर्ट जनता के हित में बड़ा फैसला सुनाया...

Danik Bhaskar | Feb 14, 2018, 05:30 AM IST
करीब पांच दशक पुराने नेहरू पार्क की बदहाली के मुद्दे पर जोधपुर हाइकोर्ट ने कोर्ट जनता के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत डीडवाना नगरपालिका को छह माह में पार्क को पुन: विकसित करने के आदेश दिए हैं। विधिक जागरूकता को समर्पित स्वयंसेवी संगठन उत्थान विधिक सहायता एवं सेवा संस्थान के अध्यक्ष सरवर खान की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजाक के. हैदर ने याचिका दायर की थी। जिस पर अदालत ने नगरपालिका डीडवाना व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। आदेश की अनुपालना में सोमवार को नगरपालिका की ओर से अधिवक्ता अनवर खां ने जवाब पेश करते हुए कहा कि नगरपालिका नेहरू पार्क के विकास के लिए प्रयास कर रही है। इसके लिए एक करोड़ 45 लाख 46 हजार रुपए का टेंडर जारी किया गया है। इस पर उत्थान संस्थान के वकील रजाक के. हैदर ने कहा कि नगरपालिका ने जवाब में उल्लेखित विकास कार्य की समय-सीमा तय नहीं की है। टेंडर में भी इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे में डीडवाना की जनता को नेहरू पार्क की सौगात कब मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए नगरपालिका को समयबद्ध विकास कार्य के लिए पाबंद किया जाए। सुनवाई के बाद स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष गिरीश कुमार शर्मा ने उनके तर्कों को मानते हुए नगरपालिका को छह माह में विकास कार्य पूर्ण करने का आदेश दिए हैं। 6 माह की अवधि में सभी कमियों को पूरी करते हुए पार्क को पुन: मूल स्वरूप में लाना होगा।

अदालत में लगाई याचिका में बताए थे ये आधार

जिले के डीडवाना नगर में नगरपालिका डीडवाना ने वर्ष 1967-68 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की स्मृति में स्टेशन रोड पर नेहरू पार्क की स्थापना की थी। नेहरू पार्क की स्थापना का उद्देश्य था कि शहर के बाशिंदों को शहर में रमणीक स्थान मिले, ताकि उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से यह लाभदायक रहे। करीब 40 साल से यह नेहरू पार्क बदहाली का शिकार है। पार्क की हालत इस कदर खराब है कि यहां कोई भी आना पसंद नहीं करता। यहां जगह-जगह कचरा पड़ा है। दीवारें टूटी हैं। आवारा पशु घूमते रहते हैं। नेहरू पार्क में मौजूद राष्ट्रीय प्रतीकों का मखौल उड़ाया जा रहा है। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा जमीन के लेवल के बराबर है। जबकि महापुरुषों की प्रतिमाएं जमीनी तल से ऊंची स्थापित किए जाने का नियम है। पंडित नेहरू की प्रतिमा के फाउंडेशन पर बने भारत के मानचित्र को मिट्टी के नीचे दफन कर दिया गया है। यह फाउंडेशन एक बड़े चबूतरे पर निर्मित था। दो साल पूर्व तक प्रतिमा की ऊंचाई धरातल से करीब 5 फीट ऊंची थी, लेकिन पार्क में मिट्टी का भराव करने से प्रतिमा अब धरातल के बराबर हो गई है। पार्क में हरियाली के नाम पर दूब, घास, पेड़-पौधे, फूलों का नाम तक नहीं है। चारों ओर केवल कचरा ही कचरा नजर आता है। पार्क के दक्षिणी व पूर्वी दिशा में बबूल की कंटीली झाडिय़ां उग आई है। पार्क में मिट्टी भराव के समय बड़े पेड़ों की बलि दे दी गई।

उत्थान संस्थान ने किए कई कार्य


जिले के डीडवाना नगर में नगरपालिका डीडवाना ने वर्ष 1967-68 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की स्मृति में स्टेशन रोड पर नेहरू पार्क की स्थापना की थी। नेहरू पार्क की स्थापना का उद्देश्य था कि शहर के बाशिंदों को शहर में रमणीक स्थान मिले, ताकि उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से यह लाभदायक रहे। करीब 40 साल से यह नेहरू पार्क बदहाली का शिकार है। पार्क की हालत इस कदर खराब है कि यहां कोई भी आना पसंद नहीं करता। यहां जगह-जगह कचरा पड़ा है। दीवारें टूटी हैं। आवारा पशु घूमते रहते हैं। नेहरू पार्क में मौजूद राष्ट्रीय प्रतीकों का मखौल उड़ाया जा रहा है। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा जमीन के लेवल के बराबर है। जबकि महापुरुषों की प्रतिमाएं जमीनी तल से ऊंची स्थापित किए जाने का नियम है। पंडित नेहरू की प्रतिमा के फाउंडेशन पर बने भारत के मानचित्र को मिट्टी के नीचे दफन कर दिया गया है। यह फाउंडेशन एक बड़े चबूतरे पर निर्मित था। दो साल पूर्व तक प्रतिमा की ऊंचाई धरातल से करीब 5 फीट ऊंची थी, लेकिन पार्क में मिट्टी का भराव करने से प्रतिमा अब धरातल के बराबर हो गई है। पार्क में हरियाली के नाम पर दूब, घास, पेड़-पौधे, फूलों का नाम तक नहीं है। चारों ओर केवल कचरा ही कचरा नजर आता है। पार्क के दक्षिणी व पूर्वी दिशा में बबूल की कंटीली झाडिय़ां उग आई है। पार्क में मिट्टी भराव के समय बड़े पेड़ों की बलि दे दी गई।

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