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गोचर भूमि को अवैध डंपिंग स्टेशन बनाने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी, पालिका से मांगा प्लान

डीडवाना की गोचर भूमि को नगरपालिका प्रशासन द्वारा अवैध रूप से डंपिंग स्टेशन बनाने पर कोर्ट ने मौखिक रूप से नाराजगी...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 08:10 AM IST
डीडवाना की गोचर भूमि को नगरपालिका प्रशासन द्वारा अवैध रूप से डंपिंग स्टेशन बनाने पर कोर्ट ने मौखिक रूप से नाराजगी जताई है। अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए डीडवाना नगरपालिका को 21 मार्च तक कचरे के निस्तारण के लिए प्लान पेश करने का आदेश दिया है। पालिका द्वारा गोचर भूमि पर शहर का कुड़ा-करकट डाला जा रहा है। जिससे आमजन के जीवन और स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो गया है। स्वयंसेवी संगठन उत्थान विधिक सहायता एवं सेवा संस्थान ने जनहित में इसे रोकने के लिए स्थाई लोक अदालत में याचिका दायर की है।

इस पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पालिका प्रशासन को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा था। उत्थान संस्थान के अध्यक्ष सरवर खान की ओर से पैरवी करते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजाक के. हैदर ने याचिका में बताया कि गोचर भूमि में नगरपालिका प्रशासन द्वारा शहर का कचरा, कूड़ा-करकट, प्लास्टिक की थैलियां, मृत पशु डालकर पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है और पेड़-पौधों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि यहां की गोचर भूमि खसरा संख्या 1920 रकबा 28 बीघा 9 बिस्वा में सघन पौधरोपण किया गया था। इस गोचर भूमि में 15-20 फीट गहरे गड्ढे खोदकर वहां से मिट्टी उठाई जा रही है। जिससे वन विभाग के प्रयास विफल हो रहे हैं। यहां पर शहर का ठोस व गीला कचरा डालने से कई पेड़ नष्ट होने के कगार पर हैं और वातावरण दूषित होता जा रहा है। इस गोचर भूमि के सामने इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित है। जहां पर खाद्य सामग्री निर्माण का कार्य एवं खाद्य आटा निर्माण की कई फैक्ट्रियां संचालित है। उक्त क्षेत्र में प्लास्टिक थैलियां व कचरा भी उड़कर आता है। जिससे आमजन के जीवन और स्वास्थ्य को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

वन विभाग की रिपोर्ट को भी बनाया आधार

क्षेत्र वनपाल पंचायत समिति डीडवाना ने इस भूमि पर कचरा डालने के संबंध में जांच के बाद रिपोर्ट में बताया है कि यह भूमि खसरा नंबर 1920 रकबा 28 बीघा 9 बिस्वा राजकीय खतौनी व नजरी नक्शा अनुसार गैर मुमकिन भूमि है। इस प्रकार की भूमियों पर वन विभाग 5 वर्ष के लिए पौधरोपण करता है और 5 वर्ष बाद ग्राम पंचायत या नगरपालिका को वापस हस्तांतरित कर देता है। इस तरह के पौधरोपण ग्राम वन के दायरे में आते हैं। ये वन चारागाह भूमि पर ही या सरकारी भूमि पर पौधरोपण करके घोषित किए जाते हैं। ऐसे वनों का संरक्षण उस क्षेत्र के पशु भेड़-बकरी को चराने के लिए एवं लालन-पालन के लिए किया जाता है। किसी व्यक्ति विशेष द्वारा किसी पेड़ों को नुकसान या इस तरह के वृक्षारोपण में गड्ढे खोदना व टहनियों को काटना, गड्ढे खोदकर उसमें कचरा डालना पर्यावरण नियम 1986 के उल्लंघन के दायरे में है। इस तरह के अपराध में 6 माह की सजा व 500 रुपए का जुर्माना रखा गया है। पालिका डीडवाना द्वारा इस वृक्षारोपण को खुर्द-बुर्द किया गया है। क्षेत्र वनपाल पंचायत समिति डीडवाना ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि नगरपालिका को कुड़ा करकट के लिए अनुपयोगी (जो जमीन कोई काम नहीं आती है) जमीन दी जाती है। यह व्यवस्था सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कहलाती है।

डीडवाना. नगरपालिका द्वारा अघोषित डंपिग यार्ड में पॉलीथिन खाती गायें।

नगरपालिका का जवाब: डीडवाना पालिका के अधिवक्ता अनवर खां ने याचिका का जवाब पेश करते हुए कहा कि नगरपालिका के पास अन्य जमीन नहीं होने के कारण उक्त स्थान पर कचरा डाला जाता है। शहर से दूर जमीन आवंटन के लिए तहसीलदार व एसडीएम के समक्ष आवेदन पेश किया है। जमीन आवंटन के बाद वहां पर कुड़ा करकट ठोस कचरा निष्पादन किया जाएगा।

अनुपयोगी जमीन चिह्नित करनी चाहिए


आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़