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डीडवाना में मकान और दुकानें टूटी, लेकिन दो साल में 2 सरकारी भवन नहीं हटवा पाया पीडब्ल्यूडी, काम अटका

शहर में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 7डी के तहत पूर्व में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद कुचामन रोड पर स्थित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 12, 2018, 02:40 AM IST

डीडवाना में मकान और दुकानें टूटी, लेकिन दो साल में 2 सरकारी भवन नहीं हटवा पाया पीडब्ल्यूडी, काम अटका
शहर में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 7डी के तहत पूर्व में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद कुचामन रोड पर स्थित रिडकोर के अशोक स्तंभ से लेकर सुभाष सर्किल भगत सिंह सर्किल होते हुए उपाध्याय सर्किल रेलवे स्टेशन तक कहीं सीसी तो कहीं डामर सड़क का निर्माण हो चुका है। बीच में डिवाइडर भी बन चुके है। मगर 5 किमी सड़क के मध्य भाग में स्थित दो सरकारी भवन जिन्हें अतिक्रमण की श्रेणी में माना था, मगर सानिवि द्वारा अभी तक उन परिसरों को नहीं तोड़ा गया है। जबकि इस कार्रवाई के दौरान अनेक दुकानें व मकान, पब्लिक पार्क सहित धार्मिक स्थलों की संपत्तियों को भी तोड़ दिया गया। मगर सरकारी परिसर को तोड़ने में ही सरकारी विभाग के अधिकारियों को लंबा समय लग गया।

डीडवाना शहर में सानिवि द्वारा 7डी के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई 27 जनवरी 2016 को शुरू की गई थी। जिसके तहत रिडकोर के अशोक स्तंभ से लेकर उपाध्याय सर्किल तक अतिक्रमण हटाना था। इसी कार्रवाई के तहत सैकड़ों दुकानें, व्यावसायिक कॉम्पलैक्स व अनेक मकान धराशायी हो गए। कई जगह विरोध भी हुआ। मगर अतिक्रमण हटता गया। कुछ लोगों ने न्यायालय की शरण ली। मगर कोर्ट के स्थगन आदेश भी स्थगित हो गए। हालांकि एक धार्मिक स्थल का मामला वक्फ बोर्ड में विचाराधीन है।

डीडवाना. यह है सरकारी परिसर, जिसे 7डी के तहत मान रहे हैं अतिक्रमण।

पालिका ने जारी किए थे 123 नोटिस, 60 लोगों ने दिया था जवाब

डीडवाना शहर में सड़क और डिवाइडर निर्माण के लिए 7डी के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने न्यायालय की शरण भी ली थी। जिसमें न्यायालय द्वारा स्थगन के आदेश भी दिए गए थे। मगर 20 मई 2017 को राजस्थान हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित कर स्थगन आदेश निरस्त किए थे कि जिस प्रकार तहसीलदार द्वारा विधि प्रक्रिया अपनाकर 91 की धारा के तहत कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाए थे, उसी प्रक्रिया के तहत पालिका के अधीनस्थ अतिक्रमण जो भी है वो पालिका के द्वारा विधि प्रक्रिया अपनाकर ही अतिक्रमण हटाएं। हालांकि इसमें अधिकांश लोगों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटा लिए थे। पालिका ने 123 लोगों को नोटिस जारी किए थे। जिसमें 60 ने जवाब दिया था। इस कार्रवाई में पालिका ने केवल सब्जी मंडी में स्थित 30 दुकानदारों को व नागौरी गेट के बाहर 11 दुकानदारों को विधि प्रक्रिया से ही नोटिस देकर अतिक्रमण हटाया था।

कब्जा माना, सरकारी परिसर क्यों नहीं हटता सरकार से?

पीडब्ल्यूडी द्वारा क्षेत्र के एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, पालिका ईओ और पुलिस अधिकारियों की मदद से 5 किमी की दूरी से अनेक दुकानें मकान तोड़ दिए गए। मगर आज तक 2 सरकारी परिसर जो इस मार्ग के मध्यम भाग में महिला कॉलेज के सामने स्थित है। जिसमें को-ऑपरेटिव बैंक व क्रय-विक्रय सहकारी समिति भवन बने हुए है और दोनों सरकारी भवनों के कुछ हिस्से 7डी के अनुसार अतिक्रमण की श्रेणी में आ रहे हैं। एक तरफ प्रशासनिक अधिकारियों ने निजी लोगों के मकान दुकानें तोड़ने में तो सख्ती दिखाई। मगर सरकारी भवन को तोड़ने में 2 साल से अधिक का समय निकल चुका है। आमजन भी इस बात से बेहद नाराज है कि हमारे आशियाने तोड़े तो सरकार के क्यों नहीं टूटे।

एसई बोले- दोनों सरकारी भवनों को जल्द तोड़ेंगे

सरकारी जो दो भवन है, उनको तोड़ने की कार्रवाई जल्द ही शुरू की जा रही है। इस संदर्भ में मीटिंग भी हो चुकी है और संबंधित विभाग ने भी सहमति जता दी है। इसके अलावा धार्मिक स्थल में जहां स्टे है उसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे एवं जिन स्थल पर स्टे नहीं है उनसे वार्ता भी चल रही है। आरडी बुनकर, एसई, पीडब्ल्यूडी

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