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भोजन करने से पहले गौ ग्रास निकालें, इससे घर में नहीं रहेगी निर्धनता, परिवार में रहेगा प्रेम: आचार्य

गाय की पूजा सनातन धर्म में सबसे उत्तम मानी जाती हैं। गाय की रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का धर्म हैं। यह बात आनंद भवन...

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 02:55 AM IST
भोजन करने से पहले गौ ग्रास निकालें, इससे घर में नहीं रहेगी निर्धनता, परिवार में रहेगा प्रेम: आचार्य
गाय की पूजा सनातन धर्म में सबसे उत्तम मानी जाती हैं। गाय की रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का धर्म हैं। यह बात आनंद भवन में आयोजित 5 दिवसीय गौ कथा के प्रथम दिवस पर कथा वाचन करते हुए आचार्य बाबूलाल सारस्वत ने भक्तों के समक्ष कही। कथा में आचार्य सारस्वत ने कहा कि धेनु मानस ग्रंथ गौ कथा में जो बातें लिखी गई है, उन बातों को सुनकर अमल करते है तो गाय की रक्षा ही नहीं होती बल्कि मनुष्य अपने जीवन को भी सुरक्षित कर लेता हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नस्ल की देशी गाय को गौमाता कहते हैं। उन्होंने कहा कि मां गीता, गंगा, गौरी मां व महात्मा, अंतर आत्मा, परमात्मा उन सब को हम पहचानें, अगर हम इन्हें पहचान लेंगे तो निश्चित रूप से हमें गाय की रक्षा करना आ जाएगा। सारस्वत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में गौ ग्रास निकाले और भोजन बनाते समय प्रथम रोटी गाय के लिए निकाले। ऐसा करने वाले के घर में कभी निर्धनता नहीं होती और परिवार में भी आत्मीय प्रेम बना रहता है। क्योंकि उस रोटी और गौ ग्रास का सेवन करने वाली गोमाता का आशीर्वाद उस परिवार पर सदैव रहता हैं। कथा शुभारंभ से पूर्व कलश यात्रा गोपाल गौशाला मार्ग से निकलते हुए नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल आनंद भवन पहुंची। इस दौरान शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। इस दौरान मुख्य यजमान के रूप में एडवोकेट सुनील शर्मा, उमाशंकर गौड़, हरीश सोनी, कैलाश शर्मा, ओमप्रकाश गौड़, धर्मेंद्र वैष्णव, हरिसिंह चौहान, गोपाल, बजरंग सिंह, नीलम सोनी, मनू सोनी, कृति सोनी, मनोरमा वर्मा, सरिता लाहोटी, पूनम सेवक, गायत्री रूवटिया आदि उपस्थित थे।

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चातुर्मास के दौरान रामकथा में संत मोहनदास बोले-तप से करें मन को निर्मल

सांजू| कस्बे के बालाजी मंदिर में चातुर्मास के दौरान आयोजित रामकथा में कथा वाचक मोहनदास रामस्नेही ने कहा कि समृद्वि सबको प्राप्त नहीं होती। संसार में प्रभुता, सम्मान, वैभव को प्राप्त करने वाले बहुत है। किंतु जरूरी नहीं की वे समृद्ध हो। समृद्वि वह कहलाती है जिससे आत्मा तृप्त हो जाए। यदि मन को निर्मल करना हो तो तप का सहारा लेना होगा। महाराज ने कहा कि हम दूसरे को जीने का मौका देंगे। तो हमें भी जीवन में खुशहाली मिलेगी। इस मौके पर श्रद्धालु मौजूद थे।

नावां सिटी| लूणवा गांव में बालाजी चौक में सोमवार से मंगलवार तक रामधुनी का आयोजन किया गया। जिसमें ग्राम वासियों द्वारा भजन कीर्तन के साथ भगवान की धुन में मगन होना बताया जाता है। ग्रामवासियों ने इस रामधुनी द्वारा इंद्र देव और पूरे गांव में सुख शांति की आराधना की गई। इस मौके पर द्वारकाप्रसाद सोनी, शंकर जांगिड़, रामअवतार गौड़, पवन सोनी, सत्यनारायण शर्मा आदि मौजूद थे।

भोजन करने से पहले गौ ग्रास निकालें, इससे घर में नहीं रहेगी निर्धनता, परिवार में रहेगा प्रेम: आचार्य
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