Hindi News »Rajasthan »Didwana» आरजेएस भर्ती में न्यूनतम आयु सीमा घटाने की विचारार्थ याचिका को न्यायालय ने किया स्वीकार

आरजेएस भर्ती में न्यूनतम आयु सीमा घटाने की विचारार्थ याचिका को न्यायालय ने किया स्वीकार

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरजेएस भर्ती 2017 को लेकर न्यूनतम आयु सीमा के नियम की वैधानिकता को चुनौती देने वाली...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 27, 2018, 03:05 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरजेएस भर्ती 2017 को लेकर न्यूनतम आयु सीमा के नियम की वैधानिकता को चुनौती देने वाली डीडवाना के छात्र सरवर खान की याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर लिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार परीक्षार्थी और राज्य सरकार के विधि एवं विधिक कार्य विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास और न्यायाधीश रामचंद्रसिंह झाला की खंडपीठ में याचिकाकर्ता सरवर खान की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता रजाक के. हैदर ने हाईकोर्ट में कहा कि राजस्थान न्यायिक सेवा नियम 2010 के नियम 17 के तहत सिविल न्यायाधीश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 23 वर्ष तय की गई है। इसी की अनुपालना में उच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से 18 नवंबर 2017 को जारी सिविल न्यायाधीश संवर्ग में सीधी भर्ती प्रतियोगी परीक्षा 2017 के लिए न्यूनतम आयु सीमा 23 वर्ष को अनिवार्य बताया गया है। जबकि दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में सिविल न्यायाधीश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष ही तय की गई है। ऐसे में राजस्थान न्यायिक सेवा, आरजेएस में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायाधीश मजिस्ट्रेट के लिए न्यूनतम आयु सीमा 23 वर्ष तय किया जाना विभेदकारी है। सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायाधीश व्यास व न्यायाधीश झाला की खण्डपीठ ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर लिया। हालांकि अधिवक्ता हैदर ने याचिकाकर्ता को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का भी अनुरोध करते हुए कहा कि प्रारंभिक परीक्षा का उद्देश्य केवल छंटनी करना ही है। इसके अंकों के आधार पर वरीयता तय नहीं होनी है। प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन होने के कारण खंडपीठ ने सीधे मुख्य परीक्षा में शामिल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

गुहार

डीडवाना के विधि संकाय के छात्र सरवर खान ने लगाई थी याचिका

याचिका में यह बताया आधारसरवर खान की ओर से अधिवक्ता हनुमानसिंह चौधरी, रजाक के. हैदर व डॉ. अभय पुरोहित ने याचिका दायर कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ के मामले में कहा है कि न्यायिक सेवाओं में युवाओं को अवसर दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2015 में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, वह सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट सीधी भर्ती के लिए पात्र है लेकिन 1 जनवरी 2018 तक न्यूनतम आयु सीमा 23 वर्ष नहीं होने से वह परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो रहा है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Didwana

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×