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पुरुषोत्तम माह शुरू, मंदिरों में मनोरथों की रहेगी धूम, रमजान का पवित्र माह शुक्रवार से शुरू

सनातन धर्म पद्धति के अनुसार प्रथम ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रथम तिथि को पुरुषोत्तम अधिक मास गुरुवार से प्रारंभ होने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:40 AM IST

सनातन धर्म पद्धति के अनुसार प्रथम ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रथम तिथि को पुरुषोत्तम अधिक मास गुरुवार से प्रारंभ होने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम शुरू कर दिए गए है। सनातन धर्म सभा के मंत्री पुरुषोत्तम व्यास ने बताया कि धर्म ग्रन्थों के अनुसार तीन वर्ष में एक बार पुरुषोत्तम मास आता है जिसे अधिक मास कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस मास में अमावस्या से अमावस्या के बीच कोई संक्रांति न पड़े उसे अधिक मास कहते है। संक्रांति का अधिक सूर्य का राशि परिवर्तन से है। नगर व्यास, अशोक व्यास ने बताया कि सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहते है। ज्योतिष गणना के अनुसार एक सौर वर्ष 365 दिन 6 घंटे 11 मिनट का होता है एवं चन्द्र वर्ष 354 दिन 9 घंटे का माना जाता है। सौर वर्ष और चन्द्र वर्ष की गणना को बराबर करने के लिए अधिक मास की उत्पत्ति हुई थी। इस माह में जो जातक पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से उपहास व पूजा पाठ दान पुण्य करता है उसे पुण्य की प्राप्ति होने के साथ ही सभी कष्ठों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार मास प्रारंभ के समय भगवान विष्णु की आराधना लाल चंदन, लाल पुष्प और अक्षत से की जाती हैं। साथ ही भूमि पर सोने का भी विशेष महत्व इस माह में माना गया हैं। अधिक मास प्रारंभ होने के साथ ही नगर के विभिन्न मंदिरों में दोपहर को महिलाओं द्वारा भजन कीर्तन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया हैं। लोगो द्वारा विभिन्न प्रकार के दान पुण्य किए जा रहे हैं।

दोनों धर्मों में बना अजीब संजोग

दोनों धर्मों का पुर्णित माह लम्बे अंतराल से दोनों धर्मों का एक अजीब संजोग बना है। जिसमें मुस्लिम धर्म के लिए रमजान का पवित्र माह शुक्रवार से शुरू हो रहा है और दो दिन पहले बुधवार को सनातन धर्म का पुर्णित फल देने वाला अधिक मास प्रारंभ हो चुका हैं। दोनों ही धर्मों के लिए यह माह विशेष फल दायक है जिसमें दोनों धर्मों के लोग इस माह में धर्म व पुण्य आदि कार्य करते है। मुस्लिम समाज के लोग रोजे रखकर खुदा से मन्नत करते है वही हिंदू धर्म के लोग भी व्रत पूजन एवं दान पुण्य आदि कर ईश्वर से फल की कामना करते हैं और यह संजोग वर्षों बाद एक साथ मिला है जो एक माह तक चलेगा।

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