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दया, प्रेम, सदाचार, सच्चाई, दानवीरता इन सभी गुणों को जीवित रखने वाली करामात साहित्य में / दया, प्रेम, सदाचार, सच्चाई, दानवीरता इन सभी गुणों को जीवित रखने वाली करामात साहित्य में

Bhaskar News Network

Jul 11, 2018, 03:50 AM IST

Didwana News - भास्कर संवाददाता | लाडनूं/जसवंतगढ़ राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत...

दया, प्रेम, सदाचार, सच्चाई, दानवीरता इन सभी गुणों को जीवित रखने वाली करामात साहित्य में
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भास्कर संवाददाता | लाडनूं/जसवंतगढ़

राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जसवंतगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय साहित्य समाज एवं संस्कृति विषयक संगोष्ठी का समापन मंगलवार को समारोहपूर्वक हुआ। इस अवसर पर राजकीय बांगड़ कॉलेज डीडवाना के हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं राजस्थानी साहित्यकार डॉ. गजादान चारण ने कहा कि हमारे देश का साहित्य बहुत समृद्ध है। देश की युवा पीढ़ी साहित्य से बहुत कुछ सीख सकती है। युवाओं को बुजुर्गों के जीवन के अनुभव को भी ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज को सही दिशा देकर युवाओं को संस्कारवान बनाने का कार्य करें। देश की संस्कृति को बचाने काम करें। विशिष्ट अतिथि राजकीय संस्कृत कॉलेज सालासर के प्राचार्य डॉ. चंद्रशेखर मिश्रा ने कहा कि समाज में संस्कृति में दया, प्रेम, सदाचार, सच्चाई, दानवीरता इन सभी गुणों को जीवित रखने वाली करामात साहित्य में ही होती है। उन्होंने कहा कि संस्कृति समाज की धरोहर है। समाज में साहित्य नहीं होने से संस्कृति का ह्रास हुआ है।

विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डाॅ. घनश्यामनाथ कच्छावा ने कहा कि साहित्यकार समाज व संस्कृति का रक्षक होता है। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डाॅ. हेमंतकृष्ण मिश्रा ने किया।

साहित्य उच्च कोटि का हो : गौतम

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डाॅ. शक्तिदान चारण ने कहा कि समाज के बिना संस्कृति का कोई औचित्य नहीं होता है। साहित्य, समाज व संस्कृति एक दूसरे से जुड़े हुए है। सीताराम गौतम ने कहा कि साहित्य उच्च कोटि का होना चाहिए। साहित्यकार सृजनशील होना चाहिए। प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि नथमल सांखला थे। साहित्यिक संगोष्ठी में चैनाराम माली कोलिया, रामसिंह रैगर लाडनूं, दीपक कौशिक सुजानगढ़, अर्चना माहेश्वरी जसवंतगढ़, दौलतराम मेघवाल अनेसरिया, अर्चना शर्मा लाडनूं, दीनदयाल स्वामी कसूंबी, अजय कौशिक सुजानगढ़, वीरेंद्रसिंह भाटी, कविता गुर्जर जसवंतगढ़, दुर्गा, हीरा प्रजापत ने पत्र वाचन द्वारा साहित्य पर विचार व्यक्त किए। इस दौरान प्राचार्य डॉ. अलका शर्मा, राकेश नेहरा, दिलीपसिंह चौहान, विश्वनाथ तिवाड़ी, दिनेश कुमार पाराशर, किशोर सैन, अनिल सहित 60 से अधिक संभागी उपस्थित थे।

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