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डीडवाना का 100 साल पुराना हिंदी पुस्तकालय, 23 हजार किताबें व 50 हस्तलिखित ग्रंथ, चार वेदों पर लिखी पुस्तकें भी यहां सुरक्षित

डीडवाना शहर के एकमात्र 100 साल पुराने श्री डीडवाना हिंदी पुस्तकालय का स्थापना दिवस अक्टूबर में विजय दशमी के दिन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 06, 2018, 03:55 AM IST

  • डीडवाना का 100 साल पुराना हिंदी पुस्तकालय, 23 हजार किताबें व 50 हस्तलिखित ग्रंथ, चार वेदों पर लिखी पुस्तकें भी यहां सुरक्षित
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    डीडवाना शहर के एकमात्र 100 साल पुराने श्री डीडवाना हिंदी पुस्तकालय का स्थापना दिवस अक्टूबर में विजय दशमी के दिन मनाया जाएगा। जिसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष व जिला आरएसएस संघ चालक नारायण प्रसाद टाक ने बताया कि इस पुस्तकालय में कई प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ मौजूद हैं। जिन्हें सुरक्षित रखा गया है। पुस्तकालय के मंत्री योगेश शर्मा ने बताया कि पुस्तकालय की स्थापना 6 अक्टूबर 1916 को हुई थी। आशाराम पाठक, बद्रीनारायण मोट, रामनारायण जोशी, रामकरण गौड़ और गंगाप्रसाद काकड़ा पांच संस्थापक थे। इसकी स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र में रहने वाले साहित्यकारों और समाचार पत्रों में रुचि रखने वाले लोगों के मिलने के लिए स्थान निर्धारित करना था। समय-समय पर सामाजिक व रचनात्मक कार्यक्रम भी विद्वानों के सहयोग से होते रहे। पुस्तकालय में पांच दैनिक समाचार पत्र रोज और 50 पुस्तकें हर माह आती हैं। इसको राज्य सरकार से मिली मान्यता भी समाप्त हो गई है।

    जिससे पुस्तकालयाध्यक्ष को मिलने वाली वेतन राशि का 70 प्रतिशत अनुदान मिलना सरकार से बंद हो गया है। पुस्तकालय की आय का बड़ा स्रोत 7डी की पांच दुकानें थी। वे भी अब टूट चुकी हैं। ओमप्रकाश मोट ने बताया कि इस पुस्तकालय में पुस्तकों की संख्या करीब 23 हजार हैं। वहीं 50 हस्तलिखित ग्रंथ भी हैं। जिनमें जैमिनी अश्वमेघ पर्व, हरिदासजी की वाणी, सेवादासजी की वाणी और रामचरितमानस प्रमुख रूप से है। चार वेदों पर लिखी पुस्तकें भी यहां सुरक्षित हैं।

    डीडवाना. पुस्तकालय में रखे प्राचीन ग्रन्थ।

    यहां रखे शोध ग्रंथों पर चार लोगों ने की पीएचडी

    मोट ने बताया कि इस पुस्तकालय में रखे शोध ग्रंथों पर सुशीला सारस्वत, उषा जोशी, डॉ. भंवर कसाणा और डॉ. गणेश सैनी ने पीएचडी की है। उन्होंने भी कई पुस्तकें लिखी है। 3 जनवरी 1992 को पुस्तकालय की हीरक जयंती मनाई गई थी। जिस पर स्मारिका का विमोचन तत्कालीन उपराष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने किया था। यहां गुरू दत्त, हजारी प्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, काका हाथरसी जैसे साहित्यकार भी आ चुके हैं। इस पुस्तकालय में डीडवाना निरंजनी संप्रदाय से संबंधित जो हस्तलिखित साहित्य उपलब्ध हैं।

    पुस्तकालय में प्राचीन ग्रन्थ।

    स्थापना दिवस कार्यक्रम पर राजनाथ सिंह को न्यौता

    व्यवस्था समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश मोट ने बताया कि 100वें स्थापना दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर अगले सप्ताह ट्रस्ट व समिति की संयुक्त बैठक होगी। जिसमें आयोजित होने वाले स्थापना दिवस की तैयारियों को लेकर चर्चा की जाएगी।

    ट्रस्ट अध्यक्ष हरि शंकर भाभड़ा को भी इस कार्यक्रम में लाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, वे अस्वस्थ हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी आमंत्रित किया गया है। उनसे मौखिक वार्ता 4 दिन पहले हो चुकी है।

    लिखित स्वीकृति मिलनी बाकी है। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध पत्रकार और साहित्यकार शशि शेखर भी मौजूद रहेंगे। केंद्रीय राज्यमंत्री सीआर चौधरी, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान भी मौजूद रहेंगे। हरीश मोदी व नरेश रूवटिया को भी ट्रस्ट में शामिल किया है।

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