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मां ने कहा कन्यादान सबसे बड़ा दान, दोनों बेटों ने शादी के शगुन में लिया एक रुपया व नारियल

शादी समारोह में दहेज नहीं लेकर आज युवा समाज में एक मिसाल पेश कर रहे हैं। इससे वे दूसरों को भी दहेज नहीं देने और नहीं...

Danik Bhaskar

May 01, 2018, 04:05 AM IST
शादी समारोह में दहेज नहीं लेकर आज युवा समाज में एक मिसाल पेश कर रहे हैं। इससे वे दूसरों को भी दहेज नहीं देने और नहीं लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी कड़ी में डीडवाना तहसील के मौलासर निवासी गौरा देवी प|ी स्व. रामकरण रेवाड़ ने भी अपनी भागीदारी निभाई है। उन्होंने दो बेटों की शादी में दहेज नहीं लेकर मिसाल पेश की है।

गौरा देवी के बेटे राजकुमार की शादी जीनवास (कीकर) निवासी छिगनलाल गढ़वाल की बेटी ललिता से और राजेंद्र की शादी मोरडूंगा (सीकर) निवासी श्रवण कुमार भामू की बेटी प्रियंका से हुई। उन्होंने अपने दोनों बेटों की शादी में शगुन के तौर पर एक रुपया और नारियल ही लिया। इसके अलावा किसी प्रकार का दहेज नहीं लिया। गौरा देवी ने बताया कि उनका परिवार हमेशा से ही समाज सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि कन्यादान सबसे बड़ा दान माना गया है। फिर भी समाज में दहेज देने और लेने की जो परंपरा है। वह गलत है। ऐसी गलत परंपराओं को रोकने की दिशा में पहल करने के लिए ही उन्होंने एक रुपया और नारियल शगुन के तौर पर लेकर अपने दोनों बेटों की शादी की। लक्ष्मणराम बलारा, दूल्हे के मामा भागीरथ राम बिजारणिया, भंवरलाल, मानाराम और परमेश्वर लाल सहित समाज के लोगों ने उनकी इस पहल की सराहना की है।

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