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नमक झील वाले क्षेत्र डीडवाना में विभाग का एक भी स्थायी कर्मचारी नहीं, दो कार्मिक संविदा पर कार्यरत

एक विभाग में एक भी कर्मचारी पद पर कार्यरत नहीं है। यहां पद रिक्त नहीं बल्कि पद ही समाप्त हो गए हैं और बिना पद के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 04:20 AM IST

नमक झील वाले क्षेत्र डीडवाना में विभाग का एक भी स्थायी कर्मचारी नहीं, दो कार्मिक संविदा पर कार्यरत
एक विभाग में एक भी कर्मचारी पद पर कार्यरत नहीं है। यहां पद रिक्त नहीं बल्कि पद ही समाप्त हो गए हैं और बिना पद के विभागीय कार्यालय चल रहा हैं। सुनने में बड़ा अजीब लगता है मगर यह हकीकत हैं। राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग का उपक्रम लवण विभाग जो डीडवाना में एक जमाने में हजारों श्रमिकों को रोजगार देता था और इस विभाग में अनेक कर्मचारी व अधिकारी काम करते थे। मगर धीरे-धीरे अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवानिवृति के बाद पद समाप्त होते गए और नए पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई और आज स्थिति यह हो गई है कि इस विभाग में एक भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है। सभी कार्यरत कार्मिक सेवानिवृत हो चुके है और यह विभाग अब संविदा कर्मियों के भरोसे चल रहा हैं।

शहर के बंगलाबास में स्थित नमक विभाग का साल्ट बंगला जो अंग्रेजी हुकूमत के समय नमक विभाग के प्रमुख अधिकारियों का कार्यालय एवं आवास माना जाता था। इस बंगले के आसपास कोई भी व्यक्ति नहीं जा सकता था और जाता तो उसकी तलाशी ली जाती थी। परंतु आज यह साल्ट का बंगला दिन प्रतिदिन कर्मचारियों के अभाव के कारण बदहाल पड़ा है। एक समय था जब साल्ट बंगले में स्थित नमक विभाग के कार्यालय में जहां एक निरीक्षक, दो लिपिक व दो सहायक कर्मचारी कार्यरत थे। जो नमक झील से निकलने वाले नमक का टैक्स वसूल करते थे। वर्तमान सालाना करीब 8-साढ़े लाख रुपए का राजस्व मिल रहा है। वर्ष 1932 में इस बंगले का निर्माण किया गया था। जिसमें मैनेजर का आवास भी है। जहां आज वन विभाग का कार्यालय चल रहा है। परंतु विशाल बंगले के पास में ही 19 आवास बने हुए, जिनमें 3-4 तो जीर्ण क्षीण अवस्था में है। 1981 में मैनेजर का पद हटने के बाद वर्तमान तक नमक विभाग के मैनेजर का पद क्षेत्र के एसडीएम के पास रहता है। गत 30 जुलाई को इंस्पेक्टर का पद भी समाप्त हो गया। इस पद पर कार्यरत अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए। जो अंतिम पद था। उससे पूर्व सभी पदों पर कार्यरत कार्मिक पूर्व में ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। वर्तमान में संविदा पर एक बाबू कार्यरत है व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लगा हुआ है। मगर विभाग की ओर से नियमित सेवा का एक भी कार्मिक इस पद पर नहीं हैं।

इस नमक विभाग के अंतर्गत अंग्रेजों के जमाने से बाड़मेर जिले के पचपदरा क्षेत्र, जहां किसी जमाने में भारी मात्रा में नमक उत्पादन होता था। जहां वर्तमान में 10 हजार क्विंटल वार्षिक उत्पादन हो रहा है। जिससे केवल मात्र 1.50 लाख की रॉयल्टी मिल रही है। पचपदरा वो क्षेत्र है, जहां हाल ही में सरकार द्वारा रिफाइनरी लगाई गई है। जिसका उद्‌घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 16 जनवरी 2018 को किया गया था। परंतु पचपदरा में किसी भी अधिकारी का पद नहीं मात्र एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे कार्य चल रहा है।

वर्ष 1964 में हुई थी डीडवाना के अधीन

ब्रिटिश काल के दौरान राजस्थान में नमक उत्पादन के दौरान सांभर से लेकर डीडवाना पचपदरा नमक उपक्रम का मुख्य केंद्र अंग्रेजों ने डीडवाना को ही माना। जो वर्तमान में भी अंग्रेजी हुकूमत के साल्ट बंगले में विभागीय कार्यालय स्थित है। पचपदरा व डीडवाना लवण क्षेत्र के संबंध में 1964 में ही समझौता हो गया था। इससे पूर्व वर्ष 1960 में यह उपक्रम भारत सरकार के अधीन था। समय-समय पर बैठकें भी आयोजित होती है। 5 सितंबर 2011 को डीडवाना साल्ट मैनेजर द्वारा रॉयल्टी संबंधित एवं अन्य विभागीय कार्य के लिए प्रमुख शासन सचिव राजकीय उपक्रम विभाग को पत्र भी लिखा गया। इसी प्रकार 16 नवंबर 2017 को डीडवाना मैनेजर द्वारा पचपदरा तहसीलदार को चार्ज देने के संबंध में पत्र भी लिखा था। ताकि रिफाइनरी संबंधित कार्यों में भारत सरकार के उपक्रम का सहयोग कर सके। मगर उस दौरान तहसीलदार का पद रिक्त था। 2 अक्टूबर 2004 को तत्कालीन उद्योग मंत्री के साथ एक बैठक भी हुई थी। जिसमें नमक उत्पादकों व विभाग के साथ 3 मई 1973 को हुए समझौते की क्रियान्विति की गई थी। यह कुल भूमि 28 हजार 424 बीघा है जिसमें 12 हजार 34 बीघा पर रिफाइनरी लगेगी। भारत सरकार द्वारा 1954 में लोक सभा की प्राकलन समिति की सिफारिश के आधार पर पब्लिक सेक्टर में 1 कंपनी का गठन कर इनका प्रबंधन पब्लिक सेक्टर में किए जाने का निर्णय लिया था। इस क्रम में मैसर्स हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड का गठन किया गया था। वर्ष 1958 में मैसर्स हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड द्वारा सांभर डीडवाना एवं लवण क्षेत्रों का प्रशासनिक नियंत्रण संभाला गया था। पचपदरा लवण क्षेत्र के संबंध में भारत सरकार के साथ संपादित एग्रीमेंट के समाप्त होने के बाद 1 अप्रैल 1960 को पचपदरा लवण क्षेत्र राजस्थान सरकार को स्थानांतरित कर दिया गया था। उसके बाद 1964 को डीडवाना के अधीनस्थ कर दिया था।

डीडवाना. साल्ट बंगला जहां चल रहा है नमक विभाग का कार्यालय।

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