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पति और पत्नी के बीच श्रद्धा और विश्वास हमेशा बना रहना चाहिए, क्योंकि इसी से जिंदगी बनेगी सुखमयी

शहर के तुलसी वाटिका में चल रही श्रीमद भागवत कथा के 5वें दिन पं. अशोक व्यास ने कहा कि भगवान का जन्म नहीं होता वे तो...

Danik Bhaskar | May 26, 2018, 04:30 AM IST
शहर के तुलसी वाटिका में चल रही श्रीमद भागवत कथा के 5वें दिन पं. अशोक व्यास ने कहा कि भगवान का जन्म नहीं होता वे तो अजन्मे है और केवल लीलाएं दिखाते है। जो वस्तु पहले थी आज भी है और आगे भी रहेगी, वह ईश्वर है। ईश्वरीय भक्ति बिना गुरु के नहीं मिल सकती। जिस प्रकार बिजली के तारों में बिजली दिखाई नहीं देती परंतु उसमें बिजली रहती है। उसी प्रकार श्रीमन् नारायण कण-कण में व्याप्त है, मगर उनको देखने के लिए चाहिए दिव्य चक्षु। सदगुरु ही जीव को परमात्मा का साक्षात्कार करवा सकता है जिस पर गुरु की दृष्टि पड़ जाती है उसका जीवन धन्य हो जाता है। इस मौके पर श्रद्धालु मौजूद थे।

परबतसर | अमरचंद गौड़ की स्मृति में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में शुक्रवार को कथा वाचक मनोज भाई दाधीच ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास जिंदगी के दोनों अहम पहलू है। जिंदगी में पति और प|ी के बीच हमेशा श्रद्धा और विश्वास बना रहना चाहिए। जिससे जिंदगी सुखमय हो सकती है। महाराज ने कहा कि जो मनुष्य दूसरों की सेवा तथा त्याग भावना रखते हुए दीन दुखियों, माता-पिता व बुजुर्गों की सेवा करता है, वह मनुष्य जीवन में सफल होता है। इस दौरान सरस्वती देवी, मधुबाला, सुमन, जसौदा, संगीता गौड़, विजया मिश्रा, मालती मिश्रा, विनीता जोशी, उषा व्यास, अनिता राठी, शोभा मूंदड़ा, मोनिका गौड़, घनश्याम गौड़, सुभाष गौड़, सत्यनारायण मिश्रा, गोपाल बागड़ा, हरजीराम बुगालिया, मदनलाल शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, रविन्द्र कौशिक, ओमप्रकाश शर्मा, उगमाराम, कमल मिश्रा, किशनगोपाल व्यास, भंवरलाल गौड़, राजेन्द्र उपाध्याय, ज्ञानेन्द्र व्यास, मुकेश गौड़, हेमन्त गौड़, अंबालाल आदि मौजूद थे।

कोलिया में श्रीमद्‌ भागवत कथा आज से होगी शुरू

कोलिया |
कोलिया के ब्रह्मपुरी मोहल्ले में शनिवार से 1 जून तक 7 दिवसीय श्रीमद्‌ भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ होगा। आयोजनकर्ता गंगादेवी, आशाराम काकड़ा ने बताया कि कलश यात्रा ब्रह्मपुरी स्थित सत्यनारायण भगवान के मंदिर से सुबह 8 बजे निकाली जाएगी। जो गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल पहुंचेगी। कथा में संत हेतमराम महाराज प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कथा का वाचन करेंगे।

श्रीमद् भागवत कथा| डीडवाना व परबतसर में कथावाचक ने बताया प्रभु नाम सुमिरन का महत्व, कहा -

भास्कर संवाददाता | डीडवाना

शहर के तुलसी वाटिका में चल रही श्रीमद भागवत कथा के 5वें दिन पं. अशोक व्यास ने कहा कि भगवान का जन्म नहीं होता वे तो अजन्मे है और केवल लीलाएं दिखाते है। जो वस्तु पहले थी आज भी है और आगे भी रहेगी, वह ईश्वर है। ईश्वरीय भक्ति बिना गुरु के नहीं मिल सकती। जिस प्रकार बिजली के तारों में बिजली दिखाई नहीं देती परंतु उसमें बिजली रहती है। उसी प्रकार श्रीमन् नारायण कण-कण में व्याप्त है, मगर उनको देखने के लिए चाहिए दिव्य चक्षु। सदगुरु ही जीव को परमात्मा का साक्षात्कार करवा सकता है जिस पर गुरु की दृष्टि पड़ जाती है उसका जीवन धन्य हो जाता है। इस मौके पर श्रद्धालु मौजूद थे।

परबतसर | अमरचंद गौड़ की स्मृति में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में शुक्रवार को कथा वाचक मनोज भाई दाधीच ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास जिंदगी के दोनों अहम पहलू है। जिंदगी में पति और प|ी के बीच हमेशा श्रद्धा और विश्वास बना रहना चाहिए। जिससे जिंदगी सुखमय हो सकती है। महाराज ने कहा कि जो मनुष्य दूसरों की सेवा तथा त्याग भावना रखते हुए दीन दुखियों, माता-पिता व बुजुर्गों की सेवा करता है, वह मनुष्य जीवन में सफल होता है। इस दौरान सरस्वती देवी, मधुबाला, सुमन, जसौदा, संगीता गौड़, विजया मिश्रा, मालती मिश्रा, विनीता जोशी, उषा व्यास, अनिता राठी, शोभा मूंदड़ा, मोनिका गौड़, घनश्याम गौड़, सुभाष गौड़, सत्यनारायण मिश्रा, गोपाल बागड़ा, हरजीराम बुगालिया, मदनलाल शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, रविन्द्र कौशिक, ओमप्रकाश शर्मा, उगमाराम, कमल मिश्रा, किशनगोपाल व्यास, भंवरलाल गौड़, राजेन्द्र उपाध्याय, ज्ञानेन्द्र व्यास, मुकेश गौड़, हेमन्त गौड़, अंबालाल आदि मौजूद थे।

कोलिया में श्रीमद्‌ भागवत कथा आज से होगी शुरू

कोलिया |
कोलिया के ब्रह्मपुरी मोहल्ले में शनिवार से 1 जून तक 7 दिवसीय श्रीमद्‌ भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ होगा। आयोजनकर्ता गंगादेवी, आशाराम काकड़ा ने बताया कि कलश यात्रा ब्रह्मपुरी स्थित सत्यनारायण भगवान के मंदिर से सुबह 8 बजे निकाली जाएगी। जो गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल पहुंचेगी। कथा में संत हेतमराम महाराज प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कथा का वाचन करेंगे।

डीडवाना. तुलसी वाटिका में भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।