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3 दिन के नवजात को हुआ पीलिया, डॉ. बोले- तत्काल खून बदलो, कहीं नहीं मिला तो मेल नर्स चुन्नीलाल ने रक्त दे बचाई जान

डबल वोल्यूम एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन (शरीर से रक्त बदलना) प्रकिया से नवजात शिशुओं में अत्यधिक पीलिया रोग का उपचार...

Danik Bhaskar | Apr 15, 2018, 04:40 AM IST
डबल वोल्यूम एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन (शरीर से रक्त बदलना) प्रकिया से नवजात शिशुओं में अत्यधिक पीलिया रोग का उपचार अभी तक जयपुर, जोधपुर जैसे बड़े शहरों में ही किया जा रहा था। लोगों की सोच व इस बीमारी के उपचार की प्रक्रिया जटिल होने के कारण लोग इलाज के लिए नवजातों को बड़े अस्पतालों में ले जाते हैं। लेकिन शनिवार को शहर के सरकारी अस्पताल के डॉ. धन्नाराम बाजिया ने राजकीय बांगड़ अस्पताल में पहली बार डबल वोल्यूम एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया अपना 3 दिन के नवजात को पीलिया होने पर उसके शरीर का पूरा खून बदलकर उपचार करके ये साबित कर दिया है कि इस तरह की बीमारी का उपचार डीडवाना में भी किया जा सकता है। इस नवजात का जन्म 3 दिन पहले एक निजी अस्पताल में हुआ था। पीलिया होने पर परिजन उसे बांगड़ अस्पताल लेकर पहुंचे। नवजात की जांच करने पर पता चला कि उसे तेज पीलिया था। जिस पर डॉक्टर ने परिजनों को नवजात का पूरा खून बदले जाने की बात कही। परिजनों ने डॉक्टर पर भरोसा जताया। इसके बाद शनिवार सुबह करीब दो घंटे तक नवजात का खून बदलने की प्रक्रिया चली। डॉ. बाजिया पूर्व में जयपुर के जेके लोन हॉस्पिटल में डबल वोल्यूम एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन कर चुके है।

मां का ब्लड ग्रुप नहीं हुआ मैच, बढ़ी परेशानी

3 दिन के नवजात का खून बदलने की तैयारियां चल रही थी। नवजात की मां के खून का ब्लड ग्रुप चैक किया तो उसका ब्लड ग्रुप नवजात के ब्लड से मैच नहीं हुआ। रक्त समूह नहीं मिलने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। इस पर अस्पताल के मेल नर्स चुन्नीलाल ने नवजात के दर्द व परिजनों की परेशानी को देखते हुए बताया कि उसका ब्लड ग्रुप ए नेगेटिव है। वो नवजात को रक्त देगा। इसके बाद परिजनों को उम्मीद जगी और खून बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई। नवजात की सेहत में सुधार है। संपूर्ण कार्रवाई पीएमओ मुराद खां के निर्देशानुसार की गई। जिसमें नर्स रामेश्वरी, नरपतसिंह व चुन्नीलाल आदि स्टाफ ने सहयोग किया।

डीडवाना. बांगड़ अस्पताल में नवजात की जांच करते चिकित्सक।