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निर्जला एकादशी पर झालरिया मठ में ज्येष्ठाभिषेक कार्यक्रम

शहर के प्रमुख झालरिया मठ बड़ा स्थान मंदिर में शनिवार को महाभिषेक, ज्येष्ठाभिषेक, आमरस अभिषेक आदि कार्यक्रम मठ के...

Danik Bhaskar | Jun 24, 2018, 04:40 AM IST
शहर के प्रमुख झालरिया मठ बड़ा स्थान मंदिर में शनिवार को महाभिषेक, ज्येष्ठाभिषेक, आमरस अभिषेक आदि कार्यक्रम मठ के पीठाधीश्वर स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज के सान्निध्य में आयोजित हुए। मंदिर व्यस्थापक श्यामसुंदर जोशी ने बताया कि शनिवार को निर्जला एकदशी पर विभिन्न प्रांतों की अनेक नदियों से लाए गए 108 कलशों के जल से पहले भगवान का जलाभिषेक किया गया। उसके बाद 151 किलो आम, 51 किलो दूध और इतनी ही मात्रा में दही का अभिषेक किया गया। इसके अलावा गन्ना, पपीता, मौसमी, लीची, चीकू, अनार, सेव, आंवला, मधु आदि ऋतु फलों के रस का अभिषेक किया गया। इस मौके पर अनेक प्रांतों से मठ के अनुयायी विशेष रूप से इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे। कार्यक्रम में उद्योगपति रमेश बांगड़ दिल्ली से, ओमप्रकाश पसारी फरीदाबाद से मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान संगीत कलाकारों ने भव्य भजनों की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए। इस दौरान बड़ी संख्या में शहर सहित आस-पास के स्थानों से भी श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए।

151 किलो आमरस व 51-51 किलो दूध-दही से भगवान का किया अभिषेक

आमरस अभिषेक

भगवान जानकीवल्लभ का सबसे पहले जलाभिषेक किया गया। इसके बाद 151 किलो आम से तैयार आमरस से भगवान का अभिषेक किया गया। ऋतु फलों से भी अभिषेक किया गया।

पंचामृत अभिषेक

झालरिया मठ में ज्येष्ठाभिषेक कार्यक्रम के दौरान भगवान जानकीवल्लभ का दूध, दही, शहद सहित पंचामृत से वैदिक मंत्रोच्चारों के बीच भव्य अभिषेक किया गया।

जीवन जीने की मिलती प्रेरणा

झालरिया मठ के पीठाधीश्वर स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान जानकीवल्लभ की जिन पर कृपा होती है, वही ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले पाते है। इन लीलाओं के माध्यम से भगवान सफल मानव जीवन जीने की प्रेरणा देते है। उन्होंने कहा कि साल में 6 प्रकार की ऋतुएं होती है और ग्रीष्मकालीन ऋतु में भगवान भी ऐसे अनुष्ठानों के माध्यम से सांसारिक जीवन किस प्रकार जीना है, इस बात का हमें ज्ञान करवाते है।

नदियाें का पवित्र जल लाए

अभिषेक कार्यक्रम के लिए यमुना, नर्मदा, गोदावरी, गंगोत्री, यमुनोत्री, अलकनंदा, नेमीसारण्य, पुष्कर आदि पवित्र स्थानों से 108 कलशों में पवित्र जल लाया गया। जिससे भगवान का अभिषेक किया गया।

शृंगार दर्शन: निर्जला एकादशी पर भगवान जानकीवल्लभ का विशेष शृंगार भी किया गया। इस दौरान भगवान को नई पोशाक धारण करवाई गई। इसके बाद भगवान की महाआरती कर श्रद्धालुओं काे प्रसाद वितरित किया गया।

शृंगार

7:00 बजे