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अप्रैल से जून तक किताबों की मांग, बाजार में भी पढ़ाई का माहौल

डूंगरपुर| आने वाले तीन माह तक जिलेभर में शिक्षा से जुड़ी सामग्री के लिए 10 से 15 करोड़ रुपए तक का बाजार रहेगा। यह राशि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:50 AM IST

अप्रैल से जून तक किताबों की मांग, बाजार में भी पढ़ाई का माहौल
डूंगरपुर| आने वाले तीन माह तक जिलेभर में शिक्षा से जुड़ी सामग्री के लिए 10 से 15 करोड़ रुपए तक का बाजार रहेगा। यह राशि दीपावली और होली जैसे बड़े त्योहारों से भी ज्यादा है। शहर में ही प्राइवेट स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र 5 अप्रैल से शुरू हो रहा है, जिसमें शहर की छोटी-बड़ी 55 स्कूलों में करीब साढ़े हजार बच्चे आगामी कक्षा में प्रवेश लेंगे। इसके साथ ही इन बच्चों के लिए किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और अन्य सामान खरीदना शुरू हो गया है। एक अनुमान के अनुसार करीब 7.5 करोड़ रुपए इन आवश्यकताओं के लिए बाजार में आएंगे। इस खर्च में किसी भी प्राइवेट स्कूल की फीस, एडमिशन राशि और वाहन खर्च शामिल नहीं है।

शिक्षा

5 अप्रैल से नया सत्र होगा शुरू, आने वाले तीन माह में त्योहारों की तरह ही रहेगी बच्चों की भीड़, अिभभावक भी शिकायत करने में पीछे

सबसे ज्यादा किताबों पर : अभिभावक पर10 हजार का खर्चा

नर्सरी से बारहवीं तक किताबें

शहर की 55 निजी स्कूलों ने अपने लिए प्राइवेट पब्लिशर की किताबें दो दुकानों से अनुबंधित कर रखी है। इसके लिए माता-पिता को रिजल्ट के साथ ही किताबों की लिस्ट थमा दी जाती है। जहां नर्सरी की न्यूनतम किताबें-कॉपियों के साथ 2 हजार रुपए से शुरू होती है। वहीं बारहवीं तक यह सिलेबस पूरा 15 हजार रुपए में आता है। इन में कही भी कॉपियां, पेन, पेंसिल, रबर, कलर पेन, प्लास्टिक कवर, खाकी कवर और लेबल की पैसा अलग होता है। ऐसे में एक परिवार में दो बच्चे होने पर अभिभावक के करीब 10 हजार का खर्चा आता है।

निजी स्कूलों में यूनिफार्म को लेकर भी अलग-अलग व्यवस्था है। निजी स्कूलों के प्रबंधक ने कपड़ा और रेडिमेड व्यापारियों से अनुबंधन कर रखा है। यहां पर बच्चों के लिए मौसम के अनुसार कपड़ों की व्यवस्था की गई है। जिसमें गर्मी के मौसम के लिए अभी कपड़े उपलब्ध है। जिसमें भी बुधवार और शनिवार के लिए स्पोटर्स ड्रेस और सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार के लिए रेगुलर ड्रेस होता है। इसके साथ ही टाई, बेल्ट, मोजे, जूते और अन्य सामान खरीदना पड़ता है। स्कूलों के कपड़े न्यूनतम 1200 रुपए शुरू होते है। जो साइज के आधार पर अधिकतम 3200 रुपए बाजार से खरीदने पड़ते है।

यूनिफार्म

बाजार में कपड़े, किताबों के अलावा स्टेशनरी का भी बड़ा मार्केट बना है। बच्चों के बैंग, लंच बॉक्स कॉपियां, पेन, पेंसिल, रबर, कलर पेन, प्लास्टिक कवर, खाकी कवर और लेबल है। इसके लिए अभिभावक पर पाबंदी नहीं लगी हुई है। जिसमे कही से भी सामान खरीद सकते है।

स्टेशनरी

अभिभावक की मौन स्वीकृति से खर्च होता है पैसा

शहर के 7.5 करोड़ के टर्न ओवर में अभिभावक की मौन स्वीकृति होती है। पिछले दस वर्ष में किसी भी अभिभावक ने निजी स्कूलों की ओर से फिक्स दुकान से किताबें, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म के लिए लिखित शिकायत नहीं करते हैं। जिले के शिक्षा अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी के बच्चे इन्हीं निजी स्कूलों में अध्ययनरत है। इसके लिए कार्रवाई नहीं होती है।

निजी स्कूलों के खिलाफ कोई भी अभिभावक लिखित में शिकायत नहीं देता है। ऐसे में स्कूलों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं होती है। - मणिलाल छगण, डीईओ

सरकार की ओर से निर्देश

निजी स्कूलों को एनसीआरटी, राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल और निजी प्रकाशकों द्वारा पाठ्यक्रम का उपयोग करता है। ऐसे में निजी स्कूल को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक माह पूर्व अभिभावक को पुस्तकों की सूची, लेखक एवं प्रकाशक के नाम तथा मूल्य के साथ अपने स्कूल के सूचना पटल पर दिखानी होती है। अभिभावक इन पुस्तकों को उनकी सुविधा से खुले बाजार से क्रय करने का अधिकार है।

पुस्तकों के अलावा यूनिफॉर्म, टाई, जूते, कॉपियां अभिभावक खुले बाजार से खरीद सकता है। दबाव पर लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी को दे सकता है।

निजी स्कूल अपनी यूनिफॉर्म पांच वर्ष तक नहीं बदल सकते हैं।

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Web Title: अप्रैल से जून तक किताबों की मांग, बाजार में भी पढ़ाई का माहौल
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