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मेडिकल कॉलेज : फैकल्टी और नर्सिंग स्टाफ को होली पर भी दो माह से वेतन नहीं

Dungarpur News - डूंगरपुर। डूंगरपुर सहित प्रदेश के सभी सात मेडिकल कॉलेज के इस शैक्षणिक सत्र से खुलने की उम्मीद है, लेकिन इससे पहले...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:50 AM IST
मेडिकल कॉलेज : फैकल्टी और नर्सिंग स्टाफ को होली पर भी दो माह से वेतन नहीं
डूंगरपुर। डूंगरपुर सहित प्रदेश के सभी सात मेडिकल कॉलेज के इस शैक्षणिक सत्र से खुलने की उम्मीद है, लेकिन इससे पहले ही मेडिकल कॉलेज में अब तक लगाई गई फैकल्टी और नर्सिंग स्टाफ वेतन के लिए तरस रहे हैं। फैकल्टी डॉक्टरों ने पिछली दिवाली तो बिना वेतन के ही मनाई और इसके एक महीने बाद उनको वेतन मिला। इस बार होली भी बिना वेतन के ही हो रही है।

पिछले दो महीनों से फैकल्टी को वेतन नहीं मिला है, जबकि अब तक फरवरी का महीना भी पूरा हो गया है। ऐसे में पूरे तीन महीने का वेतन बकाया है। डॉक्टरों के अलावा नर्सिंग स्टाफ को भी वेतन नहीं मिला है। अब अंदर ही अंदर विरोध भी हो रहा है और वेतन की मांग की जा रही है। बिना वेतन के भी डॉक्टरों और कर्मचारियों को विधानसभा सत्र चलने के कारण बुधवार को भी दफ्तर में ड्यूटी देनी पड़ रही है।

मेडिकल कॉलेज डूंगरपुर में आठ महीने पहले ही 9 डॉक्टरों ने नियुक्ति दी थी। इसके बाद 3 डॉक्टर और आए। इसके अलावा पिछले महीने ही यूटीबी (अर्जेंट टेंपरेरी बेस पर) 13 डॉक्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ और सहायक स्टाफ अलग से है।

दिसंबर में बजट से मिली थी राहत

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और स्टाफ को वेतन के लिए सरकार की ओर से अब तक केवल एक बार बजट मिला है। पिछले साल दिसंबर महीने में मिले बजट से सितंबर, अक्टूबर और नवंबर महिने के वेतन का भुगतान कर दिया था, लेकिन इसके बाद नया बजट नहीं मिला है। यहीं कारण है कि अब तक दिसंबर, जनवरी और अब फरवरी का महीने का वेतन बकाया है। इस बार होली से पहले सभी को वेतन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन परेशानी झेलनी पड़ रही है।

नवंबर तक का गृह किराया दिया, अब कहा-प्रोबेशन में नहीं मिलेगा : मेडिकल कॉलेज में पहले से ही ज्वाइनिंग देने वाले डॉक्टरों की संख्या बहुत ही कम है। दूसरी ओर अब उन फैकल्टी डॉक्टरों को गृह किराया नहीं दिया जा रहा है। जबकि इससे पहले सितंबर, अक्टूबर और नवंबर तक का गृह किराया भी उन फैकल्टी डॉक्टरों को दिया गया है। जबकि अब सरकार ने उन डॉक्टरों का एक साल का प्रोबेशन बताकर गृह किराया देने से मना कर दिया। मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी डॉक्टर सरकारी क्वार्टर नहीं होने के कारण मकान किराए पर लेकर रहने को मजबूर हैं। एक डॉक्टर को गृह किराए के रूप में सैलेरी का 10 प्रतिशत और मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी को 8 प्रतिशत देने का नियम है।

एमसीआई की टीम मांगेगी दस्तावेज

कॉलेज मान्यता को लेकर एमसीआई की टीम निरीक्षण के दौरान पूरे स्टाफ के दस्तावेज भी जांच करेगी। इसमें स्टाफ को स्वयं को मेडिकल कॉलेज का स्टाफ बताने के लिए सैलेरी स्लिप दिखानी पड़ती है।


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