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जनजातीय गोविंद गुरु विश्वविद्यालय में नवाचार

Dungarpur News - भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा/डूंगरपुर पहली दफा खुद के बूते परीक्षाएं करवाने में किए नवाचार के साथ गोविंद गुरु...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:55 AM IST
जनजातीय गोविंद गुरु विश्वविद्यालय में नवाचार
भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा/डूंगरपुर

पहली दफा खुद के बूते परीक्षाएं करवाने में किए नवाचार के साथ गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय ने कॉपियां जंचवाने में भी कुछ नया किया है। इसके तहत परीक्षक वे ही बन पाएंगे, जिनके पास कंप्यूटर और नेट की सुविधा हैं और वे कुल प्राप्तांक विश्वविद्यालय के पैनल पर अपलोड करने में सक्षम हैं।

परीक्षकों की नियुक्ति को लेकर इस संबंध में विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और डूंगरपुर जिलों के सभी संबद्ध सरकारी और निजी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत इन कॉलेजों के पांच साल का अनुभव रखने वाले व्याख्याता, सहायक आचार्य, सह आचार्य, और आचार्य आवेदन कर सकेंगे, लेकिन उन्हें मूल्यांकन के नवाचार को लेकर दक्ष होना जरूरी होगा। जो खुद या उनके रिश्तेदार बतौर परीक्षार्थी शामिल हुए हैं, वे परीक्षक नहीं बन पाएंगे। मूल्यांकन में कॉपियों के अंदर प्रश्न अनुसार अंकों का इंद्राज और कुल प्राप्तांक ऑनलाइन अपलोड करने का काम उन्हें 30 दिन में पूरा करना होगा।

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नेट-कंप्यूटर में माहिर ही बन सकेंगे परीक्षक, प्राप्तांकों को विश्वविद्यालय के पैनल पर करना होगा अपलोड

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आंध्रप्रदेश की तकनीक रही कारगर, खर्चा भी घटा

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आंध्रप्रदेश की तर्ज पर डिजिटल मोड के प्रयोग के लिए बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिले के एक-एक सेंटर को चुना गया। इनमें पेपर भेजे ही नहीं गए और कॉलेज पैनल पर पेपर सिस्टम के तहत डाले गए, जो तय समय में ही खुल पाए। फिर उसी अवधि में विश्वविद्यालयी सर्वर के सपोर्ट से कॉलेज की ओर से रजिस्टर्ड करवाए मोबाइल पर ओटीपी नंबर और फिर उससे पासवर्ड पहुंचे और सिस्टम खुलने पर पेपर वहीं प्रिंट कर परीक्षार्थियों में बांटे गए। यह सिस्टम पूरी तरह डिजिटलाइज और सिक्योर होने के साथ कम खर्चीला भी रहा। भविष्य में सभी जगह इस्तेमाल पर पेपर ट्रांसपोर्टेशन का झंझट ही खत्म हो जाएगा।

पहले से तैयारी, प्लास्टिक कोटेड लिफाफे में पेपर

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सांख्यिकी पर फोकस करते हुए प्लानिंग कर एडवांस में वो तमाम काम सलीके से किए, जो दूसरे विश्वविद्यालय फैकल्टीवार के पहले करते हैं। फैकल्टीवार अलग-अलग रंग के पेपर तैयार किए गए। परीक्षार्थियों के आंकड़े के मुताबिक खास प्लास्टिक कोटेड लिफाफों में पैक करवाए, जो खोले नहीं केवल काटे जा सकते हैं। फिर परीक्षा की तारीख के मुताबिक लिफाफे सेट करवाते हुए बॉक्स पर भी बाकायदा पैकिंग स्लीप कलर कोड के अनुसार लगाई, ताकि एक नजर में सब कुछ स्पष्ट हो जाए। सेंटर वार प्रेस से करवाई गई पैकिंग के विश्वविद्यालय भराेसे नहीं रहा और परीक्षा विभाग ने खुद बक्सों की रेंडम चैकिंग की।

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इंटेक पर ध्यान, दो चरण में भेजे पेपर, दबाव घटा

5 मार्च से परीक्षा शुरू कराने से पहले केंद्रों के इंटेक पर फोकस कर एडवांस में में अटेंडडेंस शीटें भेजीं। पहले चरण में 24 मार्च तक की परीक्षाओं के पेपर भेजे गए। सुपुर्दगी के दौरान चैक लिस्ट से मिलान किया गया और केंद्र अधीक्षकों ने विषय और तारीखवार लिफाफे अलग-अलग सुरक्षित रखवाकर इस्तेमाल शुरू करवाया, जिससे परीक्षा के दिन वे ही लिफाफे सामने आए, जिन विषयों के पेपर थे। उसके बाद दूसरे दौर में यही प्रक्रिया अपना कर 25 मार्च से 20 अप्रैल तक के पेपर भेजे गए। इससे एलएलबी, बीसीए, पीजीडीसीसीए और योगा जैसे पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं ही शेष रहने से दबाव घट गया है।


डूंगरपुर का एसबीपी कॉलेज भी शामिल

परीक्षकों को काॅपियां जांचने के बाद समन्वयक तक पहुंचाने तक मुख्यावास पर उपस्थिति अनिवार्य रूप से देनी होगी। इसे लेकर प्रारूप जारी कर सहमति पत्र मांगे गए हैं। इन्हें बांसवाड़ा जिले में गोविंद गुरु कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके जैन, डूंगरपुर में एसबीपी कॉलेज प्राचार्य डॉ. एचआर मारु और प्रतापगढ़ जिले में सरकारी स्नातकोत्तर कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. नवीनकुमार झा के अलाव विश्वविश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में सहमति पत्र भेजे जा सकेंगे। उधर, यूनिवर्सिटी के डिजिटल मोड के प्रयोग से न केवल परीक्षा का सिस्टम सुरक्षित हुआ है, बल्कि इससे भविष्य में पेपर ट्रांसपोर्टेशन बंद होने की संभावना है।

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