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गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीद में मंगवाए एक हजार थ्रेशर

जिले में उपलब्ध थ्रेशर मशीनों की नगण्य संख्या को देखते हुए किसानों को करीब एक हजार बाहर से मंगवाने पड़े हैं। इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:55 AM IST

जिले में उपलब्ध थ्रेशर मशीनों की नगण्य संख्या को देखते हुए किसानों को करीब एक हजार बाहर से मंगवाने पड़े हैं। इस बार जिले में गेहूं की पैदावार पिछले साल से 23 हजार मैट्रिक टन ज्यादा होने का अनुमान है, इसे देखते हुए कृषि विशेषज्ञों में खास उत्साह है।

किसानों ने भी कटाई को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। कई जगहों पर कटाई 25 फीसदी तक हो भी चुकी है। अचानक आए मौसम में बदलाव को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। इसी बीच मौसम खुलने से बीज की साइज बड़ी होने की खुशी भी उनकी आंखों में है। इस बार मौसम पूरी तरह गेहूं की खेती के अनुकुल रहा।

पिछले कुछ सालों में आए गेहूं की की पैदावार के बदलाव को देखते हुए किसानों को थ्रेशर मशीनों की कमी खलने लगी है। इसे देखते हुए किसानों ने ठेकेदारों के जरिए थ्रेशर मंगवाए है। ये थ्रेशर घंटे के हिसाब से चार्ज करते है। प्रतिघंटे 600 से 800 रुपए तक चार्ज करते है।

दरों में बदलाव के लिए जिले में प्रवेश के स्थान से लगाकर खेत की दूरी कारण बताया जाता है। हमेशा यहां जोधपुर क्षेत्र से गिनती के थ्रेशर लाए जाते है, जिनकी संख्या बमुश्किल 200 के करीब होती है। अब जिले के प्रमुख मार्गों पर हर 10 किलोमीटर पर पेट्रोल पंप या किसी बड़ी बस्ती के आसपास 20 से 30 थ्रेशर एक समूह में रखे देखे जा रहे है, जो हर किसी के लिए इस बार चर्चा का विषय है। लोगो का कहना है कि इतने थ्रेशर पहले नहीं देखे।

जिले में उपलब्ध थ्रेशर मशीनों की संख्या कम होने के कारण बाहरी राज्यों का यहां व्यापारिक केंद्र

पंजाब, हरियाणा और गुजरात से लाए थ्रेशर

पैदावार पिछले साल से 23 हजार मैट्रिक टन ज्यादा

पिछले साल 46 हजार 309 हैक्टेयर में 78 हजार 637 मैट्रिक टन उत्पादन हुआ था। इस बार करीब 4 हजार हैक्टेयर में ज्यादा करीब 50 हजार हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई की थी। ऐसे में पैदावार का लक्ष्य एक लाख 25 हजार मैट्रिक टन होगा।

इस बार बंपर पैदावार की उम्मीद है। पहली बार लक्ष्य एक लाख मैट्रिक टन होना हमारे लिए भी खुशी का विषय है। उम्मीद है कि किसान उन्नत तकनीकों से खेती कर खुद की आय बढ़ाएंगे। - गौरीशंकर कटारा, उपनिदेशक, कृषि।

इस बार हमेशा की तरह इस बार केवल जोधपुर से ही थ्रेशर नहीं लाए गए है। इस बार इतनी बड़ी संख्या में थ्रेशर की आपूर्ति केवल जोधपुर से होना संभव नहीं था। इसे देखते हुए प्रदेश के सीमावर्ती पंजाब, हरियाणा, और गुजरात राज्यों से छोटे थ्रेशर मंगवाए गए है। उल्लेखनीय है पिछड़े जनजाति क्षेत्र के किसानों का उन्नत खेती की ओर रुझान बढ़ा है। ऐसे में वे अब बैलों की जुताई कर खलिहान में गेहूं फसल से अलग करने में रुचि नहीं दिखा रहे है। ऐसे में उनका रुझान अब थ्रेशर मशीन की तरफ हुआ है। हालांकि पिछले कुछ सालों में बुवाई के लिए भी ट्रैक्टर की तरफ किसानों की रुचि सामने आई है।

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