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एडीपीसी की जांच में मिड-डे-मील में प्रतिदिन 1452 रुपए का गड़बड़ी पकड़ी

Dungarpur News - डूंगरपुर| सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना समन्वयक गोवर्धनलाल यादव ने प्रारंभिक शिक्षा ब्लॉक चिखली के तहत...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:55 AM IST
एडीपीसी की जांच में मिड-डे-मील में प्रतिदिन 1452 रुपए का गड़बड़ी पकड़ी
डूंगरपुर| सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना समन्वयक गोवर्धनलाल यादव ने प्रारंभिक शिक्षा ब्लॉक चिखली के तहत राउप्रावि भंडारा बोडामली का औचक निरीक्षण कर मिड डे मील में प्रतिदिन डेढ़ हजार रुपए की वित्तीय गडबड़ी पकड़ी।

एडीपीसी यादव ने बताया कि स्कूल में निरीक्षण के दौरान मिड डे मील का बच्चों के नामांकन के आधार पर उपयोग में ली गई खाद्य सामग्री का औसत निकाला। उन्होंने संस्थाप्रधान कालूराम डामोर को बताया कि गुरुवार को मीनू के अनुसार खिचड़ी बनाने के आदेश दिए थे। कक्षा 1 से 5 तक का नामांकन 106 बच्चों का था। इसमें प्रति बच्चा 100 ग्राम के हिसाब से 10 किलो चावल लेने थे। इसी प्रकार कक्षा 6 से 8 तक में उपस्थित 164 बच्चों के लिए प्रति बच्चा 150 ग्राम के हिसाब से 25 किलो चावल लेने थे।

ऐसे में गुरुवार को 35 किलो चावल की जगह सिर्फ 25 किलो चावल लिए। इससे 10 किलो अनाज जानबूझकर कम लिया गया। इसी प्रकार तेल, अनाज, आलू, मटर का हिसाब करके मिड डे मील प्रभारी ने कुल 1451 रुपए की वित्तीय अनियमितता की। इस हिसाब से एक माह में करीब 30 हजार रुपए की वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया। बच्चों के नामांकन के आधार पर पर्याप्त मात्रा में खिचड़ी नहीं बनाई। राज्य सरकार के नियम के अनुसार प्रति बच्चा मापदंड भी दिया गया है।

ऐसे में प्रभारी के पास अतिरिक्त अनाज, तेल और मसाले बच जाते हैं। इससे प्रतिदिन राजस्व को डेढ़ हजार रुपए का नुकसान हुआ। पूरे मामले की रिपोर्ट डीईओ प्रारंभिक को प्रस्तुत की गई।

जांच में स्कूल का शैक्षणिक स्तर भी सबसे न्यून मिला

सीसीई पैटर्न पर शिक्षण कार्य भी अधूरा पाया

एडीपीसी गोवर्धनलाल यादव ने बताया कि स्कूल का शैक्षणिक स्तर बहुत न्यून मिला। एसआईक्यूई और सीसीई पैटर्न पर शिक्षा का स्तर कम मिला। उन्होंने बताया कि शिक्षकों ने कक्षाओं में दैनिक डायरी शिक्षण कार्ययोजना नहीं बनाई थी। पाठ योजना के आधार पर शिक्षण कार्य नहीं कराया था। शिक्षक द्वारा एसआईक्यूई में बच्चों की कॉपियों की नियमित जांच भी नहीं की गई थी। सीसीई में समूहवार शिक्षण कार्य नहीं कराया गया था। 20 प्रति बच्चा कला किट का भी उपयोग नहीं किया गया था। स्कूल में इस शैक्षणिक सत्र में चिखली एबीईओ प्रदीपसिंह और पीईईओ बोडामली ने आठ बार निरीक्षण किया। इसके बावजूद किसी भी अधिकारी ने शिक्षण पद्धति का अवलोकन नहीं किया।

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