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एकलव्य स्कूल बनाने की घोषणा से डूंगरपुर को मिलेगा फायदा

आम बजट 2018 को लेकर स्थानीय स्तर पर सीधे-सीधे कोई फायदेमंद प्रावधान नहीं दिखा। वहीं शिड्यूल ट्राइबल क्षेत्र की आबादी...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 03:55 AM IST
आम बजट 2018 को लेकर स्थानीय स्तर पर सीधे-सीधे कोई फायदेमंद प्रावधान नहीं दिखा। वहीं शिड्यूल ट्राइबल क्षेत्र की आबादी के लिए किए गए आर्थिक प्रावधानों से एसटी और एससी वर्ग के विकास की आस जरूर बंधी है।

वहीं इस आबादी के लिए एकलव्य स्कूल खोले जाने की घोषणा भी की गई है और इसके लिए अगले चार सालों के लिए साथ ही साथ एक लाख करोड़ रुपए का प्रावधान भी किए जाने से योजना के जमीन पर लागू होने के फायदे भी मिलेंगे। छत से वंचित तमाम परिवारों के लिए साल 2022 में मकान बनाने की घोषणा सकारात्मक कदम बताया जा रहा है। चुनावी साल होने से एसटी वर्ग के विकास के लिए 39 हजार 135 करोड़ और एससी के लिए 56 हजार 619 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया है। कर्मचारियों को टैक्स में 40 फीसदी की मानक छूट देकर लुभावनी घोषणा की गई है। हालांकि असल में कर्मचारियों से यात्रा, चिकित्सा भत्ता जैसे लाभ पर कैंची भी चला दी है, ऐसे में जितना फायदा दिया जा रहा है, उतनी ही कटौती भी होने से उनके लिए नफा नुकसान बराबर ही है। व्यापारियों के लिए यह भी है कि तीन हजार रुपए का भी रिटर्न है और दाखिल नहीं किया तो मुकदमेबाजी से दो-दो हाथ करने ही होंगे। ऐसे में व्यापारियों में निराशा की स्थिति ज्यादा है। हालांकि ई-एसेसमेंट की अनिवार्यता के चलते यह सहज भी होगा, लेकिन व्यापारी इसे ज्यादा ही सख्ती मान रहे हैं।

टीएसपी क्षेत्र की आबादी के लिए किए गए आर्थिक प्रावधानों से एसटी और एससी वर्ग के विकास की आस बंधी

आम बजट में यह अपेक्षा थी कि इनकम टैक्स में छूट का दायरा ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख तो कम से कम किया जाता। व्यापारी वैसे भी किसी न किसी रूप में अन्य टैक्स से गुजरते ही हैं। ऐसे में यदि यहां छूट का दायरा तीन लाख या इससे थोड़ा भी ज्यादा बढ़ाया जाता तो उनके लिए राहत की खबर होती। स्वयं सहायता समूहों के लिए 75 हजार करोड़ की घोषणा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में स्वागत योग्य प्रयास है। साथ ही मेडिकल क्षेत्र में 5 लाख रुपए तक को कवर दिया जाना अपनेआप में काफी बड़ी योजना है। इससे यहां के गरीब परिवारों के लिए वरदान कहा जा सकता है। भूपेंद्र जैन, सीए

सभी जरूरतमंद परिवारों को मकान मिलना अब तय है। इसके लिए 2022 की डेडलाइन तय की गई है। यह काफी बड़ा सरकारी निवेश है। व्यापारियों को टैक्स में छूट की काफी आशा थी। आर्थिक सुधारों की दिशा में किए गए इस सरकार के प्रयासों में यह जरूरी था। चूंकि यह इस सरकार का आखिरी बजट भी था, ऐसे में यह समझा जा रहा था कि सभी वर्गों को खुश करने के प्रयास होंगे, लेकिन कर्मचारियों को जरूर फायदा दिया, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। : कमलेश शाह, टैक्स एक्सपर्ट

वेतनभोगी कर्मचारियों को चालीस फीसदी कटौती की छूट दी है। व्यापारियों के लिए कोई फायदा नहीं। शिक्षा और सेस 4 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना आम और मध्यमवर्गीय परिवारों पर सीधे-सीधे चोट है। व्यापारी की अपेक्षा थी कि छूट 3 लाख तक की जाती, लेकिन कोई बदलाव की जरूरत नहीं समझी गई, ऐसे में निराशा का माहौल है। सरकार ने पहले के बजट में भी यही कहा- मध्यम वर्ग अपनी चिंता खुद करें। ये मध्यम वर्ग के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बजट रहेगा। हेमंत बी. जैन, टैक्स एक्सपर्ट