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स्थाई नौकरी नहीं दे रही सरकार, इसलिए आज से मनरेगा का बहिष्कार

भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर ग्राम पंचायतों में रोजगार की लाइफ लाइन कही जाने वाली मरेगा योजना ठेके पर लगे 274...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 04:35 AM IST
स्थाई नौकरी नहीं दे रही सरकार, इसलिए आज से मनरेगा का बहिष्कार
भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर

ग्राम पंचायतों में रोजगार की लाइफ लाइन कही जाने वाली मरेगा योजना ठेके पर लगे 274 कर्मचारी सोमवार से काम का बहिष्कार करेंगे। ये कर्मचारी पिछले 13 साल से नियमित जाने की मांग कर रहे हैं। इधर, चुनाव सीर पर होने से साल ये कार्मिक साल 2013 के रिक्त पड़े पदों पर स्थाई रूप से समायोजन की मांग कर रहे हैं।

मनरेगा योजना में हाल ही में 40 हजार श्रमिक तमाम पंचायत समितियों में काम कर रही है। इन्हें काम पर लगाने के लिए मस्टररोल जारी करने से लेकर भुगतान करने की जिम्मेदारी पूरी तरह ठेके पर लगाए गए मनरेगा के कर्मचारियों पर है। इन कर्मचारियों को महीने के साल 2005 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना लागू होने के बाद से अब तक इसके प्रचार-प्रसार से लेकर तमाम जिम्मेदारियां निभा रहे इन कर्मचारियों को कम मानदेय दिया जा रहा है कि वे घर तक नहीं चला सकते।

हाल ए सरकार...सरकारी स्टंट

सरकार नियमित करे तो उसे प्रति कर्मचारी कम से कम शुरुआती दो साल में 14 हजार और बाद में कम से कम 24 हजार रुपए वेतन पर रखना होगा। इससे आर्थिक भार सरकार पर 3 लाख 83 हजार 600 रु. का मासिक खर्च बैठेगा। वर्तमान में औसत 10 हजार मानदेय के लिहाज से यह भुगतान करीब एक लाख रुपए कम 2 लाख 74 हजार हो रहा है। ऐसे में सीधे-सीधे एक लाख रुपए तो यही बचत हो रही है। वहीं यदि इन्हें नियमित कर दे तो न्यूनतम 24 हजार रुपए के हिसाब से यह राशि 65 लाख 76 हजार रुपए देनी होगी। ऐसे में सरकार पर करीब 60 लाख रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार केवल डूंगरपुर जिले में ही आ जाएगा। यही स्थिति तमाम अन्य जिलों को मिलाकर काफी बड़ी हो रही है। इससे बचने का रास्ता निकालने के लिए सरकार ने नाममात्र के मानदेय में 13 साल से इन कार्मिकों से काम कराया है। हर साल इनका अनुबंध बढ़ाकर देश की सबसे बड़ी रोजगार देने वाली योजना चलाई जा रही है।

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स्थाई नौकरी नहीं दे रही सरकार, इसलिए आज से मनरेगा का बहिष्कार

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