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माता-पिता का अपमान करने से पुण्य नहीं मिलता : बापू

3 वर्ष पहले
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शिव कथा वाचक गिरी बापू ने शिवमहापुराण में भगवान शिव के अपमान और दक्षेश्वर शिवलिंग का वृतान्त सुनाया। शिव कथा के प्रारम्भ में महर्षि वेद व्यास की स्तुति सुनाते हुए माता सती की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि सती के पिता राजा दक्ष को घमंड था, जिन्होंने अपने नगर में भव्य यज्ञ कराया। इस यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। माता सती ने हट करते हुए यज्ञ में जाने का हठ किया। शिवजी के मना करने के बावजूद माता सती राजा दक्ष के यज्ञ में पहुंची। जहां राजा दक्ष ने भगवान शिव की बुराई करते हुए अपमान किया। गिरि बापू ने कहां की माता-पिता हमारा पहला तीर्थ है, इसके बाद भगवान के सारे तीर्थ है। कोई व्यक्ति माता पिता को दु:खी करता तो उसे ईश्वरीय तीर्थ की यात्रा का पुण्य नहीं मिलता। मानव जीवन में माता पिता ही हमारे पहले गुरु और भगवान है इसकी सेवा मात्र से ही हमारा कल्याण अवश्य होगा। सती ने पिता दक्ष से महादेव के अपमान की बात कर स्वत: ही अग्रि प्रकट किया और भस्म होगी। जिस पर शिव ने गुस्से में आकर दक्ष का सिर धड़ से अलग कर दिया। दक्ष का सिर यज्ञ में गिर कर भस्म हो गया। भृगु ऋषि ने शिव से प्रार्थना कर दक्ष को जीवित करने आग्रह किया। शिवजी प्रकट होकर बोले जो जीव मिले उसका सर लाओ, रास्ते में बकरा मिला। जिसका सर दक्ष के धड़ पर लगाया और क्षमा कर कहा कभी भी अशुद्ध वाणी विचार का प्रयोग नही करना चाहिए। क्योंकि शब्दों में आत्मीय प्राण होते है जो कर्म वाणी और विचार ऐसे हो जिसके खुद का व दूसरे का कल्याण हो। शिव ने दक्ष को क्षमा कर वरदान मांगने को कहां दक्ष ने शिव से लिंग स्वरूप दर्शन की अभिलाषा चाही तो भगवान शिव लिंग स्वरूप प्रकट हुए। जो वर्तमान में दक्षेश्वर महादेव के नाम से पूजा होती है। सती के अंग को शिवजी ने अपनी जटा में हिमालय में इधर-उधर विचरण करने लगे तब सती के अंग गिरने लगे और भूलोक में जहां-जहां गिरे वह शक्ति पीठों की स्थापना हुए जो वर्तमान में युग में पूजा जाता है। बापू ने मेरा जीवन कोर कागज और जवानी नींद में खोई और बूढ़ापा देखकर रोया भजन गाकर उस पर मानव जीवन की विवेचना की। कथा में पूर्व डूंगरपुर राजघराने की राजमाता को शिवमहापुराण की आरती का लाभ मिला। शुक्रवार को द्वादश ज्योतिलिंग की विवेचना होगी। बापू ने डूंगरपुर में शिवकथा की सफलता सहयोग देने के लिए सभापति केके गुप्ता को धन्यवाद दिया। साथ ही नगरवासियों की स्वच्छता में सहयोग जनमानस के अनुशासन की भी प्रशंसा की। नगर भ्रमण के दौरान फतेहगढी, शहीद स्मारक पार्क, बादल महल, खोडियाल माता मंदिर, उदय विलास, देख कर प्रशंसा की। नक्षत्र गार्डन देख बापू ने कहा कि ऐसे गार्डन हमारे यहां पर भी बनाएंगे। रोटी बैंक के सफल संचालन पर बधाई दी।

डूंगरपुर. शिवकथा में भगवान शिव के अपमान और दक्षेश्वर शिवलिंग का वृतान्त सुनती महिला श्रद्धालु।

डूंगरपुर. शिवमहापुराण की आरती करते कथा वाचक और श्रद्धालु।

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