निर्ममता... जन्म लेते ही नवजात बेटी को रात 2 बजे कंपकंपाती ठंड में नंगे बदन झाड़ियों में फेंका, मासूम के ऊफर डाल रखे कांटे, बच्ची की हालत देख सभी का कलेजा मुंह को आ गया, डॉक्टर बोले- मासूम जिंदा है पर यह किसी चमत्कार से कम नहीं / निर्ममता... जन्म लेते ही नवजात बेटी को रात 2 बजे कंपकंपाती ठंड में नंगे बदन झाड़ियों में फेंका, मासूम के ऊफर डाल रखे कांटे, बच्ची की हालत देख सभी का कलेजा मुंह को आ गया, डॉक्टर बोले- मासूम जिंदा है पर यह किसी चमत्कार से कम नहीं

डूंगरपुर न्यूज: मां से बेटी की अभिलाषा पढ़िए... सब मुझसे मिलने आएंगे, तुम भी आना मां, मैं तुम्हें देखकर रोऊंगी नहीं...

Bhaskar News

Jan 13, 2019, 11:23 AM IST
Dungarpur News newborn daughter thrown  bushes at 2 o'clock in Shiver cold

डूंगरपुर (राजस्थान)। शुक्रवार रात करीब दो से तीन बजे के बीच जन्मी नवजात बालिका को पैदा होते ही परिजनों ने कड़ाके की सर्दी में बिना कपड़े के जमीन पर लिटा कर ऊपर कंटीली झाड़ियां डाल दी और चले गए। मौके के हालात पर बिखरा खून यह भी साबित कर रहा था कि महिला का प्रसव भी इसी स्थान पर हुआ।


सुबह सात बजे जब बच्चे स्कूल के लिए निकले तो उसकी रोने की आवाज सुनकर ठिठक गए और कुछ ही देर में यह बेटी बचाने वालों की गोद में थी। हालांकि तेज ठंड झेलने के कारण इसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। घटना गुमानपुरा-मोकमपुरा गांव के पास की। कंटीली झांड़ियों से ढके नवजात को देखकर बच्चों ने ग्रामीणों को बताया। कुछ ही देर में एम्बुलेंस और पुलिस आ गई। इसके बाद वे जब झांड़ियों के बीच पहुंचे तो देखा की पास ही खून का ढेर था। नवजात के ऊपर बड़ी मात्रा में कांटे डाल रखे थे।


13 नवजात मिले 3 साल में
पिछले तीन साल में झाडिय़ों में नवजात को फेंक देने के 13 मामले सामने आए है। इसमें से 11 को बचाने में सफलता भी हासिल की है। दो जान भी गई है। सरकार ने ऐसे में मामलों में बचाने के लिए जिला मुख्यालय पर पालना घर बनाए है। यहां पहचान भी छिपाई जाती है। ऐसे में बच्चों को फेंकने के बजाए इनको सुरक्षित जीवन दिया सकता है।


संभवतया डिलेवरी भी यहीं
झाडिय़ों के पास ही बड़ी मात्रा में खून फैला हुआ था। इतना खून देखकर एम्बुलेंस के ईएमटी का कहना रहा कि यहीं खुले में महिला की डिलेवरी करवाई होगी। इतना खून डिलेवरी के दौरान ही निकलता है।


अनैतिक संबधों के परिणाम का शक
चिकित्सालय पहुंचने के तत्काल बाद बच्ची का इलाज शुरू हो गया। डॉ. कल्पेश जैन बताया कि नवजात बच्ची को साढ़े सात बजे इसको यहां लाए। बच्ची का हालत देखकर लग रहा है कि यह तीन चार घंटे पहले ही पैदा हुई है। इसका वजन 1 किलो 600 ग्राम है। डिलेवरी समय से पहले हुई है। बच्ची में आक्सीजन की कमी है। शरीर में कई कांटे चुभे थे। इसको निकाल लिया है। फिलहाल स्थिति नाजुक है, पर बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। देवल चौकी प्रभारी गिरीराजसिंह ने बताया कि मौके के हालात बता रहे है कि यह अनैतिक संबधों का यह परिणाम हो सकता है। इस तरह के मामलों में बदनामी से बचने के लिए अभिभावक गुपचुप डिलेवरी कराकर नवजात को फेंक देते है। हम इस पूरे क्षेत्र का सर्वे करेंगे। मां के खिलाफ अपने ही बच्चों को मारने का मामला दर्ज किया है।


ठंड से श्वसन तंत्र प्रभावित, 2 रोगों की चपेट में
बच्ची यहां आई, तब जन्म के करीब चार घंटे हो गए थे। यानी रात के 2 से 3 बजे इसका जन्म हुआ होगा। उस वक्त तापमान 7 से 10 डिग्री के बीच था। बगैर कपड़ों के चार घंटे नवजात ने निकाले। यह जीवित आई, इस बारे में यहीं कहूंगा कि यह चमत्कार से कम नहीं है। मेडिकल साइंस की भाषा में कहे तो नवजात का चार घंटे खुले में रहने से रेस्पीरेटरी और हाइपोथरमिया होना ही था। यानी पहले श्वसन तंत्र प्रभावित होना और इसके बाद ठंड से मौत। हालाकि, बच्ची इन दोनों रोग की फिलहाल चपेट में है। जख्मों का भी दर्द है। फिलहाल वार्मर में बच्ची को रखा है। सांस लेने में दिक्कतें है। ऑक्सीजन अभी भी चल रही है। पूरे मेडिकल के कॅरियर में ऐसा अब तक नहीं देखा। अभी भी इसकी स्थिति को नाजुक है। इसे कुदरत ने ही अब तक बचाकर रखा हुआ है। हम इलाज कर रहे है, आप भी इसके लिए दुआ करें। डॉ. कल्पेश जैन, शिशु रोग विशेषज्ञ


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Dungarpur News newborn daughter thrown  bushes at 2 o'clock in Shiver cold
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