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सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर स्टाफ उठा रहे पढ़ाई का खर्चा

सरकारी स्कूलों में अब प्रधानाचार्य से लेकर स्टाफ प्रवेशोत्सव में अधिक से अधिक बच्चों को आकर्षित करने और प्राइवेट...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:45 AM IST

सरकारी स्कूलों में अब प्रधानाचार्य से लेकर स्टाफ प्रवेशोत्सव में अधिक से अधिक बच्चों को आकर्षित करने और प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने के लिए नवाचार का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसका असर अब समाज में पॉजिटिव नजर आ रहा है। इसके लिए कक्षा 9 व 10 में बेटियों के लिए निशुल्क शिक्षा, शैक्षणिक सामग्री की उपलब्धता, स्कूल की भौतिक सुविधा और गुणवत्ता पर फोकस किया जा रहा है। जिससे सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन पर लगाम लगाई जा सके।

पिछले कई वर्षों से प्राइवेट स्कूलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होने से सरकारी स्कूलों का नामांकन घटता चला गया। जिसके कारण पिछले पांच वर्ष में सरकार की ओर से करीब 400 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया है। वहीं कुछ स्कूलों को एकीकरण में शामिल कर दिया गया है।

इससे सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति को कम आंका गया है। इसका नुकसान जिले में लगातार शिक्षकों के पदों का घटना और सरकारी शिक्षकों का मान सम्मान कम होना है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की इमेज सिर्फ गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को एडमिशन देकर पढ़ाई कराने की रह गई है। इससे शिक्षक समाज लम्बे समय से चितिंत रह रहा है। ऐसे में अब इसी भ्रांतियों को तोड़ते हुए सरकारी स्कूलों की इमेज सुधारने का काम लगातार किया जा रहा है।

प्रवेशोत्सव में अधिक प्रवेश दिलाने के लिए बेटियों का शिक्षा खर्च उठा रहे हैं तो ड्रॉप आउट बच्चियों को स्कूल से जोड़ रहे

कुछ नवाचार जो इस वर्ष शुरू हुए हैं

शहर के महारावल स्कूल में कक्षा नवमी में प्रवेश करने वाली बेटियों की फीस स्टाफ की ओर से भरी जाएगी। वहीं कक्षा 9 से 12 वीं तक अंग्रेजी माध्यम में अध्ययन शुरू कराया जाएगा।

शहर के देवेंद्र गर्ल्स स्कूल ने भी एसडीएमसी, भामाशाह और स्टॉफ की मदद से देवेंद्र बालिका शिक्षा कोष की स्थापना की है, जिससे बेटियों को निशुल्क शिक्षा के साथ, गणवेश और पाठ्य सामग्री दी जाएगी।

राजकीय बालिका माध्यमिक स्कूल झौंथरी में कक्षा 1 से 10 तक की बेटियों की फीस नहीं लगेगी। साथ ही उन्हें पाठ्य सामग्री जैसे रजिस्ट्रर और पेन स्कूल स्टाफ की ओर से दिया जाएगा।

राउमावि करौली में शिक्षिका लक्ष्मी यादव की ओर से ड्रॉप आउट छात्राओं की लिस्ट बनाकर ढूंढ़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्हें पुन: स्कूल से जोड़कर कक्षा बारहवीं तक का खर्चा उठाने की जिम्मेदारी एक शिक्षिका और प्रधानाचार्य ने ली है।

राउमावि जेठाणा में स्कूल की भौतिक सुविधा को लेकर विशेष वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है। जहां पर स्कूल की भौतिक स्थिति के साथ ही सुविधाओं की जानकारी दी।

जनप्रतिनिधि और सरकारी कार्मिक के संतान को सरकारी स्कूलों में प्रवेश का लक्ष्य

शिक्षक संगठन रेसा पी के जिलाध्यक्ष डायालाल पाटीदार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में कठिन प्रतिस्पर्धा के बाद शिक्षक बनता है। सरकारी स्कूलों के प्रवेशित बच्चों को तैयार करने में सरकारी शिक्षक की अहम भूमिका होती है। संगठन स्तर पर सभी जनप्रतिनिधि और सरकारी कार्मिक के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

जिले के सभी सरकारी स्कूल का स्टाफ मानसिक रूप से प्रवेशोत्सव के लिए तैयार है। इसके लिए सभी मिलकर अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। इसमें कई स्टाफ और प्रधानाचार्य ने बेटियों की फीस भरने का निर्णय लिया है। कुछ पाठ्य सामग्री निशुल्क दे रहे हैं। ये अच्छा प्रयास है। सभी मिलकर प्रयास करेंगे तो अच्छा नामांकन प्राप्त कर सकेंगे। प्रकाश शर्मा, एडीईओ माध्यमिक शिक्षा डूंगरपुर

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