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महिला सशक्तिकरण की राह में बाल विवाह सबसे बड़ी बाधा: सिसोदिया

एक वर्ष पहले
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महिला दिवस के उपलक्ष्य में बार एसोसिएशन सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष महेन्द्रसिंह सिसोदिया की अध्यक्षता में म्हारी दिकरी कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान पारिवारिक न्यायालय न्यायाधीश एमआर सुथार, मोटरयान दुर्घटना दावा अधिकरण न्यायाधीश नाहरसिंह मीणा, विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अमित सहलोत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेन्द्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजन खत्री, डूंगरपुर एसडीएम सुरेश खटीक, बार एसोसिएशन सचिव पुष्कर चैबीसा, हृदय संस्थान के संस्थापक बीके भारतीय, सचिव नीता भारतीय ने पोस्टर विमोचन कर म्हारी दिकरी, बाल विवाह मुक्त डूंगरपुर अभियान का शुभारंभ किया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्रसिंह सिसोदिया ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई होने के साथ ही कानूनन अपराध भी है। बच्चों के बचपन, किशोरावस्था व शिक्षा के अवसर को छीनता है। बाल विवाह से बच्चों का शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक तथा भावानात्मक विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाता है। वे परिपक्वता के अभाव के कारण शिक्षा एवं अर्थपूर्ण कार्यों से वंचित रह जाते हैं। इसकी वजह से मातृत्व एवं शिशु रोगों व कुपोषित बच्चे, बीमारियों और घरेलू हिंसा जैसी अनेक तरह की समस्याओं में उलझकर अपने जीवन को बर्बाद कर लेते हैं। ऐसे में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करके महिला सशक्तिकरण की राह को आसान बनाया जा सकता है। हमें बाल विवाह को जड़ से समाप्त करने के लिए बेटियों को शिक्षित बनाना होगा, ताकि एक बेहतर समाज की नींव रखी जा सकें।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अमित सहलोत ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य नालसा योजना के तहत बाल अधिकारों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बच्चों के अधिकारों को सर्वोपरि रखकर बाल विवाह संबंधी कानूनी प्रावधान, बाल विवाह के दुष्परिणाम, कारणों, रोकथाम, उपायों के बारे में समाज में जागरूकता फैलाना है ताकि बच्चों के साथ हो रहे अत्याचार को कम किया जा सकें। बाल विवाह करने पर कानूनन दो वर्ष का कारावास एवं एक लाख के जुर्माने का भी प्रावधान है। बाल विवाह की रोकथाम लोगों की सहभागिता के बिना संभव नहीं हो सकती है, इस कारण म्हारी दिकरी अभियान के माध्यम से बाल विवाह निषेध जागरूकता अभियान को ओर अधिक प्रभावी बनाकर ज्यादा से ज्यादा जनभागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हृदय संस्थान सचिव नीता भारतीय ने बताया कि पूरे जिले में बाल विवाह के खिलाफ वातावरण निर्माण करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में बाल विवाह निषेध समितियों का गठन किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविरों का आयोजन होगा। जिले के एक लाख नाबालिग बच्चों के परिवारों से संकल्प पत्र भरवाए जाएंगे। हर गांव में 25-25 बालिकाओं की टोली आमजन को बाल विवाह मुक्त डूंगरपुर बनाने के लिए जागरूक करेगी। विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अमित सहलोत ने आभार जताया। संचालन बीके भारतीय ने किया। उल्लेखनीय है कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुपालना में जिले में एक विशेष नवाचार के तहत म्हारी दिकरी योजना के तहत प्रथम चरण में डूंगरपुर को पूर्ण बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

डूंगरपुर. कार्यक्रम में उपस्थित जज, अधिकारी, अधिवक्ता व अन्य।

डूंगरपुर को बाल विवाह मुक्त बनाने के पोस्टर का विमोचन करते जज।
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