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नई बाव का होना था विकास, अनुपयोगी सब्जीमंडी को हटा दिया

एक वर्ष पहले
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नगर के बीच मांडवी चौक के पास ऐतिहासिक महत्व से खास करीब 800 वर्ष पुरानी नई बाव के अस्तित्व को खुर्दबुर्द कर उसके ऊपर सब्जी मंडी बनाई गई थी। जिसका शिलान्यास 1 जुलाई 1996 को और लोकार्पण 14 मई 1999 को हुआ था।

तब से लेकर साल दर साल बीतते गए। नगर पालिका प्रशासन की बेरुखी के चलते किसी भी सब्जी विक्रेता ने वहां बैठकर व्यापार नहीं किया। ऐतिहासिक धरोहर खुर्दबुर्द हुई, न पानी का उपयोग हुआ न सब्जी मंडी का। वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में लेकर पानी के पारंपरिक स्त्रोत को वापस आबाद करने का निर्णय लिया गया। पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन कलेक्टर सुरेंद्र कुमार सोलंकी के निर्देशों पर करीब 18 साल बाद इस बावड़ी को वापस खुलवाया गया। नई बाव पर बनाई गई अनुपयोगी सब्जी मंडी को हटा दिया गया, लेकिन उसके बाद बाव की सफाई कराने, एक बार पुराना पानी पूरा निकाल देने समेत आगे की योजना पर काम नहीं हुआ। इसके ऊपर सब्जी मंडी बनाने के लिए बावड़ी को पूरी तरह से ढक दिया गया था। जिसके बाद इसमें गंदगी फैली रहने से बावड़ी का पानी किसी के उपयोग में नहीं आ रहा है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में नगरपालिका को नई बाव को वापस खुलवा कर पीएचईडी के साथ मिलकर उसके पानी को उपयोग में लिया जा सके इसके लिए प्राथमिकता से कार्ययोजना तैयार करनी थी।

सांसद मद से 5 लाख रुपए की लागत से बनी सब्जी मंडी

तत्कालीन राज्य सभा सांसद कनकमल कटारा द्वारा सांसद मद से 5 लाख रुपए की लागत से सब्जी मंडी बनवाई गई थी। सब्जी विक्रेताओं को दुकानें भी आवंटित कर दी गई लेकिन उन्हें यहां बैठाने के लिये कोई ठोस पहल नहीं हुई थी। ऐसे में एक ओर जहां पुरातात्विक महत्व की धरोहर नई बाव के अस्तित्व को खुर्दबुर्द कर दिया, वहीं लाखों रुपयों की लागत से बनाई सब्जी मंडी भी नकारा साबित हुई थी।

नगर के मांडवी चौक पर टाउन हॉल के पास ऐतिहासिक धरोहर नई बाव।
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