छात्रावास में जगह-जगह गंदगी, पलंग टूटे मीनू अनुसार भोजन नहीं, वार्डन निलंबित

Dungarpur News - कलक्टर आलोक रंजन ने मंगलवार को ओबरी कस्बे के डूंगरपुर रोड स्थित टीएडी छात्रावास का निरीक्षण किया। यहां वार्डन...

Dec 04, 2019, 12:05 PM IST
Sagwara News - rajasthan news dirt in the hostel no food as per broken menu warden suspended
कलक्टर आलोक रंजन ने मंगलवार को ओबरी कस्बे के डूंगरपुर रोड स्थित टीएडी छात्रावास का निरीक्षण किया। यहां वार्डन जीवतराम डेण्डोर नदारद थे। मूवमेंट रजिस्टर देखा तो इसमें बगैर अवकाश स्वीकृत कराए शादी में जाने की बात वार्डन ने लिखी थी। छात्रावास में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे थे तथा कमरों में पर्याप्त सफाई नहीं थी। सामान भी इधर-उधर बिखरा पड़ा था। स्कूल समय होने पर अधिकांश बच्चे स्कूल में थे। दो बीमार बच्चे मिली। पड़ताल में सामने आया कि छात्रों को तय मीनू के अनुरूप खाना भी नहीं दिया जा रहा था। छात्रों के पलंग टूटे थे। छात्र ट्यूबवेल का पानी पीने के उपयोग में ले रहे थे। स्टॉक रजिस्टर में एंट्री भी आधी-अधूरी थी। इसे देखकर कलक्टर रंजन ने काफी नाराजगी जताई। बदहाली को देखकर कलेक्टर ने तत्काल वार्डन को बुलवाया। करीब आधे घंटे में वार्डन जीवतराम डेण्डोर यहां पहुंचा और अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए छात्रावास की जर्जर स्थिति गिनाते हुए यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं से कलेक्टर का ध्यान भटकाने की कोशिश करने लगा। इस पर कलेक्टर उखड़ गए। कलेक्टर ने यहां उपस्थिति पंजिका में छात्रों की संख्या देखी, यह लगभग पूरी थी। इस पर कलेक्टर ने पूछा कि उपस्थिति रजिस्टर में उपस्थित सभी छात्र स्कूल में है क्या। वार्डन के हां कहने पर कलेक्टर उपस्थिति रजिस्टर लेकर स्कूल पहुंचे। यहां पूरे छात्र नहीं मिले। इस पर कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच और इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट कार्यवाहक परियोजना अधिकारी सुरेशचन्द्र खटीक को शाम तक देने के निर्देश दिए। कलेक्टर के आदेश बाद खटीक ने मामले की जांच की और रात सात बजे वार्डन जीवतराम को निलम्बित करने के आदेश जारी कर वहां का चार्ज तत्काल प्रभाव से बालिका छात्रावास की वार्डन कांता डेंडोर को देने के निर्देश दिए। निलम्बन समय के दौरान जीवतरात को टीएडी कार्यालय में उपस्थिति देने के निर्देश दिए।



ओबरी में छात्रों से सवाल-जवाब करते कलक्टर आलोक रंजन।

स्कूल में बने शिक्षक, बच्चों की ली कक्षा

कलक्टर ने छात्रों से सवाल-जवाब किए। कक्षा 11 व 12 कॉमर्स की कक्षाओं में स्वयं अध्यापक बनकर एक-एक कालंाश लिए। कक्षा 12 के कॉमर्स के छात्र 35 का 100 की गुणा करने पर आने वाली संख्या का उत्तर नहीं दे पाए। शैक्षणिक स्तर कमजोर मिलने पर कलक्टर ने राउमावि के समस्त स्टाफ की भी कक्षाएं ली। स्टाफ से कक्षा में बच्चों को बिना किताब देखे अध्यापन कार्य करवाया। उन्होंने शिक्षकों को छात्रों को नवाचार की तकनीकों के साथ अध्यापन कार्य कराने के भी मार्गदर्शन दिया।

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