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- Dungarpur News Rajasthan News For The First Time In The District 196 Km Of Roads Will Be Made Of Plastic Waste 115 Crore Will Be Spent
जिले में पहली बार प्लास्टिक के कचरे से बनेगी 196 किमी की सड़कें, 115 करोड़ खर्च होंगे
केंद्र सरकार की ओर से बारिश में सड़क के बार-बार टूटने से रोकने के लिए अब प्लास्टिक टेक्नोलॉजी की सड़क बनाई जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण में सड़क निर्माण कार्य में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करेगी। केंद्र सरकार की ओर से नई टेक्नोलॉजी का अध्ययन कर उपयोग कर रही हैं। प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से निर्मित होने वाली कोई भी सड़क जलभराव के बाद जल्द नहीं टूटेगी। इस बार मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि की डिजायर की जगह टेक्नोलॉजी के आधार पर यह सड़कें चयनित हुई हैं। यहां पांचों पंचायत समिति में सड़कों का चिन्हीकरण हा़े चुका है अाैर दीपावली से पहले काम शुरू होगा। जिले में कुल 196 किमी. की सड़क पर 115 करोड़ खर्च होंगे। यह टेक्नोलॉजी जुस्को ने जमशेदपुर में वर्ष 2011 में अपनाई थी। इको-फ्रेंडली होने से प्लास्टिक कचरे का निस्तारण आसानी से होता है। निजी इंजीनियरिंग कंपनियां इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बड़े संस्थानों की इंटरनल सड़क बनाने में कर रही हैं। योजना में केंद्र सरकार की ओर से 60 प्रतिशत और राज्य सरकार का 40 प्रतिशत पैसा का उपयोग कर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस सड़क के लिए किसी मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधी का हस्तक्षेप खत्म कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक गांव में उपस्थित सरकारी भवन, जनसंख्या, वहां बने भवनों तक लोगो की पहुंच सड़क बनाने के लिए डिजीटल टैक्नोलॉजी का उपयोग किया है। इसी को आधार रखते हुए सड़क की स्वीकृति जारी हुई है। इसके लिए सेटेलाइट सर्वे का उपभोग किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा यात्री भार और लोगो को सरकारी भवनों जैसे सीएचसी, सीनियर स्कूल, ग्राम पंचायत तक जोडने के लिए आ रही परेशानी को देखते हुए सड़कों की स्वीकृति जारी की है।
फायदे: सड़क की मजबूती और क्षमता बढ़ेगी
}सड़क की मजबूती बढ़ती है। }जल भराव के प्रति रजिस्टेंस बढ़ता है। }लोड सहने की क्षमता बढ़ती है। }मेंटिनेंस कॉस्ट में कमी आती है। }रोड की लाइफ काफी बढ़ जाती है।
5 पंचायत समिति में 196 किमी सड़कों का दिवाली से पहले शुरू होगा काम
1. सागवाड़ा
} आंतरी से ओबरी खडग़दा सड़क: 19 किमी.
} पाड़वा कराड़ा, गडा वासन से करियाणा सड़क: 6 किमी.
} सागवाड़ा से डोली सड़क: 7 किमी.
2. सीमलवाड़ा
} कुंआ से पुनावाड़ा चौकड़ी गुजरात बॉर्डर तक 10.200 किमी.
} कुंआ से डूंगर सड़क पुनावाड़ा मोड तक 6.5 किमी.
} कुंआ से गरियाता मीठी लीमड़ी तक 8.200 किमी.
दरियाटी से बासिया तक 6.5 किमी.
3.आसपुर
} पूंजपुर से काब्जा तक 5.250 किमी.
} बड़ौदा से पिंडावल तक 16 किमी. तक
} डूंगरपुर से गणेशपुर तक 7 किमी.
} आसपुर से विजवामाता साबला रोड़ तक करीब 21.750 किमी.
4. बिछीवाड़ा
} गैजी घाटा, मानातलाई गलंदर से रामसागड़ा सड़क तक 6 किमी.
} गामडी देवल से शिशोद तक 3 किमी.
} बरौठी से पालिसौड़ा वाया तलैया स्टेट बॉर्डर तक 19.400 किमी.
5. डूंगरपुर
} डूंगरपुर से गणेशपुर आसपुर 11 किमी.
} खेडा कच्छवासा, वस्सी से गोकुलपुरा भेमला खेमारू सड़क तक 13.290
} झौथरी, आंतरी, सुराता ओबरी तक 20 किमी.
} सकरण बनकोड़ा 7 किमी. सड़क तक।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में पिछले लंबे समय से स्वीकृति जारी नहीं हो रही थी। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति बदहाल हो रही थी। अधिकांश गांवों में पिछले 20 से 25 वर्षों से सड़क बनाने की मांग चल रही थी, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते सड़कों की स्वीकृति सही मांग के अनुसार नहीं हो रही थी। अब टेक्नोलॉजी के अनुसार डेटा के आधार पर सड़क की स्वीकृति मिलने के बाद नई सड़क बनाने के आदेश जारी हुए हैं।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू कर काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में लोगो को राहत मिलेगी। वहीं नई टेक्नोलॉजी प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा।
- एनएस मीना, एसई, पीडब्ल्यूडी डूंगरपुर
सड़क बनाने में जो प्लास्टिक उपयोग में लाई जा सकती है उसमें कैरी बैग, प्लास्टिक कप और गिलास, पान मसाले के रैपर, बिस्किट, चॉकलेट के रैपर, दूध और किराने के सामानों की पैकिंग वाले प्लास्टिक शामिल किए जा सकते हैं। एक किलोमीटर सड़क निर्माण करने में करीब 10 से 12 टन तारकोल लगता है। इतनी मात्रा में एक टन प्लास्टिक कचरे का प्रयोग सड़क निर्माण में किया जा सकता है। 100 किमी सड़क निर्माण में 100 टन तारकोल और गिट्टी की बचत होती है। इसके साथ ही शहर व आसपास के क्षेत्रों में भी प्लािस्टक कचरे नजर नहीं आएंगे।
प्लास्टिक कचरे में ये हो सकते हैं शामिल
प्लास्टिक कचरे को जमा किया जाता है। इसे एक विशेष प्रकार की मशीन में डालकर 2 से 4 मिलीमीटर आकार के टुकड़े बनाए जाते हैं। इन प्लास्टिक टुकड़ों को सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाली गिट्टी में डालकर 150 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। करीब एक घंटे की इस प्रक्रिया के बाद प्लास्टिक के टुकड़े गिट्टी के साथ उसी के आकार में चिपक जाते हैं। इसके बाद इस गिट्टी को तारकोल में मिलाया जाता है। फिर इसे सड़क पर बिछाया जाता है। इस तरह प्लास्टिक के टुकड़े गिट्टी और तारकोल के बीच दोगुनी क्षमता के साथ पकड़ बनाए रखता है।
इस तरह होता है प्लास्टिक कचरे का उपयोग