पूर्व सीएमएचओ का कारनामा; खुद के गबन की फाइल ही गायब करवा दी

Dungarpur News - डॉ. राजेश शर्मा ने पीएचसी तलैया में संविदा काल के दौरान किया था गबन तनुज शर्मा|डूंगरपुर संविदा पर 13 साल पहले...

Jan 10, 2020, 07:30 AM IST
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डॉ. राजेश शर्मा ने पीएचसी तलैया में संविदा काल के दौरान किया था गबन

तनुज शर्मा|डूंगरपुर

संविदा पर 13 साल पहले लगे एक डाॅक्टर ने जननी सुरक्षा याेजना की राशि का गबन किया। अाराेप प्रमाणित हाे गए तो सेवाएं समाप्त कर दी गई। कुछ सालों के बाद वो ही डॉक्टर सीएमएचओ बनकर फिर डूंगरपुर आए। यहां आते ही इनके गबन की फाइल का शोर फिर शुरू हुआ तो डॉक्टर को राजनीतिक साथ मिला और जिला प्रमुख के जरिए गबन की फाइल ही गायब करवा दी गई।

मामला पूर्व सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार शर्मा से जुड़ा है। शर्मा 12 जुलाई 2017 से 9 जुलाई 2018 तक सीएमएचओ रहे। इसी दौरान यह फाइल गायब हो गई। डॉ. शर्मा ने वर्ष 2008 में पीएचसी तलैया में संविदा पर कार्य किया था। यहां पर उनके खिलाफ पद पर रहते हुए जननी सुरक्षा योजना की राशि के दुरुपयोग व गबन करने का मामला सामने आया था। जांच में गबन प्रमाणित भी हाे गया। उसके बाद से गबन प्रकरण की मूल पत्रावली चिकित्सा विभाग के कार्यालय में थी। अब विभाग से यही मूल पत्रावली दो साल से गायब है। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। गबन की मूल फाइल जिला प्रमुख माधवलाल वरहात के कहने पर इनके पीए को 22 सितंबर 2017 को विभाग की ओर से अवलोकन के नाम पर दे दी। इसके बाद से ही फाइल के अते-पते नहीं है। सीएमएचओ डॉ. महेंद्र परमार ने कहा कि यह मामला मेरे पद संभालने से पहले का है, अधीनस्थ से जानकारी ले रहे हैं।

भास्कर खुलासा
जिला प्रमुख के कॉल करने पर चिकित्सा विभाग ने उनके पीए को दे दी थी गबन प्रकरण की मूल पत्रावली

डॉ राजेश कुमार शर्मा ने सीएमएचओ डूंगरपुर के रूप में करीब एक साल काम किया। इनके पद पर रहते हुए उनके खिलाफ प्रकरण से जुड़ी जांच की फाइल सीएमएचओ कार्यालय से गायब हो गई। हैरानी की बात है कि यह किसी ने पता करवाने का प्रयास तक नहीं किया कि पत्रावली है कहां पर। पड़ताल के दौरान सामने आया कि इस फाइल की मूल पत्रावली को जिला प्रमुख माधवलाल वरहात के कहने पर इनके निजी सहायक(पीए) सत्यनारायण सिंह ले गए। इससे प्रथम दृष्टया बड़े स्तर पर की गई गड़बड़ी के प्रमाण को राजनैतिक सांठ-गांठ से निपटाने का षडयंत्र सामने आ रहा है। 2 फरवरी 2018 को चिकित्सा विभाग की तरफ से मूल पत्रावली को वापस मांगा गया था। इसके लिए संयुक्त निदेशक को मामले से अवगत कराया गया था। इसके बाद भी मूल पत्रावली को लौटाया नहीं गया। इस बारे में विधायक के पीए सत्यनारायणसिंह का कहना है कि साधारण सभा के दौरान फाइल मांगी गई थी। इसलिए मैं लाया था, लेकिन मैने फाइल वापस लौटा दी थी। तीन-चार महीने के बाद विभाग ने फाइल नहीं मिलने के लिए कहा था। अब मुझे इसकी जानकारी नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि सीएमएचओ कार्यालय से गबन प्रकरण की मूल पत्रावली को निकाले जाने के बाद वापस लौटाने की दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया।

बड़ा सवाल

संविदा काल में नौकरी से बर्खास्त, फिर नौकरी कैसे ज्वाॅइन की

वर्ष 2008 में संयुक्त जांच में गबन प्रमाणित होने के बाद डॉ राजेश कुमार शर्मा की संविदा सेवाएं तत्कालीन कलेक्टर नीरज के पवन ने समाप्त कर दी गई। इसके बाद डॉ राजेश कुमार शर्मा ने हाइकोर्ट की जयपुर बैंच में अपील की। इस पर अभी सुनवाई प्रक्रियाधीन है। अब अगली सुनवाई तारीख 13 जनवरी 2020 मिली है। अभी तक इसका कोई निर्णय नहीं हुआ है। 2008 में ही आरपीएससी के जरिए रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर ग्रामीण की परीक्षा दी। इस परीक्षा में चयनित हुए। जिस ब्लॉक की पीएचसी में जननी सुरक्षा योजना की राशि का गबन किया था। उसी बीसीएमओ बनकर आए। डॉ. शर्मा के यहां पर आने पर डॉक्टरों ने विरोध किया। निदेशालय ने 23 जनवरी 2014 को बीसीएमओ के पद सेे एपीओ कर दिया। इस तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. हनुमान सिंह ने बिछीवाड़ा बीसीएमएचओ पद से कार्यमुक्त किया। इसके बाद स्थगन आदेश मिलने पर फिर से बीसीएमएचओ का कार्यभार संभाला। इस बीच सीएमएचओ का पद रिक्त था। इस पर डॉ राजेश कुमार शर्मा कार्यसंपादन के लिए सीएमएचओ बनकर आ गए।

विभाग के पास केवल पीए की प्राप्ति रसीद, भास्कर के पास है पत्रावली का रिकार्ड

जिला प्रमुख वरहात ने नंबर 9602611187 से फोन कर सीएमएचओ से प्रकरण से संबंधित मूल पत्रावली चाही। जिला प्रमुख के निजी सहायक अध्यापक सत्यनारायण सिंह 22 सितंबर 2017 को कार्यालय में उपस्थित हुए। इस पर चिकित्सा विभाग ने गबन प्रकरण की मूल पत्रावली सुपुर्द की। तलैया पीएचसी 2008 की जांच रिपोर्ट से संबंधित कार्यालय टिप्पणी की मूल प्रतियां, मेवाड़ा पीएचसी में विरेंद्र कटारा नर्स प्रथम को हटाने संंबंधी मूलपत्र, आदेश संख्या, बैठक कार्यवाही विवरण, कार्यालय टिप्पणी के मूल दस्तावेज पीए अपने साथ ले गए। सीएमएचओ कार्यालय से गबन प्रकरण की मूल पत्रावली को निकाले जाने के बाद वापस लौटाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। खुद विभाग के अधिकारी भी इस फाइल से अनजान रहे। गाैरतलब तलैया पीएचसी से संबंधित 38 प्रसुताओं एवं आशाओं को जननी सुरक्षा योजना का भुगतान किया। 38 मामलों में से जांच रिपोर्ट के अनुसार 21 प्रसूताओं की घर पर डिलेवरी हुई। फर्जी रिकार्ड तैयार कर 21 प्रसूताओं की डिलीवरी को अस्पताल में होना बता कर सरकारी योजना से फर्जीवाड़ा किया गया। प्रसूताओं व आशाओं को कम राशि देकर तत्कालीन डॉ राजेश शर्मा ने एक लाख रुपए गबन किया। इस पर जांच के बाद पुलिस थाने में केस दर्ज कराने के लिए कहा था। राशि की वसूली भी नहीं हो सकी। संयुक्त जांच कार्यवाही में डॉ राजेश कुमार शर्मा दोषी पाए गए थे। इसके बाद तत्कालीन जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जांच में डॉ शर्मा दोषी पाए गए थे।

मूल फाइल नहीं मंगवाई, मुझे ध्यान नहीं, मैं पता करके बताऊंगा


भास्कर ने एक महीने तक पड़ताल कर निकाली फाइल की फोटोप्रति

गबन प्रकरण जांच व कार्यालय टिप्पणी की मूल पत्रावली दैनिक भास्कर के हाथ लगी है। दैनिक भास्कर टीम ने करीब एक माह तक प्रयास कर इस फाइल की फोटोकॉपी को हासिल करने का काम किया। रिकार्ड हाथ लगने के बाद भी जिला प्रमुख ने जनप्रतिनिधि होते हुए भी फाइल स्वयं के पास होने से इनकार कर दिया है। जबकि विभाग स्वयं वर्ष 2018 में जिला प्रमुख को मूल पत्रावली वापस लौटाने के लिए पत्र लिख चुका है।

यह है कहानी का असल, सच और मुख्य किरदार

नया चैलेंज

लो अब कर लो कार्रवाई

मुझे इसकी जानकारी नहीं : डॉ. शर्मा


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