जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े

Dungarpur News - कभी -कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े, जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े.........ये पंक्तियां भगवान श्रीराम के वनवास...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 10:25 AM IST
Pith News - rajasthan news ganga crossed the boat to lord rama
कभी -कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े, जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े.........ये पंक्तियां भगवान श्रीराम के वनवास जाने के दौरान केवट से हुए संवाद संबंधी प्रसंग की हैं। जिसका वर्णन करते हुए लालीवाव मठ में व्यास पीठ से कथावाचक अनिल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि त्रिलोकनाथ जब मानव अवतार में गंगा के तट पहुंचे, तो केवट ने उनसे विनती की कि मैं आपके चरण धोए बिना आपको नाव में नहीं बैठने दूंगा।

जिसका कारण आपके चरणों की रज पत्थर की मूर्ति को छूते ही मूर्ति ने नारी का स्वरूप ले लिया था। यदि आपके चरण की रज मेरी नाव को छू गई तो न जाने ये किस रूप में बदल जाएगी। केवट ने राम से ऐसा कह कर चरण धोए और पुण्य कमा लिए। उन्होंने केवट के चातुर्य पर प्रकाश डालते हुए कहा जब गंगा पार करने पर राम ने सीता से मुद्रिका लेकर केवट को देनी चाही तो केवट ने इंकार कर दिया। केवट ने कहा कि आप गंगा घाट आए और मैंने आपको नाव से गंगा पार करवा दी, जब मैं आपके घाट आऊंगा तब आप मुझे भवसागर से पार लगा देना कह कर अपने जन्म जन्मांतर सुधार लिए। इस अवसर पर भगवान पद्मनाभ मंदिर में राम केवट प्रसंग की झांकी मठ के दीपक तेली ने सजाई, जो भक्तों के खासे आकर्षण का केंद्र रही। महामंडलेश्वर हरिओमदास महाराज ने कहा की ‘‘जहां भगवान पद्मनाभ की म्हेर है, वहां तो लीला लहेर छे’’। उन्होंने कहा कि जीवन में सुखी होना हो तो नीति अच्छी होनी चाहिए। कथा के आंरभ में सुभाष अग्रवाल, महेश राणा, मनोहर मेहता, दीपक तेली, डॉ. विश्वास बंगाली, हर्ष राठौड़, जोगेश्वरी भट्ट आदि भक्तों द्वारा माल्यार्पण किया गया।

चरण पूजनीय हैं

वेद शास्त्रों में चरण पूजनीय हैं क्योंकि पूरी शक्ति चरणों पर केंद्रित होती है। मस्तक चरणों में टेकने से हमारी ज्ञान शक्ति जागृत होती है।

कथा व्यापक होती है

भगवान का अवतार सबको जोड़ने के लिए, मनुष्य को उनके आदर्शों को अपनाकर मानव जीवन सार्थक बनाने के लिए होता है। इसके साथ नामकरण, पूतना वध, गौचारण, माखन चोरी, अधासुर, बकासुर, शकटासुर, तृणावर्त आदि दैत्यों का उद्धार, कालिया नाग का उद्धार, चीरहरण व गोवर्धन पूजा आदि प्रसंग सुनाए गए। इसके साथ ही शाम 6 बजे भागवतजी की आरती उतारी गई। संचालन शिक्षाविद् शांतिलाल भावसार ने किया।

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