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होली अपने घर की मनाते है, गांव के पुराने दोस्तों की टोली के साथ मनाते हैं होली...

एक वर्ष पहले
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डूंगरपुर. सम्मेलन के दौरान कविता पेश करती कवियत्री।

डूंगरपुर|नगर परिषद की ओर से होली की पूर्व संध्या पर रविवार को शहर के गेपसागर की पाल पर हास्य कवि सम्मेलन हुअा। सभापति केके गुप्ता के मार्गदर्शन में हुए कवि सम्मेलन में कवियाें ने देर रात तक श्राेताअाें काे गुदगुदाया।

कवियों ने स्वच्छता की नगरी डूंगरपुर में कन्या भ्रूण हत्या, गांव की संस्कृति, महिला दिवस, देश की रक्षा और सुरक्षा, कोरोना वायरस और सामाजिक समरसता को लेकर कविता पाठ किया। इंदौर के मुकेश मौलवा ने देश की संस्कृति पर हमला करने वालों को आडे़ हाथ लिया। उन्होंने हास्य के माध्यम से नीरस हुए समाज में हंसी का संचार किया। कविता िजसकी गाथा स्वयं बेणेश्वर महादेव ने गाई है, वागड़ की शेरनी ताे वीरबाला कालीबाई है....। राजसमंद के कवि सुनील व्यास ने कविता के माध्यम से गांव के परिवेश को समझाया। उन्होंने आअाें अब की होली घर की मनाते है, गांव चलते, बनाकर वहीं पुरानी दोस्तों की टोली अब की बार घर पर होली मनाते है.....। गांव में रहेगा तो पिता के नाम से जाना जाएगा और शहर में आएगा तो मकान के नंबर से पहचाने जाएगा.....। मोदी नगर के कवि बलवीर खिचडी डॉक्टर अच्छा मिला तो ओर बात है, जीवित बच्चा मिले तो और बात है, अस्पताल में डिलीवरी हो नोर्मल, खुद का ही बच्चा मिले और बात है..., कविता के माध्यम से उन्होंने अस्पताल की स्थिति को हास्य दिखाया। उन्होंने मनुष्य के स्वभाव को बताते हुए कहा कि पीने वाला जल ही था, नगर निगम का नल था लेकिन गिरा टब में पूर्णकर्म का फल ही था....। उज्जैन के कवि हिमांशु बवंडर ने गरीब का उपहास उड़ाने वाले दिल और दिमाग से गरीब होते है....। दिल्ली की कवियत्री मोनिका ने यदि प्यार में हम इतने समर्पित नहीं होते, दुनिया में तेरे नाम से चर्चित नहीं होते....। कांकरोली के कवि सम्पत सुरीला ने महिला दिवस के उपलक्ष्य में कन्या भ्रूण हत्या पर कविता मेरे माता पिता ही कसाई है, अब इससे ज्यादा क्या कहना, मुझे गर्भ में ही मार डाला, मेरी कोख में ही चिता जलाई। अब मेरे जन्म से पहले विदाई कर दी.....। एक चर्चा यहां पर हर सुबह और शाम हो जाए। इक्कीसवी सदी में कोई ऐसा काम हो जाए, स्वच्छता अभियान के अवसर एक संकल्प हम ले.....। देश मेरा किसी मंदिर सा पावन धाम हो जाए, कविता पेश की। धंबोला के कवि विपुल विद्रोही ने मंच संचालक की भूमिका निभाते हुए कहा कि कविता के माध्यम से संदेश दिया। कवि विक्रांत चौबीसा, हैरी रावल ने कविता पाठ किया।
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