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जैन मंदिर में सिद्ध चक्र महामंडलऔर नंदीश्वर विधान की पूर्णाहुति

एक वर्ष पहले
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पुनर्वास कॉलोनी के विमलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल और नंदीश्वर विधान की पूर्णाहुति हुई। वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी महाराज ससंघ के सानिध्य में विधि विधान के साथ पूर्णहुति हुई। जिसमें श्रद्धालुओं ने स्वैच्छिक योगदान दिया।

इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्माचार्य कनकनंदी महाराज ने कहा कि शुभ और धार्मिक कार्य की सदैव अनुमोदना करनी चाहिए। श्रेष्ठ कार्य की अनुमोदना से महान पुण्य बंध होता है। पाप कार्यों की प्रशंसा और अनुमोदना कभी नहीं करनी चाहिए। इससे हम भी पाप में बराबर के भागीदार बन जाते हैं। सदैव पुण्य कार्यों और धार्मिक कार्यों की अनुमोदना करने से पुण्य में भाग मिलता है। आचार्य ने कहा कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान चतुर्थ कालीन विधान है, इसकी पूजा-भक्ति ख्याति-लाभ से परे निदान रहित होकर करनी चाहिए। इसके पूजन से आत्म तत्व और आत्म शुद्धि की प्राप्ति होती है। पंचकल्याणक विधान, देव, शास्त्र, गुरु की आराधना आदि परमात्मा बनने का माध्यम हैं। इस अवसर पर मुनि सुविज्ञ सागरजी, मुनि आध्यात्मनंदीजी, आर्यिका सुवत्सल मति माताजी, क्षुल्लिका सुविक्षम मति, परागश्री, ब्रह्मचारी सोहनलाल, खुशपाल, ब्र. संध्या दीदी, आशा दीदी, समाज के अध्यक्ष महावीर जैन, सुमतिलाल, अनोखीलाल विजयलक्ष्मी जैन समेत कई श्रद्धालु मौजूद थे।

धर्म समाज संस्था**

सागवाड़ा. विधान की पूर्णाहुति पर आचार्य को अर्ध्य समर्पित करते हुए।
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