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इंसान की फितरत, जो नही है वहीं चाहता है

एक वर्ष पहले
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आचार्य श्रीसंघ का मंगल प्रवेश शनिवार सवेरे कनबा से होते हुए गामड़ी अहाड़ा कस्बे में हुआ। जहां जैन समाज सहित ग्रामवासियों ने उनका जगह जगह स्वागत एवं पाद प्रक्षालन हुआ।

आचार्य अनुभव सागर महाराज ने गामड़ी अहाड़ा सांस्कृतिक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए इंसान के स्वभाव को बेंजामिन दिजरयाली के शब्दों में समझाया और कहा कि नियमानुसार इंसान मूर्ख है क्योंकि वह गर्मी में ठंडा चाहता है और ठंडे में गरम तथा सदैव जो नही है अथवा जो नही हो सकता है उसी का इंतजार करता है। मनुष्य की मोहमाया और तृष्णा कभी सन्तुष्ट नही होती इसीलिए दुखी रहता है। आचार्य ने कहा कि तृष्णा मुक्त होने एवं रसमय जीवन जीने पर जोर दिया। संत सदैव ज्ञान का प्रसार करते है, मनुष्य को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए ज्ञान बांटने से ही बढ़ता है। सभा मे उपस्थित युवाओं एवं छात्रों को युवावस्था का आनंद लेने का सुझाव दिया साथ ही कहा कि जब तक बैचलर है तब तक जीवन का आनंद उठाओ एवं अपने कर्मों से ऊर्जा के साथ पूरी दुनिया मे प्रतिष्ठा अर्जित करो।

रामायण का उद्धरण देते हुए इंसान को अहम से मुक्त रहने का संदेश दिया। धर्मसभा एवं आहारचर्या के बाद आचार्य ने शाम को भी सांस्कृतिक भवन में धर्मसभा को संबोधित किया। आचार्य का मंगल विहार रविवार को गैंजी के लिए होगा।

धर्म समाज संस्था

गामडी अहाड़ा. सांस्कृतिक भवन में प्रवचन देते आचार्य अनुभव सागर।
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