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भीलूड़ा में भूमि पर लहू की बंूद गिराने की रस्म निभाने के लिए पत्थरों की राड़, 42 जनें जख्मी,तीन गंभीर
होली के अवसर पर यहां पर पत्थरों की राड़ खेल कर शौर्य प्रदर्शन किया। वहीं हजारों लोगों इस आयोजन के साक्षी बने। राड़ प्रारंभ होने से लेकर अंत तक जख्मी हुए लोग लहूलुहान होकर पीएचसी में उपचार के लिए आते रहे। चिकित्सा अधिकारी डॉ लक्षित भट्ट के अनुसार राड़ के दौरान 42 लोग जख्मी हुए। इसमें से तीन गणेशपुरी निवासी हितेश पाटीदार, जेठाणा निवासी अनिल राव व रातडिया निवासी राकेश बामणिया को गंभीर चोट लगने के कारण सागवाड़ा रैफर करना पड़ा। रघुनाथजी मंदिर के पास स्थित मैदान पर सैकड़ों लोग पैरों में घुघरू, हाथों में ढाल व गोफण एवं सिर पर साफा पहने मैदान में दो दलों में बंट गए। वहीं राड़ देखने आए लोग सुरक्षित स्थानों की ओट में चले गए। कुछ ही समय में ऊपर व नीचे नाम से विभाजित दोनों दलों की ओर से हाथों व गोफण से पत्थर बरसाना प्रारंभ हो गया। राड़ प्रारंभ होने के साथ ही पत्थरों की चोट लगने से लहूलुहान हालत में लोगों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए आना भी शुरू हो गया। करीब दो घंटे तक आमने-सामने खेली गयी राड़ में तीन लोगों को गंभ्ीर चोट पहुंची। होली से पूर्व प्रशासन व पुलिस ने ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधि व प्रबुद्ध लोगों के साथ बैठक कर राड़ को प्रतीकात्मक रूप में रस्म अदा करने तक सीमित करने की अपील की थी। इसके बाद प्रबुद्ध जनों ने राड़ को प्रतीकात्मक स्वरूप में खेलने की पहल कर जन संपर्क भी किया लेकिन इसका कोई भी प्रभाव नहीं दिखा। वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा 81 जनें घायल हुए थे।
घर पर मरीज देखने वाले डाॅक्टराें को फीस भी बतानी होगी
भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर
सरकारी अस्पतालाें के डाॅक्टराें काे अब प्राइवेट प्रैक्टिस के दाैरान मरीज काे अपने लेटरपैड पर बीमारी काे लेकर परामर्श व दवा लिखने के साथ-साथ फीस की रसीद भी देनी हाेगी। इस स्लिप पर डाॅक्टर का नाम, पता, विशेषता सहित शुल्क कितना लिया गया है, ये सब कुछ अंकित करवाना हाेगा। इस बारे में चिकित्सा विभाग के निदेशालय ने अादेश जारी किए हैं। निदेशालय काे डाॅक्टर्स के द्वारा लंबे समय से मनमर्जी का शुल्क वसूलने की शिकायतें मिल रहीं थीं। इसके बाद निदेशालय ने विशेष आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों में किस ग्रेड के चिकित्सक काे कितना शुल्क लिए जाने के लिए अधिकृत किया गया है इसकी भी सूची जारी की है। नई व्यवस्था के बाद मरीजों को राहत मिलेगी वहीं डॉक्टरों भी एक निश्चित
राशि ही वसूल कर सकेंगे।
चिकित्सकों का शुल्क निर्धारित किया, यह है सूची
}निदेशालय की सूची में मेडिकल अाॅफिसर, मेडिकल कॅालेज से जुड़े डाॅक्टर, सरकारी व प्राइवेट प्रेक्टिस वाले डाॅक्टर्स शामिल हैं।
} गांवों में लगे हुए मेडिकल ऑफिसर प्रति मरीज 75 रुपए शुल्क लेंगे।
} सीनियर मेडिकल अाॅफिसर, जूनियर विशेषज्ञ, सहायक अाचार्य, ग्रामीण अंचल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर 100 रुपए फीस लेंगे।
} एसोसिएट प्रो. व सी. स्पेशलिस्ट 125 रुपए प्रति मरीज शुल्क लेंगे।
} आचार्य ग्रेड के लिए 150 रुपए शुल्क होगा।
} सीनियर प्रोफेसर 200 साै रुपए शुल्क लेंगे।
मान्यता: सती के श्राप का असर, हर साल खेली जाती है राड़
वर्षों से खेली जाने वाली राड़ के पीछे कारण पूछे जाने पर बुजुर्गांे का कहना है कि रियासत काल में राजा जगमालसिंह होली के दिन यहां रघुनाथजी मंदिर में दर्शन कर जा रहे थे कि उसी समय पाटीदार समाज का एक व्यक्ति अपनी बैलगाड़ी लेकर जा रहा था। इसके पीछे चल रहे उसके कुत्ते का नाम भी जगमाल था। उसने जब अपने कुत्ते को जगमाल नाम से पुकारा तो राजा को यह सुनकर गुस्सा आ गया कि मेरा नाम का कुत्ता कैसे हो सकता है। उसने अपने सैनिकों को उसे सजा देने का आदेश दिया। राड़ खेलने के स्थान पर वह पाटीदार मारा गया।। इसके बाद उसकी प|ी भी उसी स्थान पर सती हो गयी। सती होने पर उसने श्राप दिया कि जिस स्थान पर मेरा पति मारा गया। उस स्थान पर हर वर्ष खून नहीं बहा तो अहित होगा। लोगों ने उस स्थान पर सती का मंदिर बनाया जो आज भी है। हर वर्ष होली के दिन पत्थरों की राड़ खेल कर खून गिराने की परंपरा शुरू की जो अब तक चल रहीं है।
आदेश में तय किया किस ग्रेड के डाॅक्टर कितनी लेंगे फीस, ज्यादा लिए तो विभाग करेगा कार्रवाई
निदेशालय के इन आदेशों का आमजन पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। अब चिकित्सक मरीजों से चाहकर भी अधिक राशि नहीं वसूल सकेंगे। निदेशालय स्तर पर कार्रवाई हाेने के भय से बोर्ड लगाएंगे इससे पता चल जाएगा कि किस डाॅक्टर का कितना शुल्क है। निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त निदेशक द्वारा जारी किए आदेशों में लिखा है कि डाॅक्टर अपने निवास पर राेगियों काे देखने के दौरान निर्धारित शुल्क से अधिक फीस ले रहे हैं। किसी भी मरीज काे फीस की रसीद नहीं दी जाती। यहां तक कि डाॅक्टर्स ने अपने यहां परामर्श शुल्क का डिस्प्ले भी नहीं लगा रखा है। कई चिकित्सक तो ऐसे भी है जो मरीजों से 300 से लेकर 500 रुपए तक शुल्क वसूलते हैं। मरीज को भी मजबूरी में इसे चुकाना पड़ता है। डूंगरपुर शहर और जिले में बड़ी संख्या में डाॅक्टर अस्पताल समय के बाद अपने घर पर निजी रूप से मरीजों को देखते है। इस दौरान वे जो शुल्क लेते है, उसकी कोई लिखित रसीद मरीजों को नहीं देते। इलाज नहीं करने के डर से मरीज भी डाॅक्टर जो शुल्क मांगता है, वह चुका देते हैं। ऐसे में उनका शोषण भी होता है। वहीं डॉक्टर की भी बिना किसी दस्तावेज से दोहरी कमाई होती है।
सख्ती }प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाॅक्टराें के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है
17 वर्षों में 858 लोग हो चुके घायल, कई गांवों के लोग बने साक्षी
बांसवाड़ा, गुरुवार, 12 मार्च, 2020