एमसीआई टीम की जांच में मेडिकल काॅलेज में 39 डॉक्टर गैर हाजिर, तीसरे बैच की अनुमति पर संकट

Dungarpur News - मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष आने वाले तीसरा बैच की अनुमति पर मेडिकल काॅलेज की लापरवाही से संशय के बादल मंडरा गए हैं।...

Feb 27, 2020, 08:11 AM IST
Dungarpur News - rajasthan news mci team examines 39 doctors in medical college

मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष आने वाले तीसरा बैच की अनुमति पर मेडिकल काॅलेज की लापरवाही से संशय के बादल मंडरा गए हैं। बुधवार को मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया, एमसीआई की टीम ने तीसरे बैच की 100 सीटों के लिए भौतिक कार्य के साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सबसे अहम स्टाफ की भारी कमी मिली है। यहां 89 डॉक्टर्स में से 39 तथा 47 रेजीडेंटस में से 9 अनुपस्थित मिले।

प्राचार्य डॉ. शलभ शर्मा ने स्टाफ की पूर्ति के लिए 17 डॉक्टर को उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज से रिलीव करवाकर तत्काल डूंगरपुर भी बुलाया गया लेकिन ये डॉक्टर तय समय से काफी देरी से पहुंचने के कारण टीम ने इनको मान्य नहीं किया। ऐसे में टीम तीसरे बैच की अनुमति के सीधे िमलने की राह में एक बड़ा राेड़ा अा गया है।

हालांकि राजस्थान सरकार अपने स्तर पर एमसीआई को संतुष्ट करे तो तीसरा बैच की अनुमति मिल सकती है। बुधवार को डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के लिए एमसीआई को-आर्डिनेटर डॉ. अतुल जैन सहित तीन जनों की टीम आई थी। टीम सुबह करीब 9 बजे मेडिकल कॉलेज थाणा पहुंंची और निरीक्षण शुरू कर दिया। एमसीआई को-आर्डिनेटर डॉ. जैन ने मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ व इन्फ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण किया वहीं टीम के दो अन्य सदस्यों ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में काफी संख्या में डॉक्टर्स अनुपस्थित मिले। टीम ने मेडिकल वार्ड, सर्जीकल वार्ड, सीटी स्केन, ब्लड बैंक, सेंट्रल लैब, एमसीएच आदि का भौतिक निरीक्षण किया। इधर, मेडिकल कॉलेज थाणा में टीम प्रभारी डॉ. जैन ने तीसरे बैच के लिए जरूरी फेकल्टी की व्यवस्थाओं को देखा। बताया गया है कि गत वर्ष 2019 में अक्टूबर में एमसीआई की टीम ने मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष सितंबर में आने वाले तीसरे बैच के लिए निरीक्षण किया था। उस समय 16 कमियां मिलने के साथ ही स्टॉफ की काफी कमी मिली थी। उस समय डाक्टर्स की कमी 22 प्रतिशत तथा रेजीडेंटस की कमी 6 प्रतिशत थी। जबकि बुधवार को दूसरे बार के निरीक्षण में यह कमी अाैर बढ़ गई। डॉक्टर्स की कमी 43.2 तथा रेजीडेंटस की कमी 19.6 प्रतिशत पहुंच गई। एमसीआई टीम ने इसको काफी गंभीर माना है। नियमों के अनुसार तीसरे बैच की अनुमति के लिए डॉक्टर्स की कमी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं और रेजीडेंटस की कमी 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

अब यह होगा आगे: राज्य सरकार और राजमेस डॉक्टर्स की संख्या पूर्ति की जिम्मेदारी लें तो मिल सकती है अनुमति
एमसीआई को-आर्डिनेटर डॉ. अतुल जैन को मेडिकल कॉलेज डूंगरपुर में निरीक्षण के दौरान मिली खामियों की रिपोर्ट दिल्ली स्थित एमसीआई मुख्यालय को प्रेषित करेंगे। इसके बाद स्टॉफ की कमी के चलते तीसरे बैच की अनुमति को रोकने के संभावित निर्णय से राजमेस और सरकार को अवगत कराया जा सकता है।

अक्टूबर में किए निरीक्षण में बताई थी 17 कमियां, इनमें से 16 को कर दिया सही

सितंबर 2020 में मेडिकल कॉलेज थाणा में एमबीबीएस छात्रों का तीसरा बैच आ जाएगा। गत वर्ष अक्टूबर में तीसरे बैच की अनुमति के लिए निरीक्षण में मिली करीब 17 कमियों में से 16 को बुधवार को हुए दूसरे निरीक्षण में पूरा पाया गया लेकिन जो सबसे बड़ी कमी स्टॉफ की थी, इस निरीक्षण में पहले निरीक्षण से कहीं ज्यादा बढ़ गई। जो काफी गंभीर है। अब बड़ा सवाल इस साल आने वाले तीसरे बैच को लेकर है। हालाकि, मेडिकल काॅलेज की अाेर से तात्कालिन प्रबंध के प्रयास िकए गए अाैर उदयपुर से 16 डाॅक्टराें काे रिलीव कर यहां बुलवा भी लिया। साथ ही दलील दी कि इनकी सेवाएं यहीं रहेगी। खास यह कि मेडिकल काॅलेज में यह समय निरीक्षण का माना जा रहा था अाैर एेसे समय में इतनी बड़ी संख्या एक साथ डाॅक्टराें काे रिलीव देना भी कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही की अाेर इशारा कर रही हैं।

विधानसभा में दूसरी बार गूंजी मेडिकल काॅलेज की गड़बड़ी, सेंट्रल लैब की खराब मशीनाें का उठाया मुद्दा

भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर

जनजाति बहुल क्षेत्र डूंगरपुर में सरकार की ओर से नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को चौरासी विधायक राजकुमार रोत ने विधानसभा में उठाया। विधायक ने गत दिनों सेंट्रल लैब में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से जनप्रतिनिधियों को धोखे में रखते हुए खराब एनालाइजर का उद्घाटन कराने तथा यहां लापरवाही के चलते खराब पड़ी अनेक मशीनों को जानबूझकर ठीक न कराने तथा इनकी खरीद-फरोख्त पर भी सवालिया निशान लगाया। कहा कि सरकार की ओर से मुहैया अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं लोगों को नहीं मिल रही है। ग्रामीण ही नहीं जिला अस्पताल आने वाले हजारों मरीजों को हर माह गुजरात जाकर इलाज कराना पड़ता है। गुजरात के डॉक्टर डूंगरपुर के कलक्टर को कई मर्तबा पत्र लिखकर अवगत करा चुके हैं कि डूंगरपुर से आने वाले मरीजों के खून में हिमोग्लोबिन की काफी कमी है, वर्षों से इसमें सुधार नहीं हो रहा है, कुछ करो। डाक्टर चिकित्सालय में मरीजाें काे देखते ही नहीं हैं। अधिकांश डाॅक्टराें ने चिकित्सालय के अासपास ही अपनी दुकानें खाेल दी है। सदन में बताया कि गत दिसम्बर में में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने जिला अस्पताल में सेंट्रल लैब का उद्घाटन जनप्रतिनिधियों से कराया। इस उद्घाटन में एक ऐसी मशीन का भी पूजन कराया, जो पिछले एक साल से खराब पड़ी थी तथा करीब 70 लाख रुपए कीमत की इस मशीन का उपयोग आज तक नहीं किया गया। अस्पताल में अन्य कई मशीनें भी खराब पड़ी है। जिसमें कुछ मशीनें तो नई होने के साथ ही एक बार भी उपयोग में नहीं ली गई। सरकार जांच करे कि ये मशीनें कैसे खराब हुई और इसका जिम्मेदार कौन है। विधायक ने बताया कि टीएसपी क्षेत्र के लिए एक जनजाति सलाहकार समिति होती है। पूर्व सरकार में इस परिषद के अध्यक्ष जनजाति मंत्री थे, उन्होंने टीएसपी क्षेत्र के विकास को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की थी तो पूर्व सरकार ने उनसे जनजाति सलाहकार परिषद का अध्यक्ष पद ही छीन लिया और खुद मुख्यमंत्री अध्यक्ष बन गए थे। मुख्यमंत्री इतने व्यस्त रहते हैं कि व्यस्तता के चलते सलाह नहीं दे पाते। ऐसे में यहां विकास कैसे होगा।

राजकुमार राेत

डूंगरपुर। सेंट्रल लैब का निरीक्षण करते एमसीआई टीम।

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