मानसून सिर पर, नदी और तालाब को भरने वाले नालों में गंदगी और मलबे के ढेर लगे

Dungarpur News - बारिश का दौर शुरू हो गया है, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों के सभी पानी वाले नाले बंद हैं। इन नालों में मलबा भरा हुआ है...

Jun 14, 2019, 08:05 AM IST
Dungarpur News - rajasthan news on the monsoon head there is a lot of dirt and debris in the drains that fill the river and pond
बारिश का दौर शुरू हो गया है, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों के सभी पानी वाले नाले बंद हैं। इन नालों में मलबा भरा हुआ है या अतिक्रमण के शिकार हैं। इसका असर शहर के तालाबों में भी हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख तालाब खाली है। इन नालों को खुलवाने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई है। ऐसे में बारिश होने के बाद भी तालाब में पानी की आवक नहीं होगी तो खाली ही रह जाएगी।

तालाब, नदियों और जल स्त्रौत को भरने वाले स्त्रोत अतिक्रमण की चपेट में हैं। जहां भू-माफियाओं ने निर्माण कार्य करवा दिया है या फिर मिट्टी डालकर उन नालों को पाटने का प्रयास किया जा रहा है। जल आवक मार्गों के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की गई है, इससे इन तालाबों में पानी की आवक रुक सी जाएगी। प्रशासन चाहे, तो अतिक्रमण की चपेट में आए इन नालों को खुलवाकर फिर से तालाबों में जल की आवक शुरू कर सकती है। इनमें ज्यादातर नाले अतिक्रमण के शिकार, मलबा भरा हुए है।

शहर की स्थिति

शहर की गेपसागर झील में पानी बिलड़ी ग्राम पंचायत के नालों से होता हुआ आता हैं। बिलड़ी गांव के अंदर की तरफ बने दो से तीन नाले और कुशालमगरी के पास के नाले बंद हो रहे है। इनसे गेपसागर झील में पानी की आवक होती है। इसके अलावा तिजवड से उदयविलास रोड पर बने नाले भी गंदगी से भरे हुए है। इनकी सफाई नहीं होने से मलबा भरा हुआ है। तिजवड़ पर गेपसागर झील में जल आवक का प्रमुख नाला है। यहां ऊपर की ओर तिजवड तालाब के भरते ही ऑवर फ्लो पानी इसी नाले से गेपसागर झील में आता है। लेकिन यह नाला पूरी तरह से खरपतवार की चपेट में है। शहरी क्षेत्र के नाले तो साफ हो गए है। पर, ग्राम पंचायतों की सीमा में आने वाले नालों की स्थिति बदहाल है। यहां नालों पर ही पक्के निर्माण भी नजर आ रहे हैं।

पातेला तालाब के लिए जल आवक मार्ग पर अतिक्रमण कर मिट्टी से पाट दिया है। इसके कारण सबसे बड़ा जल आवक मार्ग बंद है। इसके अलावा धनमाता की पहाड़ी और झेर के तालाब से निकालने वालो नाला भी मलबे से अटा पड़ा है। इसके कारण यहां पर पातेला तालाब भरने की कोई संभावना नहीं है। पातेला तालाब से पुराने शहर के हैंडपंप और बोरिंग में वर्ष पर्यन्त तक पानी की आवक रहती है।

डूंगरपुर. तिजवड़ पर एक नाले में जमा गंदगी।

सीमलवाड़ा और चिखली पंचायत समिति में ज्यादा परेशानी

सीमलवाड़ा, चिखली और गलियाकोट में वर्ष 2018 में सबसे कम बारिश हुई थी। इसका असर ये है यहां पर भूमिगत जल स्तर 150 फीट से नीचे चला गया है। यहां के तीन बांध, ग्राम पंचायत के अधिकांश तालाब सूख गए है। इसका सबसे बड़ा नुकसान पशुओं को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सीमलवाड़ा पंचायत समिति के तालाब अतिक्रमण का शिकार होने के कारण पिछले छह वर्ष से लबालब नहीं हुए है। इसके अलावा भेमई, दरियाटी सहित आसपास के गांवों के तालाबों के जल आवक मार्ग पर अतिक्रमण होने के कारण पानी की आवक नहीं होती है। यही हाल सागवाड़ा के तालाबों का है। यहां पर गमलेश्वर, लोहारिया सहित कई बड़े जल स्त्रौत पर अतिक्रमण कर नालों को बंद कर दिया गया है। इसके कारण सागवाड़ा शहर के तालाब पानी से लबालब नहीं रहते है। इसके अलावा आसपास के ग्राम पंचायतों के तालाबों में भी अतिक्रमण किया है।

डूंगरपुर. गेपसागर झील में जाने वाले नाले को ढक दिया।

सफाई के आदेश जारी, जल्द होंगे साफ


-वरसिंह गरासिया, उपखंड अधिकारी डूंगरपुर।

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