ठंडे फर्श पर बच्चों के पढ़ते मिलने की एक माह में भी नहीं भेजी रिपोर्ट

Dungarpur News - शहर के नजदीक सतीरामपुर में ईसाई समुदाय द्वारा संचालित आरजीपीएम स्कूल के निरीक्षण में राजस्थान बाल आयोग सदस्य डॉ....

Jan 16, 2020, 08:06 AM IST
Dungarpur News - rajasthan news report sent not even in a month of children getting read on the cold floor
शहर के नजदीक सतीरामपुर में ईसाई समुदाय द्वारा संचालित आरजीपीएम स्कूल के निरीक्षण में राजस्थान बाल आयोग सदस्य डॉ. शैलेन्द्र पंड्या को मिली भारी अव्यवस्थाओं की जांच को लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग गंभीर नहीं है।

आयोग की ओर से जारी जांच के आदेशों को एक माह बीतने आया है, जबकि जांच रिपोर्ट सात दिन में तैयार कर आयोग को सौंपनी थी। मामला बच्चों से जुड़ा होने से आयोग ने गंभीरता से लिया था लेकिन समाज कल्याण इसमें गंभीर नहीं है। बता दें, आयोग सदस्य डॉ. पंड्या को कड़ाके की सर्दी में 6 से 14 साल तक के बच्चे आरजीपीएम स्कूल में ठंडे फर्श पर पढ़ते मिले तथा बच्चों को यहीं एक कमरे में हॉस्टल बनाकर रखा जा रहा था। यहां पढ़ने वाले बच्चे स्थानीय होने के साथ दीगर जिलों व राज्यों के पाए गए थे। गत 12 दिसम्बर को डूंगरपुर प्रवास पर आए राजस्थान बाल आयोग सदस्य डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने शहर से करीब 15 किमी दूर सतीरामपुरा के जंगल में चल रहे मिशनरी स्कूल व होस्टल का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में यहां काफी अव्यवस्थाएं मिली थी। स्कूल में 140 से अधिक तथा हॉस्टल में 61 बच्चे मिले थे। मौसम सर्द होने के बावजूद बच्चों के लिए किसी प्रकार का बिछावन नहीं था तथा बच्चे ठंडे फर्श पर ही सिकुड़ते हुए पढ़ रहे थे।

शिक्षक के नाम पर सिर्फ एक महिला केयर टेकर मिली जो यहीं पर परिवार के साथ रहती है। होस्टल भी एक कमरे में चल रहा था, जिसमें रात को सभी बच्चे फर्श पर ही सोते हैं। हॉस्टल के अधिकांश बच्चे स्थानीय न होकर प्रतापगढ़, बांसवाड़ा तथा राज्य के अन्य जिलों के साथ दो बच्चे तो राज्य के बाहर के पाए गए। स्कूल में केयर टेकर के अलावा अन्य कोई स्टाफ नहीं था। बच्चों की उम्र भी 6 से 14 साल थी तथा बच्चों को पढ़ाने व हॉस्टल संचालन की अनुमति के संबंध में केयर टेकर कोई जवाब नहीं दे सकी थी। डॉ. पंड्या ने उस समय मौखिक रूप से जिला कलेक्टर आलोक रंजन को इस होम की पूरी जानकारी कर आवश्यक कार्यवाही के आदेश दिए थे। इसके अगले दिन 13 दिसम्बर को आयोग की ओर से जांच के आदेश जारी हुए।

बाल आयोग ने सात दिन में मांगी थी रिपोर्ट, जिम्मेदार विभागों के अधिकारी एक माह से चुप, सतीरामपुर में ईसाई समुदाय द्वारा संचालित स्कूल के निरीक्षण में मिली थी गड़बड़ी

आबादी से दूर पहाड़ी के पीछे चल रहा है मिशनरी स्कूल और पहुंच रास्ता भी कच्चा

मिशनरी स्कूल शहर से करीब पन्द्रह किमी दूर सतीरामपुरा गांव के जंगली क्षेत्र में चल रहा था। स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी धूल भरा कच्चा होकर पहाड़ी के पीछे था, जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल भरा था। स्कूल में सुविधाओं के नाम पर सिर्फ एक ब्लेक बोर्ड व फर्श ही था, जहां 140 से अधिक बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। भवन में दूसरी मंजिल पर एक कमरे में हॉस्टल बनाया गया है।

पुलिस और अन्य अधिकारियों को भी नहीं थी जानकारी, पूछते आैर भटकते पहुंचे

अभावों के बीच जंगल में मिशनरी स्कूल संचालन की सूचना पर आयोग सदस्य डॉ. पंड्या पुलिस अधिकारियों को साथ लेकर औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। स्कूल तक पहुंचने के लिए सतीरामपुरा तक तो रास्ता पक्का था लेकिन यहां से करीब चार किमी जंगल की पग दंडी से होकर पहाड़ी के पीछे मिशनरी स्कूल तक पहुंचा जाता है। इस स्कूल तक पहुंचने के लिए पुलिस अधिकारी भी दो तीन बार रास्ता भूल गए।

विभिन्न विभागों की छह लोगों की कमेटी को करनी थी जांच

आरजीपीएम स्कूल में मिली अव्यवस्थाओं को लेकर आयोग के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों में पोषण स्थिति, शिक्षा विभाग को स्कूल की मान्यता व नाम्र्स के अनुसार सुविधाएं, बाल कल्याण समिति को बच्चों की श्रेणी तथा उनका रखरखाव की सुविधाएं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्यवाही की जानी थी। लेकिन ना तो अभी कोई जांच की गई है और ना ही कार्यवाही।


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