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यहां बनने वाले सेनेटरी पेड ऑनलाइन बिकेंगे, बच्चाें का टेलेंट निखारने के लिए बेंगलूरु से आएंगे एक्सपर्ट

एक वर्ष पहले
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डूंगरपुर की बेटी पल्लवी मेहता ने विदेशों में नौकरी की। फिर बेंगलूरु में बुकलेस स्कूल खोला। खूब नाम कमाया लेकिन माटी का कर्ज चुकाना बाकी थी। इसलिए वह लौटीं। पल्लवी के पिता विजय मेहता समाजसेवी और ट्रांसपोर्ट व्यवसायी हैं। एक सफल उद्यमी, मोटिवेटर और चाइल्ड साइकोलॉजी में एक्सपर्ट पल्लवी पिछले दिनाें यहां आईं। नगर परिषद की ओर से महिला सशक्तिकरण के लिए चल रहे प्रोजेक्ट को देखा ताे इससे खासा प्रभावित हुई अाैर चुपचाप इससे जुड़ गई। शहर में सैनेटरी पेड मशीन (लेडी विंग) और उन्नति कार्यक्रम से जुड़ाव बढ़ाया। इन महिलाओं के बने उत्पाद को ऑनलाइन बाजार में उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी। मेहता ने बताया कि यहां के उत्पाद से महिला आत्मनिर्भर हो रही हंै। इसके अलावा इन प्रोडक्ट को क्वालिटी और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम किया जाएगा। पल्लवी मेहता ने बताया कि उनके बेंगलूरु में चेसिंग परपल काइट के माध्यम से डूंगरपुर के बच्चों को मंच देने का प्रयास किया जाएगा। इसमें यहां पर राष्ट्रीय स्तर के ट्रेनर को बुलाकर आगे सिखाया जाएगा। इसमें सिगिंग, वाद्ययंत्र, आर्ट एंड क्राफ्ट, सभी प्रकार के खेल, पर्सनेलिटी डवलपमेंट, राइटिंग और स्किल डवलपमेंट पर फोकस करना शुरू कर दिया हैं।

बेंगलूरु में एक्टिविटी स्कूल, 2 से 80 साल तक विद्यार्थी, सफल प्रयोग से डूंगरपुर जुड़ेगा

पल्लवी ने बेंगलूरु में 2013 में स्कूल बिल्डिंग ब्लॉक से संस्थान का गठन किया। यहां छह माह से दस साल तक के बच्चों की देखभाल की जाती है। इस स्कूल काे बुकलेस बनाया। यहां बच्चाें काे किताबाें से नहीं, प्रयाेगाें से पढ़ाया जाता है। बुकलेस स्कूल 25 प्रतिशत मॉटिसरी है। यानी काम के साथ लर्निग। यहां पर बच्चों को किताबों की जगह लर्निंग के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। हर बच्चे के फिटनेस पर फोकस होता है। इसके बाद 2016 में चेसिंग परपल काइट द एक्टिवटी क्यूब से स्कूल बनाई। यह 2 साल से 80 वर्ष तक के लोगों के लिए है। जहां पर स्किल डवलपमेंट व हुमन साइकोलॉजी पर फोकस किया जाता है। चेसिंग परपल काइट द एक्टिवटी क्यूब स्कूल में हर उम्र के लाेग अाते हैं। अब इसे पूरे शहर में लागू करेंगे।

20 महिलाएं रोज बनाती है 1 हजार पेड

नगर परिषद के लेडी विंग सेनेटरी पेड प्रोजेक्ट में कुल 20 महिलाएं जुड़ी हुई है। जहां पर प्रतिदिन 1000 सेनेटरी पेड बनाए जाते हैं। इसी प्रकार उन्नति प्रोजेक्ट में 30 महिलाएं जुड़ी हुई है। जो प्रतिदिन पत्तल दोने 5 हजार, एक हजार कपड़े की थैली और 10 किलो पापड़ तैयार किए जाते हैं।

डूंगरपुर. सेनेटरी पेड का निर्माण करती महिलाएं।

महिला दिवस पर विशेष

पल्लवी बताती है कि मन में इच्छा थी िक डूंगरपुर में कुछ करे। दिसंबर 2019 में नगर परिषद के महिला सशक्तिरण के प्रोजेक्ट काे देखा ताे लगा कि यहां के लोगो के पास टैलेंट है, लेकिन दिशा नहीं है। इसी पक्ष काे ध्यान में रखते हुए शुरुअात की। गुणवत्ता अाैर मार्केटिंग पर फाेकस किया। नगर परिषद की दो बड़ी पहल से महिलाओं में आशा जगी है। हम वागड़ के लोग समस्या पर ज्यादा फोकस करते हंै समाधान पर नहीं। उन्होंने कहा कि जब लेडी विंग (सेनेटरी पेड) को देखा तो मन में उत्साह जगा। वहां पर काम करने वाली महिलाओं से बात की तो पता चला कि वो खुद इन पेड का इस्तेमाल नहीं करती हैं। हमें इसी बदलाव पर आगे बढ़ना है। इसी हिसाब से कार्य की याेजना तैयार कर रहे हैं। काम काे महिलाअाें की सुविधा के अनुसार घंटाें में बांटा गया। रुचि काे परखने का कार्य अाैर इसी अनुरूप िजम्मा देना तय िकया। अपनी बात काे प्रभावी रूप से रखने वाली महिलाअाें काे मार्केटिंग का िजम्मा िदया। प्रयास यही है कि प्रोडक्शन ज्यादा हाे। गुणवत्ता बेहतर हाे। साथ ही महिलाअाें में अात्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़े।

पल्लवी मेहता, मोटिवेटर और चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट
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